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शत्रुघ्न सिन्हा बोले, आडवाणी का साथ दिया इसलिए मुझे मंत्री नहीं बनाया गया
Tue, 15 Jan 2019 09:51 PM IST
अमित मंडल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Tue, 15 Jan 2019 09:51 PM IST
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shatrughan sinha
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भाजपा के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने एक बार फिर भाजपा हाईकमान को निशाने पर लिया। एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में खुलकर अपनी बात लोगों के सामने रखी। इस दौरान उन्होंने नाम लिए बिना पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर तंज कसे। इस दौरान उन्होंने कहा कि मुझे इसलिए मंत्री नहीं बनाया गया क्योंकि मैंने लालकृष्ण आडवाणी का साथ दिया। क्या-क्या कहा शत्रुघ्न ने पढ़ें-
-आज भाजपा में व्यक्तिवाद देख रहा हूं।
-पीएम से वक्त मांगा तो अमित शाह का वक्त दे दिया।
-आडवाणी का साथ दिया इसलिए मंत्री नहीं बनाया। एक टीवी एक्ट्रेस को सीधे मंत्री बना दिया।
-क्या मुझ पर भ्रष्टाचार का आरोप था। पटना में एम्स के लिए मैंने कितना प्रयास किया। अटल जी से गुजारिश की।
-मैं भाजपा में घुट घुट कर नहीं जी रहा हूं।
-अगर सच कहना बगावत है तो मैं बागी हूं।
-अगर चाय बेचना वाला कहां से कहां पहुंच सकता है तो मैं क्यों नहीं। मैंने उन्हें कभी उन्हें एम्ब्रेस करने की कोशिश नहीं की।
-राहुल में जबरदस्त परिपक्वता आई है। साल भर में ईवीएम के बावजूद 3 राज्यों में चुनाव जीत गई।
-अच्छे दिन नहीं आए, आज शुभ दिन आ गया।
-इस पार्टी से मेरा लगाव रहा है, जबसे इसकी दो सीटें थीं। जितनी भी प्रताड़ना देने की कोशिश की मैं सहता रहा। पटना के कार्यक्रम में ही नहीं बुलाया जाता है।
-अभी भाजपा में टेक्नीकली और इमोशनली भी हूं। पार्टी में मुझे मंच ही नहीं मिल रहा।
-तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव और माया-अखिलेश के गठजोड़ के बाद जो हुआ है उससे उनमें (अमित शाह) बात करने का होशो हवास ही नहीं होगा।
-चौकीदार चोर है के सवाल पर- मैं सियासी नारों के साथ कभी नहीं रहता। आजकल शब्दों की गरिमा भी कम हो चुकी है। कोई 55 करोड़ की गर्लफ्रेंड भी कह देता है। अगर कोई नारा बन भी जाए तो उसका फैसला तो जनता करती है।
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-स्थिति कुछ भी हो चुनाव पटना साहिब से ही लडूंगा।
-आडवाणी को महत्व न दिए जाने के मुद्दे पर कहा- मुझे बहुत तकलीफ होती है। उस आदमी ने अपने बलिदान, परिश्रम से पार्टी को सींचा, अटल जी के साथ पार्टी को 2 सीटों से 200 सीटों तक लेकर आए, वही आडवाणी जी आज कहां हैं। उन्हें राष्ट्रपति पद का ऑफर ही दे दिया होता, वह ना बोल देते, सम्मान तो देना चाहिए था।
-वह (मोदी) एनर्जी किंग हैं, कार्य करने की क्षमता है, जबरदस्त दमखम है। तलवार पुरानी है लेकिन काट वही है।
-पार्टी में अब वन मैन शो चलता है, टू मैन आर्मी है। मंत्री की सुनता कौन है। अधिकतर मानते नहीं हैं, पहचानते नहीं हैं। सारा काम पीएमओ से हो रहा है।
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-आज भाजपा में व्यक्तिवाद देख रहा हूं।
-पीएम से वक्त मांगा तो अमित शाह का वक्त दे दिया।
-आडवाणी का साथ दिया इसलिए मंत्री नहीं बनाया। एक टीवी एक्ट्रेस को सीधे मंत्री बना दिया।
-क्या मुझ पर भ्रष्टाचार का आरोप था। पटना में एम्स के लिए मैंने कितना प्रयास किया। अटल जी से गुजारिश की।
-मैं भाजपा में घुट घुट कर नहीं जी रहा हूं।
-अगर सच कहना बगावत है तो मैं बागी हूं।
-अगर चाय बेचना वाला कहां से कहां पहुंच सकता है तो मैं क्यों नहीं। मैंने उन्हें कभी उन्हें एम्ब्रेस करने की कोशिश नहीं की।
-राहुल में जबरदस्त परिपक्वता आई है। साल भर में ईवीएम के बावजूद 3 राज्यों में चुनाव जीत गई।
-अच्छे दिन नहीं आए, आज शुभ दिन आ गया।
-इस पार्टी से मेरा लगाव रहा है, जबसे इसकी दो सीटें थीं। जितनी भी प्रताड़ना देने की कोशिश की मैं सहता रहा। पटना के कार्यक्रम में ही नहीं बुलाया जाता है।
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-अभी भाजपा में टेक्नीकली और इमोशनली भी हूं। पार्टी में मुझे मंच ही नहीं मिल रहा।
-तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव और माया-अखिलेश के गठजोड़ के बाद जो हुआ है उससे उनमें (अमित शाह) बात करने का होशो हवास ही नहीं होगा।
-चौकीदार चोर है के सवाल पर- मैं सियासी नारों के साथ कभी नहीं रहता। आजकल शब्दों की गरिमा भी कम हो चुकी है। कोई 55 करोड़ की गर्लफ्रेंड भी कह देता है। अगर कोई नारा बन भी जाए तो उसका फैसला तो जनता करती है।
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-स्थिति कुछ भी हो चुनाव पटना साहिब से ही लडूंगा।
-आडवाणी को महत्व न दिए जाने के मुद्दे पर कहा- मुझे बहुत तकलीफ होती है। उस आदमी ने अपने बलिदान, परिश्रम से पार्टी को सींचा, अटल जी के साथ पार्टी को 2 सीटों से 200 सीटों तक लेकर आए, वही आडवाणी जी आज कहां हैं। उन्हें राष्ट्रपति पद का ऑफर ही दे दिया होता, वह ना बोल देते, सम्मान तो देना चाहिए था।
-वह (मोदी) एनर्जी किंग हैं, कार्य करने की क्षमता है, जबरदस्त दमखम है। तलवार पुरानी है लेकिन काट वही है।
-पार्टी में अब वन मैन शो चलता है, टू मैन आर्मी है। मंत्री की सुनता कौन है। अधिकतर मानते नहीं हैं, पहचानते नहीं हैं। सारा काम पीएमओ से हो रहा है।