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शाहजहांपुर ट्रेन हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को 5-5 लाख मुआवजा 

Wed, 06 Jul 2016 12:08 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 06 Jul 2016 12:08 AM IST
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SC orders to compensate victims kin of shajahanpur incident
सुप्रीम कोर्ट

पांच वर्ष पहले शाहजहांपुर में हिमगिरि एक्सप्रेस केऊपर बैठे नवयुवकों की ओवरहेड ब्रिज से टकराने से हुई मौत के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित परिवार को मुआवजा देने का एलान किया है। हादसे में मरने और घायल होने वाले उम्र 18 से 20 वर्ष के बीच थी।

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मालूम कि भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस(आईटीबीपी) में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की भर्ती के लिए बरेली में करीब तीन लाख नवयुवक आए थे। एक फरवरी 2011 को भर्ती में आए लोग हिमगिरी एक्सप्रेस के ऊपर बैठकर वापस जा रहे थे। शाहजहांपुर यार्ड के पास स्थित फुटओवर बिज्र से टकराकर 22 लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 
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सुप्रीम कोर्ट ने इस हादसे में मारे गए युवकों के परिवारवालों को पांच-पांच लाख रुपये देने का आदेश दिया है। जबकि हादसे में विकलांग हुए लोगों को डेढ़-डेढ़ लाख रुपए मुआवजा देने के आदेश दिया है। जबकि गंभीर चोट खाने वालों को 75-75 हजार रुपये मुआवजा देने के लिए कहा है। पीठ ने यह आदेश वकील अनिल कुमार की याचिका पर दिया है। गत 20 फरवरी को चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए दुर्घटना में मारे गए युवकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये देने का आदेश दिया था।
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वहीं गंभीर रूप से घायल लोगों को दो-दो लाख रुपए और सामान्य रूप से घायल लोगों को 50-50 हजार रुपए देने के लिए कहा था। हालांकि अदालत ने यह साफ किया था कि मुआवजे की यह रकम अस्थायी है, इसमें फेरबदल संभव है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया था कि क्यों नहीं ड्राइवर ने ओवरहेड ब्रिज के पहले ट्रेन रोकी, जबकि उसे मालूम था कि ट्रेन केऊपर लोग बैठे है और वे सभी ओवरबिज्र से टकराएंगे। उस वक्त ट्र्रेन की गति 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। साथ ही पीठ ने इस पर भी सवाल उठाया था कि आईटीबीपी को जब यह पता था कि  इस भर्ती के लिए इतनी बड़ी संख्या में लोग आएंगे तो भर्ती का आयोजन एक ही जगह पर क्यों किया गया? कई शहरों में भर्ती कराया जाना चाहिए।


पीठ ने यह भी कहा था कि देश के किसी भी शहर के लिए तीन लाख लोगों को हैंडिल करना मुश्किल है। वहीं आईटीबीपी का कहना था कि भर्ती महज 417 लोगों की होनी थी, ऐसे में तीन लाख लोगों का आना अप्रत्याशित था। 

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