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Electoral bonds: अपने अध्यक्ष के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन, एक खत से शुरू हुआ विवाद; जानें पूरा मामला

Wed, 13 Mar 2024 05:17 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Wed, 13 Mar 2024 05:17 PM IST
सार

Electoral bonds: इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की कार्यकारी समिति और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आदिश अग्रवाल के बीच रार पनपती नजर आ रही है। 

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SCBA stands against chief’s letter to president draupadi murmu
adish agrawala - फोटो : adish agrawala facebook

विस्तार

इलेक्टोरल बॉन्ड मामले को लेकर नया अपडेट सामने आया है।  सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष आदिश अग्रवाल द्वारा लिखे गए पत्र से खुद को अलग कर दिया है। बता दें कि आदिश अग्रवाल ने 12 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ‘प्रेजिडेंशियल रेफरेंस’ के तहत रोक लगाने की मांग की गई थी। 

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अब सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की कार्यकारी समिति ने खुद को इस पत्र से अलग कर दिया है। इसके साथ ही SCBA द्वारा इस पत्र की निंदा भी की गई है। SCBA द्वारा कहा गया है कि ‘ये सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार को खत्म करने और कमजोर करने की कोशिश है’। 

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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आदिश अग्रवाल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा था। इसमें संविधान के अनुच्छेद 143 का जिक्र किया गया था। पत्र में लिखा था कि ‘सुप्रीम कोर्ट को खुद ही ऐसे फैसले नहीं लेने चाहिए जिनसे संवैधानिक गतिरोध पैदा हो और राजनीतिक दलों की अपनी लोकतांत्रिक प्रणाली पर सवाल खड़ा हो’। 

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पत्र में आग्रह किया गया था कि ‘राष्ट्रपति तब तक इसे प्रभावी ना करें जब तक कि शीर्ष अदालत इस मामले की दोबारा सुनवाई न कर ले’। पत्र में यह भी लिखा गया था कि ‘इससे अलग अलग पार्टियों को मदद करने वाले कॉरपोरेट्स के नामों का और उनके योगदान की मात्रा खुलासा होगा तो पार्टियों द्वारा उन्हें अलग थलग किया जा सकता है’। 

उधर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव रोहित पांडे द्वारा एक हस्ताक्षरित प्रस्ताव पढ़ा गया। इसमें कहा गया है कि ‘समिति के सदस्यों द्वारा राष्ट्रपति को ऐसा कोई पत्र लिखने के लिए किसी को अधिकृत नहीं किया गया है। इसके अलावा इस पत्र में व्यक्त किए गए विचारों से वह सहमत नहीं हैं।’ 

आगे कहा गया है कि ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति इस इस पत्र की सामग्री को भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार को कमजोर करने के प्रयास के रूप में देखती है। साथ ही ,समिति स्पष्ट रूप से इसकी निंदा करती है।’

इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में कब क्या हुआ? 

  • 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में मामले सुनवाई हुई 
  • कोर्ट ने SBI की इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे पर 30 जून तक का समय देने की मांग को खारिज किया।  
  • कोर्ट ने कहा था कि SBI 12 मार्च तक इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ा डेटा चुनाव आयोग को सौंपे। 
  • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, SBI द्वारा यह काम कर दिया गया है। 
  • अब चुनाव आयोग को 15 मार्च को शाम 5 बजे तक इस डेटा को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करना है। 
  • सुप्रीम कोर्ट ने ही 15 फरवरी को केंद्र सरकार की इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर रोक लगा दी थी। 
  • कोर्ट ने केंद्र सरकार की इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम असंवैधानिक बताया था। 

इलेक्टोरल बॉन्ड का मामला सुप्रीम कोर्ट में बीते 8 साल से लंबित पड़ा हुआ है। इस पर सभी की निगाहें इसलिए भी टिकी हुई हैं क्योंकि इस मामले का नतीजा आने वाले लोकसभा चुनावों पर असर डाल सकता है।

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