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Hindi News ›   India News ›   Samwad: Nitin Gadkari speaks with Amar ujala editors

संवाद: अमर उजाला संपादकों के सवाल और नितिन गडकरी के जवाब

Tue, 09 Jun 2020 06:21 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Tue, 09 Jun 2020 06:21 PM IST
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Samwad: Nitin Gadkari speaks with Amar ujala editors
नितिन गडकरी (file photo) - फोटो : अमर उजाला

केंद्रीय केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, सूक्ष्म-लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री नितिन गडकरी ने अमर उजाला संवाद में कोरोना संक्रमण से निपटने से लेकर विभिन्न सड़क योजनाओं पर बात की। इस दौरान एमएसएमई का बकाया लौटाने पर भी उन्होंने विस्तार से बात की। इसके अलावा विभिन्न राज्यों में नेशनल हाईवे से जुड़े सवालों के भी जवाब दिए। अमर उजाला के विभिन्न संस्करणों के संपादकों से वेबिनार के जरिए संवाद में गडकरी ने कई महत्वपूर्ण सवालों के उत्तर दिए। इस दौरान नितिन गडकरी ने क्या क्या कहा जानिए।  

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विनोद अग्निहोत्री, राजनीतिक संपादक: कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है, इसे रोकने की दिशा में सरकार क्या काम कर रही है? 
नितिन गडकरी: कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैला है, यह नया वायरस है, कृत्रिम वायरस है। इसका वैक्सीन अभी तक नहीं मिला है। हमारे देश में इस पर प्रयोग चल रहा है। जब वैक्सीन हमें मिलेगा तो हम इससे बच पाएंगे। हमें तब तक रोकथाम उपायों व दिशा निर्देशों का पालन करना होगा। लंबे समय तक लॉकडाउन रखना संभव नहीं है, पूरी तरह खुली छूट भी नहीं दी जा सकती है। हमें कोरोना वायरस के साथ जीना ही सीखना होगा। जीवन पद्धति सीखनी होगी कि इसके साथ कैसे रहना होगा। सरकार का पूरा प्रयास इसे रोकने का है। साथ ही इकोनॉमिक वॉर भी चल रही है। सभी को मिलकर इसका प्रतिकार करना होगा। विश्वास है कि इसमें हमारी ही जीत होगी।  
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जयदीप कर्णिक, संपादक, अमर उजाला डिजिटल: आपने कहा कि ये कृत्रिम वायरस है, इस पर दावे प्रतिदावे बहुत हैं कि ये लैब में बना वायरस है। क्या भारत सरकार का भी मानना है कि यह लैब में निर्मित वायरस है, एक कृत्रिम वायरस है, प्राकृतिक वायरस नहीं है?
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नितिन गडकरी: मैंने इतना कहा है कि इसका इलाज तभी निकलेगा जब वैक्सीन आएगा। दुनिया को इसके बारे में पता नहीं था इसलिए वैक्सीन नहीं आ पाई। अब वायरस मिल गया है तो इस पर रिसर्च हो रही है, वैक्सीन भी बनेगी। इतना ही मुझे कहना है, बाकी मुझे या भारत सरकार को किसी विवाद में नहीं पड़ना है। 



विनोद अग्निहोत्री: एमएसएमई के दायरे को बढ़ाया गया है, इसमें सर्विस सेक्टर भी शामिल होगा। इसकी गाइडलाइन कब तक जारी होगी? 

नितिन गडकरी: एमएसएमई की परिभाषा 14 साल से लंबित थी। अब हमने परिभाषा बदल दी है और इसका सभी को फायदा होगा। पहले मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस एंटरप्राइजेज अलग कैटेगरी थी, अब एक हो गई है। हमने राज्य सरकारों से एमएसएमई के बकाये का भुगतान जल्द करने का आग्रह किया। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और बड़े उद्योगों सहित कई राज्य सरकारों पर एमएसएमई का तकरीबन पांच लाख करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। इसके लिए मुख्यमंत्रियों को पत्र भी लिखा है।  

यूपी में दूसरे राज्यों से करीब 30 लाख प्रवासी मजदूर वापस आए हैं, इन्हें उन्हीं राज्यों में एमएसएमई सेक्टर में काम देने के लिए सरकार क्या उपाय कर रही है इस सवाल के जवाब में गडकरी ने कहा- जो मजदूर वापस जाना चाहते हैं उनके लिए एक प्रक्रिया है। वो जिस गांव या जिले में हैं वहां के कलेक्टर को एक पत्र दें, जहां जाना चाहते हैं वहां दूसरी कॉपी दें। इंडस्ट्री वाले दोनों कलेक्टरों से बात करके इन्हें लाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। लोगों में इतना डर पैदा हुआ कि लोग मुंबई से पटना और लखनऊ पैदल ही निकल गए। ये बहुत नुकसानदेह है। इसलिए मैं कहूंगा कि लोगों के मन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास का निर्माण करना होगा। 
  
इंदुशेखर पंचोली, संपादक, अमर उजाला: एमएसएमई का बकाया एक बड़ा मुद्दा है। सरकार और इंडस्ट्रीज पर करीब पांच लाख करोड़ बकाया है।  

नितिन गडकरी: मैंने जो कहा था उस पर कुछ लोगों ने गलत तरीके से आपत्ति उठाई थी। भारत सरकार की मिनिस्ट्री और उसकी अंडरटेकिंग, राज्य सरकार की मिनिस्ट्री और उसकी अंडरटेकिंग और उद्योग जगत। इन सबका मिलाकर बकाया पांच लाख करोड़ रुपये हो सकता है, इस तरह की मीटिंग मैंने ली थी। हमने एक पोर्टल खोला है। उसके आधार पर हमने 40 हजार करोड़ का निपटारा किया। भारत सरकार ने भी आदेश जारी किया है छोटे उद्यमियों का पैसा तुरंत वापस दे दें। मैंने सभी राज्यों से बात की और कहा कि बकाया तुरंत दे दें। हाल के दिनों में मेरी बड़े उद्योगों से भी बातचीत हुई। उनसे भी मैंने कहा कि बकाया दीजिए। आज हम किसी पर कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि सभी की हालत खराब है। मेरा अनुरोध है कि जिन्हें पैसा नहीं मिला है वो चैंपियन पोर्टल पर अपना नाम रजिस्टर कर भेजें। 

संजय अभिज्ञान, संपादक, अमर उजाला देहरादून: चारधाम परियोजना को कुंभ से पहले पूरा किया जाना था, 2019 में इसे पूरा होना था। कुंभ शुरू होने को है और प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ है और न ही हरिद्वार के आसपास सड़क चौड़ीकरण का काम पूरा हुआ है। 

नितिन गडकरी: हरिद्वार बाईपास और सड़क से जुड़े पुराने ठेकेदार से काम वापस ले लिया गया है। इसके पास मेरे मंत्री बनने से पहले ही ठेका था लेकिन काम बहुत धीमा था। इसलिए हटा दिया गया। नया टेंडर निकाला गया। कुंभ से पहले काम पूरा हो जाएगा। चारधाम प्रोजेक्ट समय से पूरा नहीं हुआ इसके कई कारण हैं। कई बार छोटी-छोटी बातों पर कोर्ट स्टे ले लिया गया। कभी हाईकोर्ट का स्टे तो कभी दिल्ली में ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामला चला जाता है। ये सड़क बनेगी तो बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री यहां हम सालभर जा सकेंगे। औली के जोशीमठ को विकसित करने को लेकर मैंने खुद सीएम से बात की ताकि यह दावोस जैसा बन सके। मैं चाहता हूं कि विकास भी हो और पर्यावरण का भी पूरा ध्यान रखा जाए। एक पेड़ टूटा तो 10 लगाना भी चाहते हैं। केदारनाथ के पास टनल पर भी काम चल रहा है। बीआरओ का इसमें बहुत सहयोग है। पिथौरागढ़-मानसरोवर रूट पर पहाड़ की कटाई का काम पूरा हो चुका है और अगले माह में वहां भी सड़क बन जाने की आशा है।   
 

संजय पांडे, संपादक, हरियाणा-पंजाब: दिल्ली से पानीपत तक नेशनल हाइवे को 12 लेन करने का प्रोजेक्ट शिलान्यास 2015 में हुआ था, लेकिन इसमें देरी हो रही है। इसे 2019 तक पूरा होना था। कब पूरा होगा ये काम? 

नितिन गडकरी: दिल्ली के मुकरबा चौक से पानीपत तक मुख्य सड़क आठ लेन व दोनों ओर दो-दो सर्विस लेन की योजना पर काम शुरू कराया गया था लेकिन कंपनी काम नहीं कर सकी। इस कारण अब कंपनी को बदल दिया गया है। नई कंपनी काम शुरू करेगी और नेशनल हाईवे चौड़ीकरण का काम तेजी से किया जाएगा। नेशनल हाईवे-44 का दिल्ली से पानीपत तक चौड़ीकरण का काम जल्द तेजी पकड़ेगा। इसका निर्माण होने से आए दिन लगने वाले जाम से छुटकारा मिलेगा और दुर्घटनाएं कम हो जाएंगी। देश के काफी व्यस्त रहने वाले नेशनल हाईवे-44 का विकल्प जल्द तैयार करने के लिए काम शुरू कराया जाएगा। यह दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेस-वे होगा। इसके लिए जमीन अधिग्रहण का काम हो चुका है। निर्माण शुरू होना बाकी है। साथ ही पंजाब के जालंधर से अजमेर तक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनेगा, जिससे मुंबई सीधे पहुंचा जा सके।

दिल्ली-मुंबई हाईवे के लिए पायलट प्रोजेक्ट इलेक्ट्रिक हाईवे बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सड़क पर एक ट्रैक होगा। उसपर टच होता जाएगा और ट्रक 20 किलोमीटर तक चार्ज होता रहेगा। 20 किमी. के बाद वो 200 किमी. इलेक्ट्रिक पर चलेगा। फिर वो 20 किमी चार्ज होगा। यह हाईवे सोहना से शुरू होगा। करीब एक लाख करोड़ लागत का यह हाईवे है। यही हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात से होकर गुजरेगा। यह अभी प्रयोग में है। 

पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से काफी प्रदूषण होता है। इस समस्या के हल के लिए पराली से बायो सीएनजी बनाने का प्रोजेक्ट लुधियाना में जल्द शुरू किया जाएगा। इसका उद्घाटन करने मैं खुद जाऊंगा। ऐसे प्रोजेक्ट नागपुर में लगाए हुए हैं जिनसे बस और ट्रक चल रहे हैं। देश में प्रदूषण कम होना चाहिए और यही मेरा लक्ष्य है। पराली से बायो सीएनजी बनाने से प्रदूषण कम होगा और किसानों को फायदा भी होगा। पांच टन पराली से एक टन बायो सीएनजी निकलती है। इसके साथ ही चावल से इथेनॉल तैयार होता है तो उस पर भी काम कर सकते हैं। 500 डिस्टलरी लगा रहे हैं जो हरियाणा व पंजाब के लिए बेहतर प्रोजेक्ट हो सकते हैं।

राजेंद्र त्रिपाठी, संपादक, मेरठ : आपने 21 फरवरी 2019 को मुजफ्फरनगर से पानीपत-खटीमा राजमार्ग 507 की घोषणा की थी जिसमें 4500 करोड़ का खर्चा होना था। यह काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है। मुजफ्फरनगर से रुड़की तक का काम भी पूरा नहीं हुआ है। मेरठ से पौड़ी के लिए एक हाईवे बन रहा था जो चीन बॉर्डर तक जाता है। वह काम भी कई सालों से अटका पड़ा है। 

नितिन गडकरी : मेरठ से लेकर मुजफ्फरनगर और हरिद्वार तक जो सड़क जाती है उसपर मैं खुद गया हूं। वहां एक मस्जिद थी जिसे लेकर काफी समय तक काम रुका रहा। मेरठ-पौड़ी मार्ग पर अटके निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी। मेरठ-पौड़ी मार्ग चीन की सीमा तक जाता है और यह महत्वपूर्ण है। मेरी जानकारी में नहीं था, कहां अटका है, इसकी जानकारी जरूर ली जाएगी। 

गंग नहर से जल परिवहन शुरू करने के सवाल पर गडकरी ने कहा, हमारे देश में इसका ढांचा विकसित नहीं हो पाया है। नदियों पर जो पुल बने हैं वो सपाट हैं, इन्हें तोड़कर गोलाकार बनाना होगा तभी परिवहन संभव हो पाएगा। हमने वाराणसी में हल्दिया तक इसपर काम किया है। अगर सड़क से जाने के लिए खर्चा 10 रुपये है, रेलवे से 6 रुपये है तो पानी के लिए एक रुपया है। अगर हम एलएनजी ईंधन पर ले आएंगे तो खर्चा 50 पैसा आएगा। क्लीन गंगा मिशन पर मैंने 70 फीसदी काम किया। कानपुर से वाराणसी तक गंदा पानी जाता था। वाराणसी में सात और कानपुर में 6 प्रोजेक्ट लगाए हैं। अभी मेरे पास ये मंत्रालय नहीं है। अगर काम किया जाए तो जलमार्ग से दिल्ली से आगरा पहुंचने में एक घंटे का समय लगेगा।   
  

वीरेंद्र आर्य, संपादक, वाराणसी:  वाराणसी से जलमार्ग शुरू तो हुआ, लेकिन ऐसा लगता है कि भारतीय उद्योगों ने उसे स्वीकार नहीं किया। इसका क्या कारण है?

नितिन गडकरी: उत्तर प्रदेश का आम होगा, आलू होगा, यहां से जो माल बाहर से आता है, अब इसके जरिए आ-जा सकता है। अभी गंडक नदी से नेपाल तक माल ले जाने की योजना भी बनी है। अब उत्तर प्रदेश में इसके जरिए ट्रांसपोर्ट शुरू होना चाहिए। वाराणसी में विदेशी पर्यटक आते थे। मैंने सुना है कि वाराणसी में क्रूज शुरू हुआ है जो 20-25 दिनों के लिए बुक  हो जाता है। अब यूपी के लोग इसका फायदा नहीं उठाएंगे तो हम क्या कर सकते हैं।   
 
राकेश भट्ट, संपादक, शिमला: कालका-शिमला हाईवे और मनाली को आनंदपुर से जोड़ना, इन दोनों की डेडलाइन लगातार बढ़ती जा रही है। जो भी पर्यटक इन रास्तों से हिमाचल आता है, वह बेहद खराब अनुभव के साथ वापस जाता है। लोग चार साल से जस के तस पड़े हाईवे के काम को लेकर भी हैरान रहते हैं।

नितिन गडकरी: हिमाचल में दाखिल होने के लिए दो अहम रास्तों कालका-शिमला और आनंदपुर-मनाली नेशनल हाईवे का बचा हुआ काम निर्माण करने वाली पुरानी एजेंसियों को हटाकर अब नई एजेंसियां करेंगी। इन एजेंसियों को टेंडर के जरिए काम आवंटित किया जाएगा। दोनों ही सड़कों के काम में कई अड़चनें हैं। कहीं समय से भू-अधिग्रहण नहीं हो पा रहा तो कहीं फॅारेस्ट क्लीयरेंस या अवैध अतिक्रमण वजह बना है। यही वजह है कि शिमला-कालका फोरलेन का काम करने वाली दो कंपनियां काम पूरा करने से पहले ही हाथ खड़े कर चुकी हैं। इनमें से एक नामी कंपनी तो दीवालिया तक घोषित हो चुकी है। एक कंपनी ने तो डेढ़ सौ करोड़ घाटा झेला। दोनों ही सड़कों के निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से कई बैठकें हुई हैं, जिसके बाद अब काम में तेजी आई है।

बविंदर वशिष्ठ, संपादक, जम्मू : कश्मीर से देश को जोड़ने वाले जम्मू-श्रीनगर हाईवे का काम 5 साल से लटका हुआ है। उधमपुर से बनिहाल हाईवे थोड़ी सी बारिश में भी बंद हो जाता है। फोरलेन का ये  काम कब तक पूरा हो पाएगा। 
 
नितिन गडकरी: उधमपुर और बनिहाल के बीच जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे का काम किसी दूसरी कंपनी को दिया जाएगा। काम में तेजी लाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। बार-बार भूस्खलन के कारण यहां काम करने में दिक्कतें आ रही हैं लेकिन जम्मू और श्रीनगर में रोड कनेक्टिविटी के लिए सरकार इस हाईवे को जल्द तैयार करेगी। जम्मू और श्रीनगर में रिंग रोड भी जल्द बनकर तैयार हो जाएंगे।

लद्दाख को 12 महीने सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए सोनमर्ग और द्रास के बीच प्रस्तावित जोजिला टनल के लिए टेंडर की प्रक्रिया 3 माह में पूरी कर ली जाएगी। इस टनल को बनाने का काम किसी भारतीय कंपनी को देने का प्रयास है। चार दिन पहले ही इसके लिए फिर से टेंडर मांगे गए हैं। भौगोलिक परिस्थितियों के चलते यहां काम करना कठिन है। सामरिक महत्व की इस परियोजना के लिए बेशक, तीन बार टेंडर रद्द हो चुके हैं लेकिन देश के लिए अहम जोजिला टनल सरकार की प्राथमिकता है।

केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में पर्यटन को नई दिशा देने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना कटड़ा-दिल्ली एक्सप्रेस-वे का काम इसी साल शुरू हो जाएगा। पंजाब के मुख्यमंत्री और जम्मू-कश्मीर एवं हरियाणा के प्रतिनिधियों से चर्चा के बाद 575 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का एलाइनमेंट दो दिन पहले ही फाइनल किया गया है।

 
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