ग्रीष्म अवकाश के बाद मतपत्र से चुनाव कराने संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगी सुनवाई
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उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने एक बार फिर देश में मतपत्रों से मतदान कराने की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। याचिका में मांग की गई थी कि 17वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव को निरस्त करके मतपत्रों से दोबारा मतदान कराने की मांग की गई है। वकील एमएल शर्मा ने यह याचिका दायर की है। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा, 'मामला ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद नियत समय पर सूचीबद्ध किया जाएगा।'
Supreme Court once again declines to give an urgent hearing to advocate ML Sharma’s PIL against Lok Sabha elections being held via EVMs. The Court says, 'the matter will be listed in due course after vacation'.
— ANI (@ANI) June 17, 2019विज्ञापन
इससे पहले 14 जून को भी मतपत्र से दोबारा लोकसभा चुनाव कराने के निर्देश देने की याचिका पर अदालत ने तुरंत सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने 13 जून को कहा था कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स (आरपी) एक्ट के तहत चुनाव केवल मतपत्र से ही हो सकते हैं। इसलिए उन्होंने मांग की है कि इन चुनाव परिणामों को खारिज किया जाए और बैलेट पेपर के जरिए नए चुनाव कराए जाएं।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव 2019 मई महीने में पूरे हुए हैं। इसमें भारतीय जनता पार्टी 300 से भी अधिक सीटें जीतकर एक बार फिर सत्ता में आई है। वहीं कांग्रेस पार्टी महज 52 सीट पर आकर सिमट गई। विपक्षी पार्टियां कई चुनावों में हार के बाद ईवीएम पर सवाल खड़े करती रही हैं।
हाल ही में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी ईवीएम की जगह मतपत्र से मतदान कराने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि हम मशीन नहीं चाहते, हमारी मांग है कि कागज के मतपत्र वाले युग की वापसी हो। हम एक आंदोलन प्रारंभ करेंगे और यह बंगाल से शुरू होगा।
बनर्जी ने कहा था कि मैं सभी 23 विपक्षी राजनीतिक दलों से कहूंगी कि वे साथ आएं और बैलेट पेपर की वापसी की मांग करें। अमेरिका जैसे देश में भी ईवीएम पर प्रतिबंध लगा हुआ है। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र बचाओ, हमें ईवीएम नहीं चाहिए, बैलेट पर लौटो। ईवीएम पर एक तथ्य खोज समिति बननी चाहिए।