स्वदेशी जागरण मंच ने पीएम को लिखा पत्र, अधिकारियों को हुवावे कांफ्रेस में जाने से रोकने को कहा
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इकाई स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। जिसमें उनका कहना है कि दूरसंचार विभाग के अधिकारियों को हुवावे की कॉन्फ्रेंस में शामिल होने से रोका जाए। यदि वह इसमें हिस्सा लेते हैं तो वह सेवाओं का अनादर करेंगे। एसजेएम ने प्रधानमंत्री से स्वदेशी तकनीक पर भरोसा करने का आग्रह किया है। उसने चीनी कंपनी के साथ साझेदारी करने पर सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की।
आरएसएस की आर्थिक शाखा एसजेएम भाजपा की वैचारिक गुरु है। वह चीन के साथ व्यापार संबंधों को विनियमित करने पर जोर दे रहा है। उसने यह सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है कि हुवावे द्वारा प्रायोजित 5जी सम्मेलन में भाग लेने के लिए संचार अधिकारियों को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि यह पहले से ही शक के घेरे में है। कंपनी अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों में प्रतिबंध का सामना कर रही है।
RSS affiliate Swadeshi Jagran Manch,has written to PM Modi, state, "Various officials at GoI flouting Central Civil Services Code of Conduct rules by attending a 5G conference by Chinese telecom company Huawei in Aug. Huawei faces outright bans in many countries including the US"
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) July 31, 2019
एसजेएम के राष्ट्रीय समन्वयक अश्विनी महाजन ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखते हुए कहा, 'केंद्रीय सिविल सेवा आचरण के नियमों के लिए आवश्यक मानदंडों में अधिकारियों को भारत की सुरक्षा और अखंडता की रक्षा करना शामिल है। दूरसंचार विभाग के उच्च अधिकारी एक कांफ्रेस में शामिल हो रहे है जिसे हुवावे अन्य चीनी कंपनियों के साथ मिलकर प्रायोजित कर रही है। हुवावे को कई देशों में प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। भारत में भी हुवावे की कार्यप्रणाली पारदर्शी नहीं हैं। इसकी अभी तक गहनता से जांच नहीं की गई है।'
एसजेएम ने चीनी कंपनियों को भारत में प्रवेश करने की अनुमति देने के खिलाफ चेतावनी दी है। एसजेएम ने पत्र में कहा, 'भारत के दूरसंचार क्षेत्र में चीनी प्रभुत्व बहुत हानिकारक है। यह न केवल सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा है, बल्कि हमारे स्वदेशी उद्योगपतियों के लिए अवसरों को भी खत्म कर रहा है। भारत को इस पर कड़ा रुख अपनाने की आवश्यकता है।' महाजन ने कहा कि तत्कालीन दूरसंचार सचिव अरुणा सुंदरराजन ने पिछले महीने आश्वासन दिया था कि दूरसंचार विभाग चीनी कंपनी के साथ कोई साझेदारी नहीं करेगा। साझेदारी की अनुमति तब दी जाएगी जब यह सुनिश्चित हो जाएगा कि इससे देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा।