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सुप्रीम कोर्ट: चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी मिल सकती है जमानत, दिशा-निर्देश जारी
Thu, 07 Oct 2021 10:21 PM IST
Amit Mandal
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 07 Oct 2021 10:21 PM IST
सार
न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने इस मुद्दे पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा द्वारा दिए गए सुझावों को स्वीकार कर लिया।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चार्जशीट दाखिल करने के बाद जमानत देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट को जांच के दौरान आरोपी के आचरण को देखते हुए अंतरिम राहत देने से नहीं रोका जा सकता है।
न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने इस मुद्दे पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा द्वारा दिए गए सुझावों को स्वीकार कर लिया। इसमें कहा गया है कि अपराधों को चार श्रेणियों में रखा गया है - ए से डी, और दिशा-निर्देश संबंधित अदालतों के विवेक को प्रभावित किए बिना और वैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित किए गए हैं।
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पीठ ने कहा कि हम दिशानिर्देशों को स्वीकार करने और उन्हें निचली अदालतों के लाभ के लिए अदालत के आदेश का हिस्सा बनाने के इच्छुक हैं। श्रेणी ए के अपराधों में शामिल हैं: ए- पहली बार में सामान्य सम्मन/वकील के माध्यम से पेश होने की अनुमति। बी- यदि आरोपी समन के बावजूद पेश नहीं होता है, तो शारीरिक उपस्थिति के लिए उसे जमानती वारंट जारी किया जा सकता है। सी- जमानती वारंट जारी होने के बावजूद पेश होने में विफल रहने पर गैर जमानती वारंट।
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इसके अलावा, गैर जमानती वारंट को रद्द किया जा सकता है या अभियुक्त की शारीरिक उपस्थिति पर जोर दिए बिना जमानती वारंट/समन में परिवर्तित किया जा सकता है बशर्ते कि ऐसा आवेदन गैर जमानती वारंट के निष्पादन से पहले आरोपी की ओर से अगली तारीख को शारीरिक रूप से उपस्थित होने के लिए किया जाता हो।