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एसएससीजीडी 2018: 15 माह के संघर्ष के बाद भी नहीं मिली 'सीएपीएफ' की वर्दी, अब एंबुलेंस आती है, अभ्यर्थियों को अस्पताल ले जाती है...

Mon, 11 Apr 2022 08:16 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 11 Apr 2022 08:16 PM IST
सार

युवा हल्लाबोल और 'कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन' जैसे कई संगठनों ने इनकी मांग का समर्थन किया है। इन संगठनों का कहना है कि एसएससीजीडी के ये अभ्यर्थी मेडिकल पास हैं। सीएपीएफ में पर्याप्त रिक्तियां हैं, इसलिए इन्हें अविलंब नियुक्ति पत्र दिया जाए। 

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ssc gd 2018 medical pass candidate are protesting since last 15 months
सीएपीएफ - फोटो : पीटीआई

विस्तार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' में भर्ती होने का ऐसा जुनून कम ही देखने को मिलता है। करीब 15 माह से एसएससीजीडी 2018 के मेडिकल पास अभ्यर्थी सड़क पर हैं। कभी दिल्ली के जंतर मंतर पर बैठते हैं तो कभी नागपुर। आजकल ये अभ्यर्थी नागपुर में आमरण अनशन कर रहे हैं। इन्हें उम्मीद है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, इनकी बात सुनेंगे और नियुक्ति पत्र दिलाने में मदद करेंगे। आमरण अनशन को शुरु हुए एक माह से अधिक का समय बीत गया है। अब हालात ऐसे हैं कि एंबुलेंस आती है और आमरण अनशन करने वाले अभ्यर्थियों को अस्पताल ले जाती है। कई अभ्यर्थी गम्भीर हालत में पहुँच चुके हैं।

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सोमवार को इन अभ्यर्थियों ने ट्वीटर पर अपनी मांग को लेकर एक बड़ा अभियान चलाया है। युवा हल्लाबोल और 'कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन' जैसे कई संगठनों ने इनकी मांग का समर्थन किया है। इन संगठनों का कहना है कि एसएससीजीडी के ये अभ्यर्थी मेडिकल पास हैं। सीएपीएफ में पर्याप्त रिक्तियां हैं, इसलिए इन्हें अविलंब नियुक्ति पत्र दिया जाए। 
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पैरामिलिट्री एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह कहते हैं, इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिलाने के लिए केंद्रीय मंत्रियों, राज्यपालों, केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री और देश के राष्ट्रपति तक गुहार लगाई गई है। आश्वासन तो सभी से मिलता है, मगर बात आगे नहीं बढ़ पाती। एसएससीजीडी 2018 के अभ्यर्थी प्रदीप पटेल का कहना है, ये देश में पहला आंदोलन है, जिसमें केवल युवाओं की भागेदारी है। इन युवाओं ने 2018 में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में भर्ती होने के लिए एसएससीजीडी का फार्म भरा था। उस वक्त कहा गया था कि विभिन्न केंद्रीय बलों में करीब 62 हजार पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। साल 2021 के शुरु में, यानी चौथे वर्ष में जब इस भर्ती का रिजल्ट आया तो उसमें लगभग 55 हजार युवाओं का चयन किया गया। 
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प्रदीप पटेल का कहना है कि चार वर्ष में जब एक भर्ती का रिजल्ट जारी होता है तो अधिकांश युवाओं के पास दूसरा चांस नहीं बचता। वजह, वे ओवरएज हो जाते हैं। अगर एक साल में भर्ती प्रक्रिया पूरी हो तो युवाओं के पास दूसरा और तीसरा चांस भी बचता है। यहां तो भर्ती का रिजल्ट ही चार साल में आया है। राजकुमार और भवेश के अनुसार, करीब 55 हजार अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने भर्ती के सारे मापदंड पूरे किए हैं। शारीरिक परीक्षा पास करने के बाद ये अभ्यर्थी, मेडिकल परीक्षण में भी पास हो गए। चूंकि इनके पास अब दूसरा चांस भी नहीं है, इसलिए इन्हें नियुक्ति पत्र दिया जाए। अभ्यर्थियों को भरोसा था कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी इनकी बात सुनेंगे। नागपुर में एक माह से अधिक समय तक इन अभ्यर्थियों ने कभी अंगूर बेचे हैं तो कभी चाय। उसके बाद भी जब इनकी बात नहीं सुनी गई तो वे आमरण अनशन पर बैठ गए। सड़क पर बैठे इन अभ्यर्थियों ने बहुत तकलीफ उठाई हैं। अब हालत ऐसी है कि अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ने के कारण इन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ रहा है। इतना कुछ होने पर सरकार ने कदम आगे नहीं बढ़ाया। 


युवा हल्लाबोल के राष्ट्रीय संयोजक अनुपम कहते हैं, केंद्र सरकार को देश के युवाओं से कोई मतलब ही नहीं रह गया है। इन युवाओं ने अगर सीएपीएफ में भर्ती होने का सपना देखा है तो क्या गुनाह कर दिया। ये हर तरह से सक्षम हैं, इन्हें नियुक्ति पत्र दिया जाए। इन अभ्यर्थियों के आंदोलन को समर्थन दे रहे युवा हल्लाबोल के वरिष्ठ पदाधिकारी रजत यादव और गोविंद मिश्रा का कहना है, ये अभ्यर्थी अपने मां बाप का सहारा बनना चाहते हैं, देश के बॉर्डर और आंतरिक सुरक्षा में अपना योगदान देना चाहते हैं तो क्या गलत है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री द्वारा संसद में बताया जाता है कि सीएपीएफ में एक लाख से अधिक पद खाली हैं। ये सभी मेडिकल पास अभ्यर्थी हैं, इन्हें नियुक्ति देकर उन पदों को भरा जा सकता है। चिलचिलाती धूप और तेज गर्मी में भूख प्यास से व्याकुल इन अभ्यर्थियों को जानबूझकर सड़क पर आंदोलन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सरकार को बिना किसी देरी के इन सक्षम अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दे देना चाहिए।

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