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देशभर में खेती के लिए होगी अलग बिजली लाइन
राजीव कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 09 Aug 2016 05:07 AM IST
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त्तर प्रदेश समेत देश के सभी राज्यों में अगले दो साल में किसानों को खेती के लिए अलग कनेक्शन दे दिए जाएंगे। केंद्र सरकार की तरफ से उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों के ग्रामीण इलाकों में कृषि व गैर कृषि बिजली फीडर को अलग-अलग करने की मंजूरी दे दी गई है।
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जल्द ही इस काम के लिए टेंडर जारी होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश व तमिलनाडु ऐसे राज्य हैं, जहां समस्त ग्रामीण इलाके में एक ही फीडर से बिजली की आपूर्ति की जाती है। वर्ष 2011 की जनगणना रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सिर्फ 23.77 फीसदी ग्रामीण घरों में बिजली की आपूर्ति हो रही थी।
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केंद्र सरकार ने दिसंबर, 2014 में दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) के तहत ग्रामीण इलाकों में कृषि व गैर कृषि फीडर को अलग करने के लिए 43,033 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी।
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कृषि व गैर कृषि इलाके में बिजली की आपूर्ति के लिए अलग-अलग फीडर होने से ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति की दशा सुधरेगी और बिजली की कटौती में कमी आएगी। डीडीयूजीजेवाई के तहत ग्रामीण इलाके में फीडर को अलग-अलग करने के काम की जिम्मेदारी रूरल इलेक्ट्रीफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी) को दी गई है।
आरईसी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगले दो सालों में देश के सभी किसानों को खेती के लिए अलग से बिजली देने की व्यवस्था हो जाएगी। उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाके में फीडर को अलग करने के काम के लिए जल्द ही टेंडर जारी किया जा रहा है और इसकी मंजूरी दे दी गई है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश व तमिलनाडु ऐसे राज्य है, जहां के ग्रामीण इलाके में एक ही फीडर से कृषि व गैर कृषि उपभोक्ताओं के लिए बिजली की आपूर्ति की जाती है। आरईसी के अधिकारी के मुताबिक, एक अंदाज के मुताबिक देश भर के ग्रामीण इलाके में 5 करोड़ कनेक्शन लंबित है। लेकिन अगले दो साल में इन सभी घरों को बिजली से रोशन करने का लक्ष्य रखा गया है।
फीडर अलग होने से किसान खेती के लिए आसानी से अलग बिजली कनेक्शन ले सकेंगे। फीडर अलग होने से खेतों में पानी पटाने के दौरान बिजली की आपूर्ति आसान हो जाएगी और उन्हें डीजल पंप पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।