SBI: जीडीपी में ‘के-आकार’ में सुधार के दावे मनगढ़ंत, भारत का उत्थान नए वैश्विक दक्षिण के पुनर्जागरण का संकेत
अर्थव्यवस्था के विभिन्न समूहों की असमान वृद्धि है। कुछ क्षेत्र बहुत तेजी से बढ़ते हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में गिरावट जारी रहती है या उन्हें संघर्ष करना पड़ता है।
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एसबीआई ने सोमवार को एक शोध रिपोर्ट में कहा, भारत में महामारी के बाद अर्थव्यवस्था में ‘के-आकार’ में सुधार को लेकर किए जाने वाले दावे दोषपूर्ण, पूर्वाग्रह से ग्रसित और मनगढ़ंत हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह चुनिंदा तबकों के हितों को बढ़ावा देने वाली भी है, जिनके लिए भारत का बेहतरीन उत्थान अप्रिय है। देश का यह उल्लेखनीय उत्थान नए वैश्विक दक्षिण के पुनर्जागरण का संकेत देता है।
अर्थव्यवस्था में के-आकार के सुधार का मतलब
अर्थव्यवस्था के विभिन्न समूहों की असमान वृद्धि है। कुछ क्षेत्र बहुत तेजी से बढ़ते हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में गिरावट जारी रहती है या उन्हें संघर्ष करना पड़ता है।
अचल संपत्तियों में निवेश आय में असमानता घटी
रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना के बाद भारतीय परिवार अपनी बचत को अचल संपत्ति सहित विभिन्न भौतिक संपत्तियों में नए सिरे से लगा रहा है। लोगों के आयकर रिटर्न आंकड़े बताते हैं, 2014-22 के दौरान व्यक्तिगत आय असमानता 0.472 से घटकर 0.402 रह गई है।