फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Shabd Samman winner Sunita Budhiraja passes away

संगीत साहित्य की एक कड़ी टूटी : शब्द सम्मान साधिका सुनीता बुद्धिराजा नहीं रहीं 

Fri, 23 Apr 2021 06:39 AM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 23 Apr 2021 06:39 AM IST
सार

  • उनकी 11 से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं
  • उनका पहला कविता संग्रह 'आधी धूप' था जिसका तेलुगू में भी अनुवाद हुआ
  • उनका दूसरा काव्य संग्रह 'अनुत्तर' भी प्रसिद्ध हुआ

विज्ञापन
Shabd Samman winner Sunita Budhiraja passes away
Sunita Budhiraja - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साहित्य की सुपरिचित हस्ताक्षर, पंडित जसराज की गायन परंपरा पर गहरी समझ रखने वाली और अमर उजाला शब्द सम्मान से सम्मानित सुनीता बुद्धिराजा नहीं रहीं। कोरोना वायरस की वजह से गुरुवार शाम उनका निधन हो गया। 

विज्ञापन


किताबों से हमेशा घिरी और जिंदगी के हर पन्ने से कुछ न कुछ सीखती रहने वाली सुनीता बुद्धिराजा की साहित्यकार मां राजा बुद्धिराजा का भी कुछ दिन पहले निधन हो गया था। 
विज्ञापन


सुनीता बुद्धिराजा अक्सर कहती थीं, वर्षों तक सुरीले व्यक्तियों को सुनते-सुनते मेरा कान भी सुरीला हो गया है। उठते-बैठते संगीत को सुनना मेरी आदत सी हो गई। शायद इसी आदत का कमाल रहा कि संगीत पर लेखन ने उनको बड़ी पहचान दिलाई। 
विज्ञापन
विज्ञापन


हालांकि एक कवि और कविता से अलग साहित्यिक लेखन में भी वह सराही जाती रहीं। उनकी 11 से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनका पहला कविता संग्रह 'आधी धूप' था जिसका तेलुगू में भी अनुवाद हुआ। उनका दूसरा काव्य संग्रह 'अनुत्तर' भी प्रसिद्ध हुआ। 

उन्हें कई सम्मान मिले, जिसमें शिरोमणि पुरस्कार, सुपर स्टार अवार्ड, पीआर पर्सन ऑफ द ईयर अवार्ड, ग्लोबल वूमन अचीवर अवार्ड के साथ अमर उजाला का शब्द सम्मान भी शामिल था। 


दिग्गज संगीतकारों पर किया विशेष काम
साल 2018 के शब्द सम्मान में कथेतर वर्ग का छाप सम्मान सुनीता बुद्धिराजा की कृति 'रसराज-पंडित जसराज' को दिया गया था। सुनीता बुद्धिराजा का जन्म 17 नवंबर 1954 को नई दिल्ली में हुआ था। उन्होंने पंडित जसराज के अलावा भारत के अन्य दिग्गज संगीतकारों में से उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पंडित किशन महाराज, डॉ. एम बालमुरली कृष्ण, पं. शिव कुमार शर्मा, पं. बिरजू महाराज और पं. हरिप्रसाद चौरसिया पर भी विशेष काम किया था। उन्हें संगीत समारोहों की एंकरिंग का भी जबरदस्त शौक था और इस विधा की स्टार मानी जाती थीं। उनके निधन से संगीत साहित्य की एक कड़ी सी टूट गई है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed