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Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने शख्स को दुष्कर्म के आरोप से मुक्त किया, महिला के आरोपों को किया खारिज
Fri, 19 Aug 2022 07:16 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 19 Aug 2022 07:16 PM IST
सार
पीठ ने कहा कि शिकायत में प्राथमिकी या चार्जशीट में धारा 376 आईपीसी (दुष्कर्म) के तहत अपराध के तथ्यों को खोजना असंभव है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : social media
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला द्वारा एक पुरुष के खिलाफ लगाए गए दुष्कर्म के आरोपों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसका उसके साथ सहमति से संबंध था जो उसकी शादी से पहले, उसकी शादी के के दौरान और तलाक के बाद भी जारी रहा। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और एएस बोपन्ना की पीठ ने उस व्यक्ति की याचिका पर फैसला सुनाया जिसने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख किया था जहां अदालत ने उसके खिलाफ दायर आरोप पत्र को खारिज करने से इनकार कर दिया था। पीठ ने कहा कि शिकायत में प्राथमिकी या चार्जशीट में धारा 376 आईपीसी (दुष्कर्म) के तहत अपराध के तथ्यों को खोजना असंभव है।
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बेंच ने उस व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मामले और 24 मई, 2018 के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उसके खिलाफ आरोप पत्र का संज्ञान लिया। फैसले को लिखने वाले न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि जिस महत्वपूर्ण मुद्दे पर विचार किया जाना था, वह यह है कि क्या आरोपों से संकेत मिलता है कि अपीलकर्ता ने महिला से शादी करने का वादा किया था। एफआईआर और चार्जशीट में आरोपों को देखते हुए धारा 375 आईपीसी के तहत अपराध के महत्वपूर्ण तत्व अनुपस्थित हैं। दोनों के बीच संबंध विशुद्ध रूप से एक सहमति प्रकृति के थे। प्रतिवादी की शादी से पहले और शादी की अवधि के दौरान संबंध जारी रहे।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने अपने फैसले के दौरान केवल यह देखा है कि विवाद इस तथ्य का सवाल उठाता है कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत एक आवेदन में विचार नहीं किया जा सकता है।
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