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चौथी पीढ़ी का सबसे खतरनाक जेट बनाएगा भारत, मिग-35 बेचने के लिए बेताब है रूस

Sun, 23 Jul 2017 07:16 PM IST
amarujala.com- Written by: श्रवण शुक्ला
amarujala.com- Written by: श्रवण शुक्ला Updated Sun, 23 Jul 2017 07:16 PM IST
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Russia keen to sell new fighter jet MiG-35 to IAF under Make In India Programme
मिग-35 - फोटो : theaviationist

रूस भारत को फाइटर जेट मिग-35 बेचने के लिए बेताब है। इसके लिए इन जेट को बनाने वाली रूसी कंपनी मिग कॉरपोरेशन लगातार एयरफोर्स की रिक्‍वायरमेंट्स को समझने में जुटी हुई है। रूस ने कहा है कि वो विशेष तौर पर भारत के लिए, भारत में ही चौथी पीढ़ी के सबसे खतरनाक फाइटर जेट 'मिग-35' के निर्माण के लिए तैयार है। इसके लिए सिर्फ भारत सरकार की अनुमति चाहिए।

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मिग-35 IV++ पीढ़ी का सबसे एडवांस फाइटर जेट है, जिसका तोड़ फिलहाल किसी भी दूसरे देश के पास नहीं है। अभी ये विमान टेस्टिंग मोड से निकला है और अगले साल पहली बार रूसी वायुसेना के लिए 'फुल्क्रम-एफ' की डिलीवरी होनी है।
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खास बात ये है कि मिग-35 विमानों के विकसित होकर सबसे खतरनाक फाइटर जेट के तौर पर सामने आने की वजह से रूस ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी के स्ट्रील्थ फाइटर जेट के बजट में कटौती कर दी है। रूस का कहना है कि अगले दो दशकों तक मिग-35 ही उसकी वायुसेना के अग्रिम पंक्ति के फाइटर जेट बनें रहेंगे।
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अब रूस भारत को भी ये विमान देना चाहता है, साथ ही 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में ही इसका उत्पादन करना चाहता है। इसके अलावा वो भारत सरकार की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए ही विदेशी खरीददारों को मिग-35 का एक्सपोर्ट भी करना चाहता है। 

रसियन एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन मिग के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर इल्या तरसेंको ने मॉस्को के पास झुकोवस्की इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर MAKS 2017 एयर शो के दौरान अपनी मंशा पत्रकारों के सामने जाहिर की। उन्होंने कहा कि रूस चौथी पीढ़ी के इस सबसे एडवांस फाइटर जेट को भारत की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बना रहा है। पहले ये विमान भी भारतीय वायुसेना के टेंडर में शामिल हुआ था, पर वो राफेल से पिछड़ गया था। 

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मिग-35 विमान IV++ यानि चौथी पीढ़ी के युद्धक विमानों में अधुनातन विमानों में सबसे खतरनाक है। इसकी कीमत 40-50 मिलियन डॉलर है। ये परमाणु हथियारों के साथ ही परंपरागत हथियारों को ढो सकता है, और कई कामों में प्रयुक्त हो सकता है। मिग-35 विमान को मिग-29 के बेस पर ही बनाया गया है, पर इसमें काफी सुधार किया गया है। कभी मिग-29 आसपान पर राज करते थे और मिग-35 के बनने से पहले ही रूस से कई देशों ने इसकी खरीद के संपर्क भी कर लिया है। मिश्र ने तो बाकायदा 46 मिग-35 की खरीद के लिए रूस से समझौता भी कर लिया है। इसके अलावा सीरियन एयरफोर्स और सर्बियन एयरफोर्स ने भी रूस से इन विमानों को मांगा है। इंडियन एयरफोर्स के पास मिग-29 हैं, जिन्हें साल 2013 में अपग्रेड किया गया।

भारत में अपना कारखाना लगाएगी मिग-35

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मिग-35
वैसे,मिग-35 फाइटर जेट को दुनिया के सामने लाते समय मिग के अधिकारी ने इस साल की शुरुआत में ही कहा था कि रूसी कंपनी भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इण्डिया’ कार्यक्रम के अन्तर्गत ही इस फाइटर जेट को बेचने की पेशकश करेगी।

दरअसल, राफ़ेल विमानों की ख़रीदी का सौदा लंबा खिंचने और सिर्फ 36 फाइटर जेट खरीदने के भारत सरकार के निर्णय के बाद रूस को उम्मीद है कि मिग-35 फाइटर जेट को वो भारत के लिए उत्पादित कर सकेगा। रूस को ये मालूम है कि इंडियन एयरफोर्स को क़रीब चार सौ फाइटर जेट्स की जरूरत है। इसीलिए राफेल से पिछड़ने के बावजूद रूसी कम्पनी ने मिग-35 के विकास को जारी रखा और अब 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में ही इसके निर्माण के लिए तैयार है।

सूत्रों की मानें तो अगर भारत सरकार रूस की पेशकश को मान लेता है, जो मिग कंपनी भारत में अपना कारखाना तक लगा देगी। ताकि भारत की जरूरतों को पूरा करने के बाद वो 'मेक इन इंडिया' मुहिम से जुड़ अन्य देशों को भी मिग-35 दे सके।

वैसे, रूसी मिग का भारत के साथ अच्छा अनुभव रहा है। नासिक में मिग हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के कारखाने में मिग-21, मिग-23 तथा मिग-27 लड़ाकू विमानों का उत्पादन कर चुका है। और मौजूदा समय में सुखोई एसयू-30एमकेआई लड़ाकू विमानों का उत्पादन हो रहा है। ऐसे में हम ये मान सकते हैं कि अगर मिग-35 पर भारत सरकार के साथ सौदा होता है, तो नासिक में ही मिग-35 का भी उत्पादन किया जाएगा। इसके लिए कारखाने के आकार और क्षमताओं में बढ़ोतरी की जाएगी।

मिग-35 की खासियतें

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मिग-35
मिग-35 को मिग-29M/M2 मल्टी रोल फाइटर प्लेन भी कहते हैं। ये दो वैरिएंट में बनाया जा रहा है, जिसमें सिंगल सीटर के अलावा भारत की जरूरतों के हिसाब से डबल सीटर मिग-35 का भी उत्पादन हो सकेगा।

मिग-35 हथियारों से लैस होकर 17,500 किलो का हो जाएगा, जिसमें परंपरागत हथियारों के अलावा परमाणु हथियारों की तैनाती की जा सकेगी।

मिग-35 मैक 1.94 की गति से उड़ान भरेगा। जो 2400 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार होगी।

मिग-35 की रेंज उड़ान भरने पर 2000 किमी की होगी, जो लड़ाई के दौरान 1000 की दूरी तक एक बार में मार कर सकेगा।

मिग-35 पर ब्रह्मोस की भी तैनाती हो सकेगी। ये विमान हथियारों के मामले पूरी तरह से अलग होगा, जिसमें बड़े-छोटे हथियारों के लिए  9 हार्डप्वॉइंट लगे होंगे। इसमें 7000 किलो तक के बन फिट किए जा सकेंगे।

मिग-35 पर 30 एमएम की ग्राजेव-शिपुनोव जीएसएच-301 ऑटोमेटिक गन लगी होगी, तो 150 रॉउंड फायर करेगी।

मिग-35 पर लेजर गाइडेड बमों की तैनाती हो सकेगी। इसके अलावा कई मिसाइलों की भी तैनाती हो सकेगी।

मिग-35 पर एक साथ 4 एंटी-शिप मिसाइलों की तैनाती हो सकेगी, जो किसी भी लड़ाकू नेवी जहाज को ढेर करने के लिए काफी होगी। 

राफेल से पिछड़कर अब सबसे आगे आ गया है मिग-35

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राफेल से पिछड़कर अब सबसे आगे आ गया है मिग-35 - फोटो : Pinrest
भारत सरकार ने वायुसेना के लिए विमानों की आपूर्ति की निविदा मंगवाई थी, जिसमें मिग-35 भी शामिल था। पर भारत सरकार ने मिग-35 पर दांव नहीं लगाया था। जबकि मिग-35 सबसे किफायती और सस्ता सौदा था। दरअसल, भारत सरकार अपने हथियारों, लड़ाकू विमानों के उत्पादकों में विविधता रखना चाहती है, ताकि किसी एक देश पर निर्भर न रहना पड़े।

क्योंकि आपात स्थिति में या युद्ध के समय उस देश ने सामान सप्लाई करने से मना कर दिया, तो भारतीय वायुसेना की कमर टूट सकती है। हालांकि अब राफेल विमानों की सीमित आपूर्ति के बाद फिर से मिग-35 विमान इस दौड़ में आ चुका है। ऐसे में अगर भारत सरकार के मिग-35 को लेकर रूस के साथ समझौता हो जाता है, तो भारतीय वायुसेना इस विमान के दम पर पड़ोसियों से काफी आगे निकल जाएगा।

हालांकि भारत-रूस एक साथ मिलकर पीएके-एफए टी-50 विमान का निर्माण कर रहे हैं। ये पांचवीं पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस है। ऐसे में ये विमान दुश्मन की रेडार की पकड़ में आए बिना तबाही मचा सकता है। ये विमान भी अपनी टेस्टिंग पूरी कर चुका है और जल्द ही रूसी एयरफोर्स में शामिल होने के बाद इंडियन एयरफोर्स में भी शामिल हो जाएगा। 
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