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Supreme Court: सत्येंद्र जैन से जुड़ी अर्जी पर याचिकाकर्ता पर 20 हजार जुर्माना, जानिए क्यों खारिज हुई याचिका
Fri, 14 Oct 2022 09:55 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 14 Oct 2022 09:55 PM IST
सार
जस्टिस एस के कौल और जस्टिस ए एस ओका की पीठ ने कहा, याचिका इतनी गलत है और न्यायिक समय की इतनी बर्बादी है कि याचिकाकर्ता पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाना जरूरी है।
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सत्येंद्र जैन
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार आप नेता सत्येंद्र जैन को अस्थिर दिमाग वाला व्यक्ति घोषित करने और उन्हें विधायक के रूप में अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिका को खारिज करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। उच्च न्यायालय ने अपने 16 अगस्त के आदेश में कहा था कि उसके समक्ष दायर रिट याचिका में किए गए कथनों के आधार पर और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए वह विधानसभा सदस्य या दिल्ली सरकार में मंत्री होने के नाते जैन को अस्थिर दिमाग व्यक्ति घोषित नहीं कर सकता।
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अदालत ने कहा, 20 हजार जुर्माना लगाना जरूरी
जस्टिस एस के कौल और जस्टिस ए एस ओका की पीठ ने कहा, याचिका इतनी गलत है और न्यायिक समय की इतनी बर्बादी है कि याचिकाकर्ता पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाना जरूरी है। याचिका को खारिज करते हुए पीठ ने निर्देश दिया कि चार सप्ताह के भीतर जुर्माना सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता और सुलह परियोजना समिति के पास जमा किया जाए। दिल्ली निवासी द्वारा शीर्ष अदालत में दायर याचिका में ये मांग की गई थी।
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याचिका में आगे कहा गया था कि दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्रियों में से एक सत्येंद्र कुमार जैन, जो 2015 से शकूर बस्ती विधानसभा क्षेत्र से विधान सभा के सदस्य हैं, उन्होंने खुद घोषणा की कि उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के सामने अपनी याददाश्त खो दी है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल द्वारा विशेष न्यायाधीश, राउज एवेन्यू जिला न्यायालय नई दिल्ली को भी सूचित किया गया है। दुर्भाग्य से जैन अभी भी कैबिनेट मंत्री और विधायक बने हुए हैं।
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याचिका में कहा गया है कि जैन ने विशेष न्यायाधीश के समक्ष जमानत याचिका दायर की थी और दलीलों के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल द्वारा इसे रिकॉर्ड में रखा गया था कि उन्होंने ईडी अधिकारियों के सामने कहा है कि कोविड के गंभीर मामले के कारण उन्हें हस्ताक्षर जैसी चीजें याद नहीं हैं। उच्च न्यायालय ने इससे पहले मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जैन की गिरफ्तारी के बाद उन्हें कैबिनेट से निलंबित करने के लिए एक अलग याचिका को खारिज कर दिया था।
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