राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी पार्टियों ने कसी कमर, सोनिया गांधी ने कई नेताओं से बात की
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए इन दिनों विपक्ष को एक सूत्र में पिरोने का काम कर रहे हैं। इस सिलसिले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की सोनिया से जल्द मुलाकात होनी है।
वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सपा नेता मुलायम सिंह यादव और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से टेलीफोन पर बात की है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो विपक्ष मई के अंत तक अपना संभावित उम्मीदवार घोषित कर सकता है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला का कहना है कि प्रजातंत्र की परिपाटी और इस देश के सिद्धांतों, मूलभूत नीतियों की सुरक्षा की जानी चाहिए। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का पद राजनैतिक वाद विवाद से हटकर है लेकिन क्या एक विचारधारा देश पर थोपी जा सकती है। कोई संस्था संवैधानिक मूल्यों का हनन न कर पाए।
उनका कहना है कि विपक्ष में एक आमराय और आम सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। ऐसा किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के हित को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि राष्ट्रहित में किया जा रहा है।
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को लेकर एनडीए में अभी कोई खास हलचल नहीं है। बावजूद विपक्षी पार्टियां जीत के लिए पर्याप्त अंकों की परवाह किए बगैर सक्रिय हैं।
विपक्षी दलों में पहले दौर की बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है और लगभग सभी विपक्षी पार्टियां एकजुट दिख रही हैं। संयुक्त बैठक को लेकर को अभी कोई तारीख तो तय नहीं है लेकिन जल्द ही सभी दल एक साथ मिल सकते हैं।
कई नेताओं की सोनिया से हो चुकी है मुलाकात
राकंपा नेता शरद पवार, बिहार के सीएम नीतीश कुमार, जदयू नेता शरद यादव, और सीपीआई नेता डी. राजा पहले ही सोनिया गांधी से मुलाकात कर चुके हैं। राहुल गांधी की सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, शरद पवार और सीताराम येचुरी से बात हुई है। लोकसभा चुनाव जीतने के बाद नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूख अब्दुल्ला बुधवार को सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे। फारूख अब्दुला के साथ भी उनकी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर चर्चा हुई। आईयूएमएल नेता कुन्याली कुट्टी भी इस संबंध में सोनिया गांधी से मिले हैं।
कांग्रेस के मुताबिक अभी एनडीए से संबंधित दलों के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है ये निर्णय उन्हें लेना है। वहीं कांग्रेस विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आम सहमति बनने की उम्मीद भी छोड़ चुकी है। कांग्रेेस को लगता है कि जिस तरह अटल बिहारी वाजपेयी और मोरारजी देसाई के कार्यकाल में विपक्ष को साथ लेकर फैसला हुआ वर्तमान सरकार में ऐसा नजर नहीं आ रहा है।
कांग्रेस के एक नेता का कहना है कि जब सरकार में शामिल मंत्रियों, वरिष्ठ नेताओं और एनडीए की सहयोगियों की राय नहीं ली जा रही है ऐसे में विपक्ष खुले दिमाग से आम सहमति से राष्ट्रहित में कोई फैसला लेगा।