फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Sita's birth place relates to faith: Dr. Mahesh Sharma

दिग्विजय बोलेः कहां हैं भगवान राम-सीता विवाह के प्रमाण, मंत्री का जवाब यह आस्था का विषय

Thu, 13 Apr 2017 10:41 AM IST
amarujala.com- Presented by: हर्षित गौतम
amarujala.com- Presented by: हर्षित गौतम Updated Thu, 13 Apr 2017 10:41 AM IST
विज्ञापन
Sita's birth place relates to faith: Dr. Mahesh Sharma
- फोटो : अमर उजाला

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री डा. महेश शर्मा को बुधवार को राज्यसभा में विपक्ष की आलोचना झेलनी पड़ी जब उन्होंने कहा कि सीता के जन्मस्थान का मसला आस्था से जुड़ा हुआ है जबकि विपक्ष ने कहा कि इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। हालांकि केंद्रीय मंत्री ने अपने लिखित जवाब के बचाव में कहा कि सीता के जन्मस्थान को लेकर कोई प्रश्नचिह्न नहीं है और वाल्मीकि रामायण में इसका जिक्र किया गया है।

विज्ञापन


प्रश्नकाल के दौरान भाजपा सदस्य प्रभात झा ने बिहार के सीतामढ़ी क्षेत्र के विकास का विवरण चाहा जिसे वह विवादित जन्मभूमि नहीं मानते। जवाब में शर्मा ने कहा कि सरकार ने रामायण सर्किट विकसित करने की योजना बनाई है जिसमें सीतामढ़ी क्षेत्र भी शामिल है। हालांकि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह विरोध में तुरंत उठ खड़े हुए और सीता के जन्मस्थान को आस्था से जुड़ा मुद्दा बताने वाले बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसा कहने से साबित होता है कि प्रत्यक्ष प्रमाण पर कोई जवाब नहीं दिया गया है।
विज्ञापन


डा. महेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह सच है कि वहां पुरातत्व विभाग ने कोई खुदाई नहीं की है लेकिन उनके जन्मस्थान को लेकर कोई प्रश्नचिह्न नहीं है। उन्होंने अपने जवाब में कहा कि मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर राज्य सरकार डीपीआर भेजेगी तो मंत्रालय मंजूरी देगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


दरअसल भाजपा सांसद प्रभात झा ने सीतामढ़ी स्थित सीताजी के जन्मस्थान के जीर्णोद्धार और उस इलाके को धार्मिक पर्यटन से जोड़ने का मामला राज्यसभा में उठाया था। उन्होंने कहा कि इस स्थान को लेकर कोई विवाद भी नहीं है। मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि मंदिर परिसर और विकास कार्य में शिथिलता पर वे बिहार सरकार से बात करेंगे।

विपक्ष ने प्रमाणिकता पर उठाई आपत्ति

Sita's birth place relates to faith: Dr. Mahesh Sharma

इसी बीच दिग्विजय सिंह पूर्व में भेजे गए लिखित उत्तर में प्रमाणिकता शब्द को लेकर आपत्ति उठाई। उन्होंने कहा कि हमारे आराध्य राम की पत्नी सीता को लेकर जो बात लिखित उत्तर में कही गई उसके ठीक विपरीत बात सदन में कही जा रही है, मैं इसकी निंदा करता हूं। एक तरफ रामसेतु को लेकर सरकार गंभीर है, दूसरी ओर सीता को लेकर प्रमाण न होने की बात कहती है। क्या भगवान राम और सीता के स्वयंवर के प्रमाण हैं।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि आपने लिखित उत्तर को पूरी तरह नहीं पढ़ा। जिस समय दिग्विजय सिंह और मंत्री के बीच नोकझोंक हो रही थी, सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुंच गए। मंत्री ने कहा कि आपने हमारा उत्तर संपूर्णता के साथ नहीं पढ़ा है।

मंत्री ने बताया कि 20वीं सदी में वाल्मीकि रामायण में जन्मस्थली का जिक्र है इसलिए कोई प्रशभनचिह्न नहीं है। इसी बीच जदयू सांसद अनिल कुमार साहनी ने भी प्रभात झा का समर्थन किया और ऐतिहासिक मंदिर और उपेक्षित मिथिलांचल के विकास की बात कही। उन्होंने कहा कि सीता जी का अस्तित्व नहीं है तो राम का भी नहीं है। सीता जी का अपमान हुआ है उस इलाके का विकास क्यों नहीं करते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed