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तालिबान के लिए रूस ने दांव पर लगा दी भारत की दोस्ती

Thu, 29 Dec 2016 03:58 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 29 Dec 2016 03:58 PM IST
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Russia, China and Pakistan for flexible ties with Taliban
फाइल फोटो - फोटो : getty images

तालिबान को लेकर रूस और भारत की दोस्ती खतरे में दिख रही है। वैसे भी, हाल के दिनों में भारत और रूस के संबंधों में दूरियां बढ़ी है। लेकिन रूस के तालिबान को यूएन की लिस्ट से हटाने के रुख से रिश्ते में दरार और बढ़ सकती है। मंगलवार को मास्को में हुई बैठक में तालिबान को यूएन की लिस्ट से हटवाने पर रूस, चीन और पाकिस्तान सहमत हो गए हैं। इनके रुख को लेकर भारत काफी चिंतित है।  

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चीन, पाकिस्तान और रूस अफगानिस्तान की 'बिगड़ती' सुरक्षा स्थिति पर मास्को में चर्चा हुई। हालांकि, अफगानिस्तान सरकार ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। चर्चा के बाद हालांकि तीनों देशों ने यह कहा कि अगली बार ऐसी किसी बातचीत में वे अफगानिस्तान को भी शामिल करेंगे। 
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बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया, "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों  के तौर पर रूस और यूएन की प्रतिबंध वाली सूची से अफगान तालिबान का नाम हटवाने पर नरम रुख फिर से दोहराते हैं। काबुल और तालिबान के बीच शांतिपूर्ण वार्ता स्थापित करने में इन लोगों की भूमिका के मद्देनजर उन्हें यून की प्रतिबंधित सूची से हटाए जाने पर विचार किया गया है।'
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एक अंग्रेजी वेबसाइट में छपी खबर के मुताबिक, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में रूस के विश्लेषक नंदन उन्नीकृष्णन ने कहा, "भारत और रूस के बीच वर्तमान में बातचीत बहुत कम हो गई है। ऐसे में रूस का ये रुख संबंधों को और बिगाड़ सकता है।" भारत हाल ही में रूस से लगभग 6 खरब रुपयों की खरीद रक्षा सौदे में करने का ऐलान किया था। इसके बावजूद रूस के साथ उसके संबंधों में सुधार आने के संकेत नहीं मिल रहे हैं।

दांव पर भारत-रूस की दोस्ती?

Russia, China and Pakistan for flexible ties with Taliban
फाइल फोटो - फोटो : getty images

भारत की परेशानी इस बात को लेकर है कि अगर रूस और चीन इस रुख पर कायम रहे और अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इनके इस फैसले के खिलाफ वीटो नहीं करेगा, तो कुछ बड़े तालिबानी नेताओं का नाम यूएनएससी (UNSC) की प्रतिबंधित लिस्ट से बाहर कर दिया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम से भारत की परेशानी और बढ़ सकती है। क्योंकि, एक तरफ भारत को इस बैठक से दूर रखा गया तो दूसरी तरफ भारत शुरू से लेकर अबतक तालिबान को अफगानिस्तान में सबसे बड़ा खतरा मानता आया है। भारत के अलावा अफगान सरकार और अमेरिका भी तालिबान को इसी तरह देखते हैं।

चीन-पाकिस्तान-रूस की तिकड़ी मजबूत होती जा रही है। ऐसे में भारत को चौतरफा मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है । वैसे भी रूस की पाकिस्तान से बढ़ रही नजदीकियां भारत के लिए पहले से मुश्किलें खड़ी कर रहा है। फिर अगर ट्रंप अपने वादे के मुताबिक चीन की नकेल कसने में लगे तो दक्षिण चीन महासागर में दोनों देशों के बीच तकरार बढ़ेगा। फिर अमेरिका चीन को सबक सिखाने के लिए भारत की समुद्री सीमा का उपयोग करना चाहेगा। ऐसे में भारत और चीन की तनातनी बढ़ेगी।

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