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अध्ययन: दुनिया में संक्रमण से हर साल हो रहीं 77 लाख मौतें, साफ-सफाई बचा सकती है जान
Sat, 25 May 2024 06:24 AM IST
निर्मल कांत
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 25 May 2024 06:24 AM IST
सार
Health: अध्ययन के मुताबिक, निम्न और मध्यम आय वर्ग वाले देशों में सालाना रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) की वजह से 7.50 लाख लोगों की मौत हो रही है। यह तब होता है जब कोई बैक्टीरिया या वायरस रोगाणु रोधी दवाओं के लिए प्रतिरोधी हो जाते हैं।
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अकेले हाथों की स्वच्छता से बच सकता है तीन लाख से ज्यादा लोगों का जीवन
- फोटो : फ्रीपिक
विस्तार
हर साल दुनिया में संक्रमण से करीब 77 लाख मौतें हो रही हैं, जिनमें 50 लाख मौतें ऐसे जीवाणुओं के कारण हो रही हैं जो एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो गए हैं। संक्रमण की रोकथाम पर जोर दिया जाए तो हर साल करीब 7.50 लाख जिंदगियों को बचाया जा सकता है।
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द लैंसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। अध्ययन के मुताबिक, निम्न और मध्यम आय वर्ग वाले देशों में सालाना रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) की वजह से 7.50 लाख लोगों की मौत हो रही है। यह तब होता है जब कोई बैक्टीरिया या वायरस रोगाणु रोधी दवाओं के लिए प्रतिरोधी हो जाते हैं। अगर इस स्थिति से बचना है तो लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए जागरूकता लाने पर जोर देना चाहिए। केवल हाथों की साफ-सफाई से तीन लाख से ज्यादा लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। इसके अलावा सुरक्षित पीने के पानी तक सबकी पहुंच बनाने और बच्चों के लिए नए टीके में इजाफा करने से भी कई मौतों को टाला जा सकता है।
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हाथों की सफाई बेहद जरूरी
शोधकर्ताओं ने जब हाथ स्वच्छता के साथ-साथ उपकरणों की नियमित सफाई और रोगाणुनाशन सहित स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में संक्रमण की रोकथाम के उपायों पर काम शुरू किया तो कुछ ही समय में पाया कि इनके जरिये कम से कम शुरुआती दौर में प्रति वर्ष 3.37 लाख मौतों को बचाया जा सकता है।
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उन्होंने पाया कि सुरक्षित पेयजल और प्रभावी स्वच्छता तक लोगों की पहुंच बनाने से प्रति वर्ष लगभग 2.5 लाख मौतों को टाला जा सकता है। इसके अलावा बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष टीकों को बढ़ावा दिया जाए तो प्रति वर्ष 1.82 लाख जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
कोरोना महामारी से नया जोखिम पैदा हुआ
नाइजीरिया के इबादान विश्वविद्यालय की प्रो. इरुका ओकेके ने कहा, दुनिया के लिए असरदार एंटीबायोटिक दवाओं तक पहुंच जरूरी है। अगर इसमें विफलता मिलती है तो जीवन और स्वास्थ्य को लेकर सतत विकास लक्ष्य को पूरा नहीं कर सकते।
दूसरा सच यह भी है कि पूरी दुनिया में इन दवाओं की वजह से रोगाणुरोधी प्रतिरोध बढ़ रहा है। कोरोना महामारी में एंटीबायोटिक दवाओं का जबरन उपयोग हुआ, जिसने नया जोखिम पैदा किया है।