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जवानों की अनुशासनहीनता गंभीर: उच्चतम न्यायालय
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 19 Dec 2016 06:08 PM IST
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supreme court of india
उच्चतम न्यायालय ने सुरक्षाबलों के जवानों की अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेने की बात करते हुए सोमवार को कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों का आदेश नहीं मानना दुराचार है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि किसी जवान का दोष तय करते समय पहले के उसके अपराधों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
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पीठ ने यह टिप्पणी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की उस अपील की सुनवाई के दौरान की जिसमें अगस्त 2014 के दिल्ली उच्च न्यायालय के एक फैसले को चुनौती दी गयी थी। सीआईएसएफ ने एक कांस्टेबल अबरार अली को अनुशासनहीनता के कई मामलों में दोषी पाने पर बर्खास्त कर दिया था जिसे बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय ने बदल दिया था।
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न्यायालय ने कहा कि अली को फौज से पांच दिन के लिए भाग जाने तथा तीन लगातार अवसरों पर सजा के बाद भी आदत में सुधार नहीं लाने का दोषी पाया गया था। इसके लिए सेवा से निलंबित कर देना काफी बड़ी सजा है।
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