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जीसैट-6ए के सफल प्रक्षेपण के बाद अंतरिक्ष एजेंसी नहीं जारी कर रही थी बयान
एजेंसी, बंगलूरू
Updated Mon, 02 Apr 2018 05:23 PM IST
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इसरो
- फोटो : SELF
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आंध्र प्रदेश स्थित श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से बृहस्पतिवार को जीएसएलवी-एफ 08 रॉकेट से जीसैट-6ए लांच हुआ, जिसके बाद इसरो ने मिशन की सफलता को लेकर बयान जारी किया। पर फिर इसरो ने 240 किलोग्राम वजन वाले इस सैटेलाइट लेकर कोई बयान या सूचना जारी नहीं की, जिससे संदेह होने लगा था। जबकि सामान्य रूप से इसरो लांचिंग के बाद सैटेलाइट के बारे में जानकारी देते रहता है।
इसरो ने रविवार को संपर्क टूटने की सूचना तो दी पर यह नहीं बताया कि इसका कारण क्या है। ज्ञात हो कि इसरो के नए चेयरमैन के सिवन के नेतृत्व में यह पहला अंतरिक्ष मिशन है, लेकिन इस पर नाकामयाबी के बादल मंडराने लगे हैं।
पिछले साल अगस्त में भी हुआ था मिशन नाकाम
पिछले साल अगस्त में इसरो ने बैकअप नेविगेशन सेटेलाइट आईआरएनएसएस-1एच लांच किया था, लेकिन तकनीकी नाकामयाबी से मिशन फेल हो गया। लांच के चौथे चरण में सैटेलाइट की हीट शील्ड ही नहीं खुली जिससे सैटेलाइट रॉकेट के चौथे हिस्से में ही फंसा रहा गया था।
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270 करोड़ के उपकरण लगे हैं सैटेलाइट में
जीसैट-6ए में 270 करोड़ की लागत आई है। यह हाई पावर एस बैंड संचार उपग्रह अपनी श्रेणी का दूसरा उपग्रह है। इससे पहले जीसैट-6 लांच हुआ था। नए सैटेलाइट के पैनल, उपकरण और छह मीटर का एंटीना पूरे दुनिया में कहीं भी सैटेलाइट कॉल आसान बना देगा। खासकर सेना को दूरस्थ स्थानों पर कॉलिंग में सुविधा होगी। इससे दूर दराज के इलाके में मौजूद सैन्य टुकड़ियों के बीच संचार बेहतर होगा।
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इसरो ने रविवार को संपर्क टूटने की सूचना तो दी पर यह नहीं बताया कि इसका कारण क्या है। ज्ञात हो कि इसरो के नए चेयरमैन के सिवन के नेतृत्व में यह पहला अंतरिक्ष मिशन है, लेकिन इस पर नाकामयाबी के बादल मंडराने लगे हैं।
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पिछले साल अगस्त में भी हुआ था मिशन नाकाम
पिछले साल अगस्त में इसरो ने बैकअप नेविगेशन सेटेलाइट आईआरएनएसएस-1एच लांच किया था, लेकिन तकनीकी नाकामयाबी से मिशन फेल हो गया। लांच के चौथे चरण में सैटेलाइट की हीट शील्ड ही नहीं खुली जिससे सैटेलाइट रॉकेट के चौथे हिस्से में ही फंसा रहा गया था।
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270 करोड़ के उपकरण लगे हैं सैटेलाइट में
जीसैट-6ए में 270 करोड़ की लागत आई है। यह हाई पावर एस बैंड संचार उपग्रह अपनी श्रेणी का दूसरा उपग्रह है। इससे पहले जीसैट-6 लांच हुआ था। नए सैटेलाइट के पैनल, उपकरण और छह मीटर का एंटीना पूरे दुनिया में कहीं भी सैटेलाइट कॉल आसान बना देगा। खासकर सेना को दूरस्थ स्थानों पर कॉलिंग में सुविधा होगी। इससे दूर दराज के इलाके में मौजूद सैन्य टुकड़ियों के बीच संचार बेहतर होगा।