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..अगर रगों में शुद्ध हिंदू खून है तो भारत रत्न के लिए सावरकर के नाम का एलान करे एनडीए सरकार

Sun, 13 May 2018 10:03 PM IST
एजेंसी, मुंबई
एजेंसी, मुंबई Updated Sun, 13 May 2018 10:03 PM IST
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Shivsena MP sanjay raut attack on NDA Government
संजय राउत
शिवसेना के सांसद संजय राउत ने भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर उनकी रगों में शुद्ध हिंदू खून बह रहा है तो भारत रत्न सम्मान के लिए सावरकर के नाम का एलान करें। अगर ऐसा नहीं कर सकते तो घोषणा करें कि हिंदुत्व सिर्फ उनकी राजनीति में ही है। शिवसेना के मुखपत्र सामना के आलेख ‘उत्सव’ में  उन्होंने लिखा कि सरकार ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक दीनदयाल उपाध्याय के चित्र दफ्तरों और सरकारी भवनों में लगवा दिए लेकिन सावरकर को कोई महत्व नहीं दिया। एएमयू के एक हाल से जिन्ना की तस्वीर हटाने के बाद कुछ मुसलिम संगठन अब दफ्तरों से सावरकर की फोटो हटाने की मांग उठा रहे हैं। 
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जिन्ना की तस्वीर हटाने का मुद्दा 2019 लोकसभा चुनाव से पहले समाज में फूट डालने का षड्यंत्र है। जिन्ना मामले के बाद सावरकर की तस्वीर हटाने की मांग से सावरकर की श्रेष्ठता और महत्व साबित होता है। अब सवाल सावरकर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिए जाने का है।
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उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में मिथ्या धर्मनिर्पेक्षता का प्रचार किया जाता था। उम्मीद की जाती है कि उसी तरह अब मिथ्या हिंदुत्व का प्रचार नहीं किया जाएगा। हर बार चुनाव से पहले पाकिस्तान, जिन्ना और सावरकर का मुद्दा उठाया जाता रहा है। यह एक रहस्य है। लगता है मणिशंकर अय्यर जैसे लोग इस तरह की साजिश में शामिल हैं। इसे रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सावरकर जिन्ना की तरह एक वकील थे लेकिन उन्होंने देश के लिए अपनी शिक्षा कुर्बान कर दी। 
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अन्य राजनेताओं की तरह वे अंडमान की जेल में रखे गए और कोई तवज्जो नहीं दी गई। उन्होंने जाति व्यवस्था की मुखाल्फत की। उनका मानना था कि हिंदुत्व का मतलब धर्म में अंधी आस्था नहीं है। हिंदुत्व के प्रति उनकी आस्था गहरी थी लेकिन उन्हें हिंदुत्व की आड़ में धोखा नहीं दिया जा सकता था। इसी लिए उन्होंने गौरक्षा अभियान को नकार दिया। जब सामान्य कवियों और लेखकों को नागरिक सम्मान दिया जा सकता है तो सावरकर को कम से कम पद्मभूषण सम्मान तो दिया ही जाना चाहिए।
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