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अगर दफ्तर में सोना है तो सोएं, लेकिन जरा नजाकत से

Sun, 22 Jan 2017 04:18 PM IST
लॉरेन्स नाइट/बीबीसी
लॉरेन्स नाइट/बीबीसी Updated Sun, 22 Jan 2017 04:18 PM IST
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Sleep at office but with style
Sleeping at office

दफ्तर में अपना बिस्तर हो और उस पर आप बेधड़क सो सकें, इसके लिए बड़ा साहसी या कहें दुस्साहसी होना जरूरी है। 1990 के दशक में भीम सुवास्तोयो समाचार एजेंसी एएफपी के लिए इंडोनेशिया में जकार्ता ब्यूरो में काम करते थे। और वो दफ्तर में अपनी मेज के पीछे एक अलमारी के नीचे सोने के लिए बदनाम थे।

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बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के बिजनेस डेली कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ''जब भी कोई हांगकांग से जकार्ता के दफ्तर आता तो यही कहता कि अपना बिस्तर दिखाओ। मेरी ऐसी छवि थी!'' भीम बताते हैं कि 1997 में जब एशिया में नकदी संकट अपने चरम पर था तब इंडोनेशिया के रुपए की कीमत आधी रह गई थी और सुहार्तो सरकार गिर गई थी। ये वो समय था जब दफ्तर में भीम का बिस्तर सबसे ज्यादा काम आता था।
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वो हर समय ब्रेकिंग न्यूज कवर करने में व्यस्त रहते थे। उस समय इंडोनेशिया में मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी सीमित था। इसलिए अपने दफ्तर में लगातार बजने वाले फोन कॉल्स के बीच वो नींद पूरी कर लेते थे। लेकिन इस दौर के खत्म होने के बाद भी उन्हें लगा कि दफ्तर में आधे घंटे की झपकी बड़े काम की होती है। वो कहते हैं कि इससे दिनभर के लिए ज्यादा ऊर्जा मिलती है। ये सुबह की तरह ही दिन की शुरुआत करने जैसा है। भीम अकेले नहीं है। दक्षिण यूरोप में दोपहर की झपकी को 'सिएस्टा' कहा जाता है जिसके लिए सरकारी अनुमति होती है। चीन में भी कुछ-कुछ यही कहानी है।

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बैठक में ऊंघना मेहनती होने की निशानी

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Yawning

जापान में बैठक में ऊंघने को आपके मेहनती होने की निशानी मानी जाती है। कहा जाता है कि कई दफ्तरों में बॉस ऊंघने का नाटक करते हैं ताकि वो अपने सहयोगियों की बातें सुन सकें और कई कर्मचारी अपने बॉस का मजाक बनाने के लिए ऐसे वक्त में फर्जी बातें भी करते हैं।

हमारा शरीर एक दैनिक क्रम यानी बॉडी क्लॉक के मुताबिक काम करता हैं। हमारे हॉरमोन्स हमारे बॉडी क्लॉक को चलाते हैं।नींद के पीछे जिस हॉर्मोन का हाथ है वो मेलाटॉनिन है। जब मेलाटॉनिन का स्तर बढ़ता है तो आपको नींद आती है। लेकिन जब सूरज की रोशनी आप पर पड़ती है तो मेलाटॉनिन का स्तर गिरता है और नींद गायब होने लगती है।

अमेरिका की नेशनल स्लीप फाउंडेशन की नैटेली दाउतोविच कहती हैं कि नींद दिमाग की सफाई करती है, मेटाबॉलिक वेस्ट और टॉक्सिन्स को मस्तिष्क से बाहर करना नींद का काम है। यही वजह है कि हम सभी को हर रात सात से नौ घंटे नियमित रूप से सोना चाहिए। लेकिन क्या हम हर रात सात से नौ घंटे की नींद नहीं लेते हैं?

नींद न आने का कारण मोबाइल भी

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Women sleeping

दूसरे शब्दों में दफ्तर में तो आपके सिवा हर कोई समझ सकेगा कि आप थके हुए हैं। मोबाइल फोन भी नींद की राह में रोड़ा बन गए हैं। दाउतोविच कहती हैं, ''मैं ट्विटर फीड पढ़ने के चक्कर में शाम को एक या दो घंटे बिस्तर में बैठे बैठे बर्बाद करती हूं।''

वो कहती हैं कि ये वाकई एक बुरी लत है। फोन की नीली रोशनी एक औसत बल्ब के मुकाबले ज्यादा नीली होती है और मोबाइल फोन की 'डेलाइट' से मेलाटॉनिन स्तर घट जाता है जिससे आप जागते रह जाते हैं।

हमारा दिमाग मोबाइल फोन को हमारे बेडरूम से जोड़ता है, जिसके पीछे-पीछे दफ्तर और सामाजिक जीवन की बातें भी बेडरूम में प्रवेश करने लगती हैं। जिससे स्ट्रेस के लिए जिम्मेदार हॉर्मोन कॉर्टिसॉल भी ऐसी बायोकेमिकल स्थिति पैदा करते हैं जो नींद की दुश्मन बन जाती हैं।

तो काम पर सोने के लिए क्या करें?

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sleeping

खुद को अनुशासित करना एक उपाय है जैसे सोने के समय पर ख़ुद को फोन से दूर रखना। अपने बॉस की इजाजत ले लें।कोई शांत और अलग-थलग जगहढूंढें ( पार्क की बेंच पर सोएंगे तो पुलिस आपको जगा सकती है।) 10 मिनट की झपकी लेने से आप गहरी नींद के बाद होने वाले उनींदेपन से बच सकते हैं।

सोने के बाद 10 मिनट अपने आपको तरोताजा महसूस करने के लिए भी दें। अगर ये समय आपके लिए कम है तो आप अपने लिए 90 मिनट का समय निकाल सकते हैं। लेकिन क्या रात की अच्छी नींद ही आपको दफ्तर में तरोताजा दिमाग के साथ काम करने में आगे रखने के लिए काफी है।

ये समझने के लिए मैं एक दफ्तर में गई जहां सचेत रहना जिंदगी और मौत का सवाल है। ये दफ्तर था ब्रिटेन का नेशनल एयर ट्राफिक कंट्रोल सर्विस, नैट्स का। यहां इसी सवाल के जवाब के लिए पूरा एक विभाग है। नैट्स से जुड़े नील मे कहते हैं, "हम इस बात को बहुत साफ-साफ समझते हैं कि एक कंट्रोलर के सामने तब भी हादसा हो सकता है जब रूट बहुत व्यस्त हो या एकदम शांत।" 

नींद को लेकर काफी सक्रियता के साथ काम करता है नैट्स

नैट्स में विमानों को कंट्रोल करने वाले कर्मचारियों को अपने इस काम से होने वाली बोरियत या फिर ओवरलोड के बीच सर्वोत्कृट मानसिक संतुलन बनाया जाता है। स्वैनविक में नैट्स के कंट्रोल रूम में नील से मेरी मुलाकात हुई थी।

गुफा जैसी ये जगह एयरपोर्ट पर बने एयरक्राफ्ट हैंगर की याद दिलाती थी, हैंगर में विमान रखे जाते हैं। दरअसल कर्मचारियों का ध्यान कम से कम बंटे इसलिए ये जगह ऐसी बनाई जाती है। दिन जैसी नकली रोशनी 24 घंटे जलती है और जो शोरगुल आप सुन सकते हैं वो कई सौ कंट्रोलरों की विमान के पायलट से हो रही बातचीत होती है। ये कंट्रोलर हेडसेट पहने हुए दक्षिणी इंग्लैंड के आसमान में
उड़ रहे विमानों के चालकों से संपर्क में रहते हैं।

पूरा स्टाफ दो लोगों की टीम में काम करता है, इसका मकसद एक दूसरे के काम की निगरानी के अलावा आपसी बातचीत है जो उनके दिमाग को सक्रिय बनाए रखती है। नील बताते हैं कि उन लोगों को हर दो घंटों पर तीस मिनट का ब्रेक लेना होता है जिस दौरान वो जिम्मेदारी से मुक्त होते हैं।

इस ब्रेक में ये लोग या तो सो लेते हैं या फिर कैफे में जा सकते हैं। नैट्स नींद को लेकर काफी सक्रियता के साथ काम करता है। स्वैनविक में रात की ड्यूटी करने वालों के लिए एक कमरा खास तौर पर है जहां दफ्तर आने के बाद वो दो घंटे सो सकते हैं। नील ने कहा, " हम चाहते हैं कि वो सुबह पांच से छह के बीच सबसे ज्यादा सजग रहें जब हीथ्रो में विमान उतरने लगते हैं। " डॉ. दाउतोविच इस रवैये की तारीफ करती हैं। वो कहती हैं कि हम अब भी नींद को बेहतर नतीजों के लिए सेहत की अच्छी आदत के बजाय आराम-विलास की चीज मानते हैं। यानी दफ्तर में सो जाने को अनुशासनहीनता नहीं समझा जाना चाहिए?

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