स्वस्थ और मजबूत ईको सिस्टम है महामारियों का स्थायी इलाज
- जंगली जानवरों में पलने-बढ़ने वाले वायरस फैलाते हैं महामारी
- कोरोना समेत ज्यादातर वायरस जीव-जंतुओं से इंसानों में पहुंचे
- शहरी इको सिस्टम खुद ही होता है कमजोर
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विस्तार
विशेषज्ञों के मुताबिक, जंगली जानवरों पर पलने-बढ़ने वाले वायरस महामारी फैलाते हैं। कोविड-19 व इसी तरह के दूसरे वायरस से होने वाले ज्यादातर रोग जंगली जीव-जंतुओं से इंसानों में पहुंचते हैं। इसकी बड़ी वजह क्रियाशील व जटिल इको सिस्टम का खत्म होते जाना है। इससे वायरस जंगल से इंसानी बस्तियों की तरफ की रुख कर लेता है। नतीजतन, यह कोरोना वायरस और इसी तरह की दूसरी महामारियों को जन्म देता है।
- सक्रिय और जटिल इको सिस्टम इस तरह सुरक्षा कवच का करता है काम
- शहरी इको सिस्टम खुद ही होता है कमजोर
- विशेषज्ञों की राय
-प्रो. सीआर बाबू, पर्यावरणविद् और पूर्व प्रो-वीसी दिल्ली विश्वविद्यालय
एक क्रियाशील इको सिस्टम के जटिल खाद्य जाल (फूड वेब) में रोगजनक वायरस को खत्म करने में स्तनधारी वन्य जीवों की भूमिका अहम होती है। इनका संरक्षण स्वस्थ और मजबूत जैव विविधता वाले क्षेत्रों में ही संभव है।
-डॉ. फैयाज खुदसर, वन्यजीव विशेषज्ञ
- जैव विविधता व सार्वजनिक स्वास्थ्य पर वेबीनार का आयोजन
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अफ्रीका में एचआईवी का वायरस चिम्पांजी से इंसानों में पहुंचा है।
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अफ्रीका में ही इबोला वायरस चमगादड़ से इंसानों में आया है।
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मलेशिया में नीपाह वायरस सुअर से इंसानों मे पहुंचा है।
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चीन में कोरोना वायरस चमगादड़ से पैंगोलीन व पैंगोलीन से इंसानों में आया है। (विज्ञान पत्रिका नेचर में छपी में प्रकाशित हालिया शोध रिपोर्ट)
142 वायरस दशकों से जानवरों से मनुष्यों में फैल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की खतरे वाली प्रजातियों की रेड लिस्ट के मुताबिक 70 फीसदी वायरस घरों व खेतों में रहने से चूहे, गिलहरी, चमगादड़ समेत ज्यादातर स्तनधारी एक साथ फैलाते हैं। गाय, भेड़, कुत्ते और बकरियों जैसे पालतू जानवर वन्य जीवों व मनुष्यों के बीच वायरस के संचार सेतु का काम करते हैं।