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हर तहसील में केंद्रीय विद्यालय खोलने पर तीन माह में निर्णय ले केंद्र : सुप्रीम कोर्ट

Sat, 18 Jan 2020 02:11 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sat, 18 Jan 2020 02:11 AM IST
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SC directed Central Government to take a decision include Constitution in primary school syllabus
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

देश के हर तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने व प्राथमिक विद्यालय के पाठ्यक्रम में भारतीय संविधान को शामिल करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को तीन माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

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जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की इस याचिका पर वित्त मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय को निर्धारित अवधि में निर्णय लेने को कहा है। सुनवाई के दौरान उपाध्याय ने पीठ से कहा कि हर तहसील में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने और संविधान को प्राथमिक स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करने से भाषावाद और क्षेत्रवाद समाप्त होगा।
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राष्ट्रीय एकता और अखंडता मजबूत होगी, भाईचारा बढ़ेगा और गरीब छात्रों को भी समान अवसर मिलेगा। उपाध्याय ने कहा कि अच्छे स्कूल के अभाव में तहसील मुख्यालय पर कार्यरत तहसीलदार, न्यायिक अधिकारी, डॉक्टर, पुलिस अधिकारी अपने परिवार को जिला मुख्यालय पर रखते हैं। इससे आने-जाने में समय नष्ट होने से वे ठीक से ड्यूटी नहीं कर पाते हैं।

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केंद्र ने ई-वाहनों पर अपनी ही नीति नहीं मानी, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

तमाम सार्वजनिक परिवहन व सरकारी गाडिय़ों को इलेक्ट्रिक वाहन में तब्दील करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। याचिका में कहा गया है कि वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए यह आवश्यक है। 

चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने गैरसरकारी संगठन सीपीआईएल द्वारा दायर इस याचिका पर सड़क परिवहन मंत्रालय को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने केलिए कहा है। याचिका में कहा कि इस योजना को लागू करने के लिए सरकार की ओर से वांछित प्रयास नहीं किए गए हैं। 

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने पीठ केसमक्ष कहा कि यह योजना इसलिए बनाई गई थी कि वायु प्रदूषण पर लगाम लग सके। लिहाजा वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के कारण वायु प्रदूषण हो रहा है और ग्लोबल वॉर्मिंग का बड़ा कारण है। सरकार के इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले बैटरी की चार्जिंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसकेलिए व्यापक स्तर पर विकास करने की जरूरत है। 

गत वर्ष मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रिक वाहनों केलिए कदम उठाने का आदेश पारित किया था। मालूम हो कि भारत सरकार के नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान 2020 के तहत कहा गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा। लक्ष्य रखा गया है कि वर्ष 2020 तक साठ से 70 लाख ऐसे वाहन बेचे जाएंगे लेकिन अब तक सिर्फ करीब 2.63 लाख वाहन ही बेचे गए हैं। 

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