ट्रेन हादसे से पहले तकनीकी खामियां बता देगा सेंसर
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रेलवे ऐसे अत्याधुनिक व्हील सेंसर्स के इस्तेमाल की योजना बना रहा है जिनसे ट्रेन हादसों पर लगाम लगाई जा सकेगी। ये सेंसर्स रेल के यात्री डिब्बों, ट्रैक और इंजन की गड़बड़ियों के बारे में पहले ही बता देंगे ताकि समय रहते इनकी मरम्मत की जा सके। रेलवे ने इन सेंसर्स के इस्तेमाल में 113 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान जताया है। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेल के पहियों से जुड़ने वाले इस सिस्टम के लिए रेलवे जल्द एक वैश्विक टेंडर जारी करेगा। निगरानी प्रणाली के एक हिस्से के रूप में ये सेंसर ट्रेन संचालनों में ठीक एक ब्लैक बॉक्स की भूमिका में होंगे। यह प्रणाली कोच में अचानक होने वाली गड़बड़ी, ट्रैक की खामियों के साथ, पहियों में लगे बियरिंग की टूट-फूट की पहचान कर उसके मरम्मत के लिए संकेत देगी।
उल्लेखनीय है कि साल 2015 में रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने लोकसभा में कहा था कि बोर्ड ऐसी निगरानी प्रणाली लाने की योजना बना रहा है, जिससे यात्री डिब्बों के प्रमुख घटक अवयवों के ठीक ढंग से काम करने या न करने के बारे में समय रहते ही जानकारी मिल जाया करेगी। इससे दुर्घटनाओं पर लगाम लगाई जाने के साथ ही, परिचालन लागत में कमी आएगी और सुरक्षित यात्रा को लेकर रेलवे की विश्वसनीयता में इजाफा होगा। रेल अधिकारी के मुताबिक बजट सत्र में इस सिस्टम के पहले चरण के ट्रायल संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। रेलवे के अधिकारी टेंडर के तकनीकी बिंदुओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
तापमान और कंपन को रिकॉर्ड करेंगे सेंसर्स
इस निगरानी सिस्टम में काम करने वाले सेंसर्स रेल के पहियों के तापमान और उसमें होने वाले कंपन को रिकॉर्ड करेंगे। कंपनों में विसंगति पहिए के बियरिंग की खामियों को दर्शाएगी। यह ऑपरेटर्स को संकेत करेगी की बियरिंग में कुछ न कुछ खामी है। इस तरह बियरिंग में आई गड़बड़ी को दुरुस्त करके बड़ी दुर्घटना को टाला जा सकेगा। ऐसी निगरानी प्रणाली पश्चिमी देशों, खासकर ब्रिटेन, स्वीडन और इस्राइल में इस्तेमाल की जा रही है।