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लोकसभा में किसानों की आत्महत्या पर जबरदस्त हंगामा
amarujala.com- presented by: अभिषेक तिवारी
Updated Thu, 30 Mar 2017 11:17 PM IST
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लोकसभा में बृहस्पतिवार को किसानों की आत्महत्या के मामले में जबर्दस्त हंगामा हुआ। कांग्रेस ने सरकार पर किसानों से वादाखिलाफी करने और मोदी सरकार के कार्यकाल में किसान आत्महत्या के मामले बढ़ने का दावा किया। इसके उलट कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने मोदी सरकार के तीन साल के कार्यकाल के दौरान आत्महत्या के मामलों में कमी आने का दावा किया।
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सिंह ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार पर कृषि क्षेत्र और किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि जिस साल मनमोहन सरकार ने 71000 करोड़ की कृषि ऋण माफी की घोषणा की थी, उसी साल आत्महत्या से जुड़ी घटनाओं में दो फीसदी का इजाफा हुआ। शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मोदी सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने के बदले जुमलेबाजी कर रही है।
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उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में 71000 करोड़ के ऋण माफ करने के अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य में जबर्दस्त बढ़ोत्तरी की गई। उन्होंने किसानों के लिए ऋण माफी योजना लाए जाने की मांग की और कहा कि 2022 तक किसानों की आय में दोगुना बढ़ोत्तरी करने का दावा करने वाली मोदी सरकार के कार्यकाल में बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने बीते तीन हफ्ते से जंतर मंतर पर डेरा डाले तमिलनाडु के किसानों की दुरूह स्थिति का जिक्र किया। इसके जवाब में कृषि मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने अपने तीन साल के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र के लिए कई अहम फैसले किए हैं।
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उन्होंने कहा कि यूपीए कार्यकाल के दौरान आपदा राहत कोष में के लिए पांच वर्षों के लिए 24000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की थी, जबकि मोदी सरकार ने इस रकम को बढ़ाकर 47000 करोड़ रुपये कर दिया। कृषि मंत्री ने आत्महत्या की घटनाओं में कमी आने का दावा करते हुए कहा कि यूपीए सरकार ने जिस साल ऋण माफी की घोषणा की थी उस साल आत्महत्या मामले में करीब दो फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 में आत्महत्या करने वालों में करीब 14 फीसदी किसान और मजदूर थे। अब यह आंकड़ा 9.4 फीसदी है।