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शत्रुघ्न सिन्हा ने नोटबंदी पर पीएम मोदी के रायशुमारी को बताया प्रायोजित
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 25 Nov 2016 03:03 AM IST
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शत्रुघ्न सिन्हा
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नोट बंदी पर पीएम नरेंद्र मोदी की रायशुमारी पर विपक्ष ने ही नहीं अपनों ने ही सवाल खड़े कर दिए हैं। अरसे से पार्टी से नाराज चले रहे सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने न सिर्फ रायशुमारी को प्रायोजित करार दिया, बल्कि यह भी कहा कि इसे निहित स्वार्थों के लिए कराया गया। बसपा प्रमुख मायावती सहित विपक्ष के कई नेताओं ने रायशुमारी के नतीजों पर सवाल उठाए।
बसपा प्रमुख ने तो यहां तक कहा कि अगर सब कुछ इतना ही अच्छा है और देश प्रधानमंत्री के साथ है तो वह सरकार भंग कर चुनाव क्यों नहीं करा लेते। गौरतलब है कि पीएम मोदी ने मंगलवार को एक एप के जरिए लोगों से नोट बंदी पर दस सवाल पूछे थे। बुधवार रात दावा किया गया कि देश के 90 फीसदी लोग इस फैसले के समर्थन में हैं।
सर्वे का नतीजा सामने आने के बाद पहला हमला शत्रुघ्र सिन्हा की ओर से हुआ। उन्होंने ट्वीट के माध्यम से हमला बोलते हुए इसे प्रायोजित और स्वार्थवश कराया गया रायशुमारी बताया। उन्होंने कहा कि लोग मूर्खों की दुनिया में जीना बंद करें। लोगों को हो रही तकलीफों को समझें। बुरे वक्त में मां-बहनों द्वारा जमा की गई गाढ़ी कमाई को कालाधन से न जोड़ें।
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बसपा सुप्रीमो ने भी रायशुमारी को फर्जी बताया। उन्होंने कहा कि अगर देश की 90 फीसदी जनता पीएम के साथ है तो वह सरकार भंग करा कर चुनाव क्यों नहीं कराते। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आाजाद ने भी रायशुमारी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पूरा देश इस फैसले से हलकान है। ऐसे में उन्हें समझ में नहीं आता कि वे 90 फीसदी लोग कौन हें जो इसके समर्थन में हैं।
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बसपा प्रमुख ने तो यहां तक कहा कि अगर सब कुछ इतना ही अच्छा है और देश प्रधानमंत्री के साथ है तो वह सरकार भंग कर चुनाव क्यों नहीं करा लेते। गौरतलब है कि पीएम मोदी ने मंगलवार को एक एप के जरिए लोगों से नोट बंदी पर दस सवाल पूछे थे। बुधवार रात दावा किया गया कि देश के 90 फीसदी लोग इस फैसले के समर्थन में हैं।
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सर्वे का नतीजा सामने आने के बाद पहला हमला शत्रुघ्र सिन्हा की ओर से हुआ। उन्होंने ट्वीट के माध्यम से हमला बोलते हुए इसे प्रायोजित और स्वार्थवश कराया गया रायशुमारी बताया। उन्होंने कहा कि लोग मूर्खों की दुनिया में जीना बंद करें। लोगों को हो रही तकलीफों को समझें। बुरे वक्त में मां-बहनों द्वारा जमा की गई गाढ़ी कमाई को कालाधन से न जोड़ें।
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बसपा सुप्रीमो ने भी रायशुमारी को फर्जी बताया। उन्होंने कहा कि अगर देश की 90 फीसदी जनता पीएम के साथ है तो वह सरकार भंग करा कर चुनाव क्यों नहीं कराते। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आाजाद ने भी रायशुमारी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पूरा देश इस फैसले से हलकान है। ऐसे में उन्हें समझ में नहीं आता कि वे 90 फीसदी लोग कौन हें जो इसके समर्थन में हैं।