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सिख दंगे मामले में SC ने बनाई दो पूर्व जजों की निगरानी कमेटी

Thu, 17 Aug 2017 08:28 AM IST
amarujala.com- presented by: मनीष कुमार
amarujala.com- presented by: मनीष कुमार Updated Thu, 17 Aug 2017 08:28 AM IST
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 SC makes a committee which will submit report in three months for sikh riots case
सु्प्रीम कोर्ट - फोटो : SELF

दिल्ली, कानुपर समेत देश के कई शहरों में भड़के 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े करीब 240 मामलों में विशेष जांच दल (एसआईटी) के क्लोजर रिपोर्ट की जांच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दो पूर्व जजों की एक  निगरानी कमेटी बनाई है। तीन महीने में कमेटी को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। साथ ही पीठ ने कानपुर में हुए सिख विरोधी दंगों को लेकर दायर याचिका की प्रति उत्तर प्रदेश सरकार के वकील तक पहुंचाने का निर्देश दिया है।

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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के दो पूर्व जजों की एक निगरानी कमेटी गठित करने का फैसला दिया है। यह कमेटी करीब 240 मामलों में एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट की जांच-पड़ताल करेगी और यह बताएगी कि इन सभी मामलों में दायर क्लोजर रिपोर्ट का निर्णय सही है या नहीं? तीन महीने में पैनल को रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है।
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सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर 199 मामलों में तो पहले ही क्लोजर रिपोर्ट दायर की जा चुकी है। 42 अन्य मामलों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। आठ मामलों में चार्जशीट दायर की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि फिलहाल पांच मामलों की जांच एसआईटी कर रही है। पीठ इस मसले पर अब 28 नवंबर को सुनवाई करेगी।
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कानपुर के दंगों पर खास निर्देश 
सुप्रीम कोर्ट ने कानपुर में हुए सिख विरोधी दंगों को लेकर दायर याचिका की प्रति यूपी सरकार के वकील तक पहुंचाने के लिए कहा है। इस मामले में 22 सितंबर को सुनवाई होगी। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को भी मुख्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया था। याचिका में कहा गया कि 1984 में कानपुर में हुए सिख विरोधी दंगों में 127 लोग मारे गए थे। राज्य में दंगों से संबंधित 2800 मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिनमें से अधिकतर मामले सबूतों केअभाव में बंद कर दिए गए।

इतिहास का काला धब्बा 

 SC makes a committee which will submit report in three months for sikh riots case

ऑपरेशन ब्लू स्टार की प्रतिक्रिया में 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। इसके बाद पूरे देश में सिखों के खिलाफ दंगे भड़क उठे थे। देश भर में भड़के इन दंगों में लगभग 3000 लोगों की मौत हो गई थी। सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में दिल्ली, कानपुर और बोकारो शामिल थे।

एचकेएल भगत, सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर  
भीड़ को हिंसा के लिए उकसाने के लिए कांग्रेस के तीन नेताओं, एचकेएल भगत, सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर पर आरोप लगते रहे हैं। एचके एल भगत की मौत हो चुकी है। जबकि जगदीश टाइटलर के खिलाफ मामलों को सीबीआई ने 2007 में बंद कर दिया था। 2009 में उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी। हालांकि 10 अप्रैल 2013 को दिल्ली कोर्ट ने उनके खिलाफ सारे मामले फिर खोलने के आदेश दिए। 

जांच के लिए दस आयोग 
दंगों की जांच के लिए दस आयोग बनाए जा चुके हैं। आखिरी, नानावटी आयोग ने 2005 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। 12 अगस्त 2005 को पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने सिख विरोधी दंगों के लिए लोकसभा में माफी मांगी थी। दंगों के दौरान देश में कांग्रेस का शासन था।

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