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Supreme Court: आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से आंशिक राहत; अंतरिम जमानत नहीं मिली, जानें क्या कर सकेंगे काम?

Thu, 06 Aug 2026 02:07 PM IST
Pavan पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Thu, 06 Aug 2026 02:07 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग से यौन शोषण के 2013 के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को फिलहाल अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए अपनी पसंद का एक प्रशिक्षित केयरटेकर रखने की अनुमति दे दी है, जो चौबीस घंटे उनकी देखभाल कर सकेगा।

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SC allows Asaram to engage trained care taker of his choice, no interim bail as of now
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को फिलहाल अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने उन्हें अपनी पसंद का एक प्रशिक्षित केयरटेकर (देखभाल करने वाला) रखने की अनुमति दे दी, जो 24 घंटे उनकी चिकित्सकीय जरूरतों का ध्यान रख सकेगा। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत मांगने वाली आसाराम की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे फिलहाल लंबित रखा। अदालत ने कहा कि यदि भविष्य में उनकी तबीयत और बिगड़ती है तो वे दोबारा अदालत का रुख कर सकते हैं।
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सरकार ने पैरोल का मुद्दा उठाया
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आसाराम ने यह तथ्य छिपाया है कि उनके वकील ने पहले पैरोल के लिए भी आवेदन किया था। इस पर आसाराम के वकील ने कहा कि पैरोल की अर्जी पहले दायर की गई थी और वह स्वास्थ्य कारणों के आधार पर नहीं थी।
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AIIMS ने अस्पताल में भर्ती की जरूरत नहीं बताई
सुप्रीम कोर्ट को पहले बताया गया था कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विशेषज्ञों की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार आसाराम को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, उन्हें चौबीसों घंटे चिकित्सकीय सहायता और देखभाल की जरूरत है। इसी रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने उन्हें प्रशिक्षित केयरटेकर रखने की अनुमति दी है। इससे पहले 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने एम्स को मेडिकल बोर्ड बनाकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जांच करने का निर्देश दिया था।

राजस्थान हाईकोर्ट दे चुका है 20 दिन की पैरोल
इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम को 20 दिन की पैरोल दी थी। अदालत ने कहा था कि राज्य सरकार पैरोल आवेदन खारिज करने का पर्याप्त कारण नहीं बता सकी। हाईकोर्ट ने उनकी उम्र, जेल में बिताए गए लंबे समय और पहले मिली अंतरिम रिहाई के दौरान उनके व्यवहार को ध्यान में रखते हुए यह राहत दी थी।


दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा बरकरार
राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 मई को 2013 में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आसाराम की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। हालांकि, अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो कानून के तहत कुछ आरोपों से उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376(2)(एफ) के तहत नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा कायम रखी थी। इसके अलावा हाईकोर्ट ने गलत तरीके से बंधक बनाने, मानव तस्करी, आपराधिक धमकी, महिला की गरिमा का अपमान, यौन उत्पीड़न, पॉक्सो अधिनियम की धाराओं तथा किशोर न्याय अधिनियम के तहत भी उनकी दोषसिद्धि बरकरार रखी थी।

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2018 में हुई थी सजा
आसाराम को 25 अप्रैल 2018 को अपने आश्रम की एक नाबालिग छात्रा से यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वर्तमान में वह जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।
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