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आरटीआई में खुलासा, बीते वित्त वर्ष में 18 सरकारी बैंकों में हुई 1.48 लाख करोड़ की धोखाधड़ी

Thu, 23 Jul 2020 06:59 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, इंदौर
पीटीआई, इंदौर Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 23 Jul 2020 06:59 PM IST
सार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बताया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में सार्वजनिक क्षेत्र के तत्कालीन 18 बैंकों की ओर से कुल 1,48,427.65 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 12,461 मामले सूचित किए गए हैं। मध्यप्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई (सूचना के अधिकार) कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने गुरुवार को को बताया कि रिजर्व बैंक ने उन्हें आरटीआई के तहत उन्हें यह जानकारी दी है।

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RTI reveals detail of frauds committed in 18 state owned banks in the last financial year in RTI
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

बैंकों में धोखाधड़ी के मामले पहले भी होते रहे हैं लेकिन कई नियमों और बदलाव के बाद भी आज भी बैंकें धोखाधड़ी के मामलों से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। अब इसे या तो बैंकों की लापरवाही कहें या किसी तरह की मिली भगत। दरअसल, हाल ही में एक बार फिर सरकारी बैंकों में हुई धोखाधड़ी को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। बीते 1 साल में सरकारी क्षेत्र के बैंकों से 1,48,427 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक ने आरटीआई एक्टिविस्ट चंद्रशेखर गौड़ की ओर से मांगी गई जानकारी के जवाब में यह आंकड़ा दिया है।

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केंद्रीय बैंक ने कहा कि तत्कालीन 18 बैंकों से धोखाधड़ी के कुल 12,461 केस दर्ज किए गए हैं। जिनमें 1.48 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम की धोखाधड़ी हुई है। आरबीआई की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, धोखाधड़ी के सबसे ज्यादा केस एसबीआई में दर्ज किए गए हैं। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक को धोखाधड़ी के मामलों से 44,612 की चपत लगी है। बैंक में धोखाधड़ी के कुल 6,964 मामले सामने आए हैं। 18 बैंकों में सामने आए सभी फ्रॉड केस को अनुपात में देखें तो अकेले एसबीआई को ही 30 फीसदी की चपत लगी है।
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आरटीआई के तहत शेष आठ अन्य बैंकों की जानकारी कुछ इस तरह 
इस तरह शेष अन्य बैंकों की बात करें तो आरटीआई के तहत बताया गया कि सिंडिकेट बैंक में 438 मामलों में 4,999 करोड़ रुपए, कॉरपोशन बैंक ने 125 मामलों में 4,816 करोड़ रुपए, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 900 मामलों में 3,993 करोड़ रुपए, आंध्र बैंक ने 115 मामलों में 3,462 करोड़ रुपए, बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने 413 मामलों में 3,391 करोड़ रुपए, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया ने 87 मामलों में 2,679 करोड़ रुपए, इंडियन बैंक ने 225 मामलों में 2254 करोड़ रुपए और पंजाब एंड सिंध बैंक ने 67 मामलों में 397 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की जानकारी दी है।
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अब घटकर 12 ही रह गए हैं सरकारी बैंक
गौरतलब है कि पिछले साल के मुकाबले अब बैंकों की संख्या 12 ही रह गई है। बीते साल कुल 18 सरकारी बैंक थे लेकिन 1 अप्रैल से 10 बैंकों का आपस में विलय हुआ है और 4 नए बैंक अस्तित्व में आए हैं। इसके चलते अब देश में बैंकों की संख्या 12 ही रह गई है। यही नहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार कुछ अन्य बैंकों के निजीकरण की योजना बना रही है और देश में सरकारी बैंकों की संख्या 5 तक ही सीमित रखने पर विचार किया जा रहा है।

18 बैंकों में यह हैं टॉप 10 बैंकें, एसबीआई सबसे ऊपर

एसबीआई 
6,464 मामले, 44,612 करोड़ धोखाधड़ी

पंजाब नेशनल बैंक 
6,964 मामले, 15,354 करोड़ धोखाधड़ी

यूको बैंक 
119 मामले, 5,384 करोड़ धोखाधड़ी

इंडियन ओवरसीज बैंक 
207 मामले, 7,275.48 करोड़ धोखाधड़ी

बैंक ऑफ इंडिया 
200 मामले, 8,069 करोड़ धोखाधड़ी

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 
424 मामले, 9,316 करोड़ धोखाधड़ी

इलाहाबाद बैंक 
896 मामले, 6,973 करोड़ धोखाधड़ी

बैंक ऑफ बड़ौदा 
349 मामले, 12,586 करोड़ धोखाधड़ी

ओरिएंटल बैंक 
329 मामले, 5,340 करोड़ धोखाधड़ी

केनरा बैंक 
208 मामले, 7519.30 करोड़ धोखाधड़ी

(रिजर्व बैंक के अनुसार)

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