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छेड़छाड़ के मामलों में एससी-एसटी की महिलाओं का नहीं होगा मेडिकल परीक्षण

Mon, 09 May 2016 08:57 AM IST
एजेंसी/नई दिल्ली
एजेंसी/नई दिल्ली Updated Mon, 09 May 2016 08:57 AM IST
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SC-ST women will not medical examination.
सरकार ने छेड़छाड़ के मामलों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति की महिलाओं के चिकित्सकीय परीक्षण के 20 साल पुराने कानूनी प्रावधान को खत्म कर दिया है।
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नए कानून के तहत अश्लील इशारे करने, शीलभंग करने और पीछा करने जैसे कृत्य में पीड़ित महिला की चिकित्सकीय जांच की जरूरत नहीं होगी।

सरकार ने इसी साल 26 जनवरी को नए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन नियम, 2015 का नोटिफिकेशन जारी किया था।

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन नियम के प्रावधान

SC-ST women will not medical examination.
इस कानून में पीड़िता को दी जाने वाली राहत राशि को भी बढ़ाकर 85 हजार से 8.25 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे पहले यह 75 हजार से 7.5 लाख रुपये के बीच थी। यह राशि अपराध की प्रकृति के आधार पर तय की जाएगी।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, पहले 50 प्रतिशत राशि चिकित्सकीय जांच के बाद दी जाती थी। बाकी की 50 प्रतिशत राहत राशि पीड़िता को मामले की सुनवाई खत्म होने के बाद दी जाती थी।

पहली बार लागू किए गए इन प्रावधानों को तरजीह देने के लिए नये नियमों में रेप और गैंगरेप के मामलों में राहत के प्रावधान अलग से किए गए हैं।
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