{"_id":"5e24c5148ebc3e4ade212394","slug":"rss-wants-to-implementation-of-population-policy-anti-conversion-law-and-uniform-civil-code","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"जनसंख्या नीति, धर्मांतरण विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता लागू कराने पर संघ की नजर","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
जनसंख्या नीति, धर्मांतरण विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता लागू कराने पर संघ की नजर
Mon, 20 Jan 2020 02:37 AM IST
आसिम खान
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Mon, 20 Jan 2020 02:37 AM IST
सार
- तीन अहम एजेंडे को इसी साल पूरा करना चाहता है संघ
- इसके लिए देशव्यापी माहौल खड़ा करने में जुटा संघ
- सीएए के विरोध से बेपरवाह वर्तमान माहौल को पक्ष में मानता है संघ
विज्ञापन
मोहन भागवत (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भले ही नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर देश की राजनीति में घमासान मचा हो, मगर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ इसी साल अपने तीन एजेंडे को हर हाल में पूरा करना चाहता है। संघ की इच्छा इसी साल हर हाल में धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता और राष्ट्रीय जनसंख्या नीति लागू करने की है।
विज्ञापन
संघ का मानना है कि भले ही सीएए, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर पर घमसान दिखता हो, मगर देश का बहुसंख्यक इसके पक्ष में है। दरअसल बीते साल संघ के तीन अहम एजेंड को मोदी सरकार ने अमली जामा पहनाया।
विज्ञापन
अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद सरकार ने सीएए बनाया। बीते साल ही सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में फैसला दिया। अब इस साल संघ की योजना हिंदुत्व से जुड़े तीन मुद्दों को हर हाल में अमली जामा पहनाने की है।
विज्ञापन
संघ वर्तमान माहौल को इन मुद्दों के पक्ष में मानता है। संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता और राष्ट्रीय जनसंख्या नीति हिंदुत्व से नहीं बल्कि बेहतर राष्ट्र के निर्माण और राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
उक्त पदाधिकारी के मुताबिक भले ही सीएए के देश के कई हिस्सों में विरोध हो रहा है, मगर बहुसंख्यक लोग इसके पक्ष में हैं। देश में नौजवानों की आबादी 70 फीसदी है और यह आबादी नहीं चाहती कि बेहतर राष्ट्र और मजबूत राष्ट्र के निर्माण के लिए जिस एजेंडे को पहले ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, उसे लागू करने में और देरी हो।
संघ लगातार बना रहा है माहौल
दरअसल वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की दोबारा जीत के बाद से ही संघ लगातार इन मुद्दों के पक्ष में देश में माहौल खड़ा कर रहा है। वर्तमान में संघ प्रमुख मोहन भागवत की लगातार नई राष्ट्रीय जनसंख्या नीति बनाने की मांग करना इसी रणनीति का हिस्सा है।
इससे पहले संघ ने अनुच्छेद 370 के खिलाफ और सीएए, एनआरसी के पक्ष में लगातार माहौल बनाया। इस समय सीएए के पक्ष में संघ लगातार प्रबुद्घ लोगों से संपर्क करने के अलावा कई तरह के कार्यक्रम कर रहा है। संघ सूत्रों का कहना है कि इस साल संघ उपरोक्त तीन एजेंडे के पक्ष में लगातार और खुल कर अभियान चलाएगा।
राज्यों से शुरू होगा अभियान
जनसंख्या नियंत्रण पर बहस और नई राष्ट्रीय जनसंख्या नीति तैयार करने के पक्ष में माहौल बनाने के लिए भाजपाशासित राज्य की ओर से पहल भी हुई है। असम ने दो से अधिक बच्चे पैदा करने वाले परिवारों को सरकारी नौकरी और योजनाओं का लाभ लेने के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया है।
संघ चाहता है कि भाजपाशासित अन्य राज्य भी चरणबद्घ तरीके से इस एजेंडे को आगे बढ़ाएं। इसके बाद केंद्र सरकार मजबूती से इसके पक्ष में कदम उठाए।
इससे पहले संघ ने अनुच्छेद 370 के खिलाफ और सीएए, एनआरसी के पक्ष में लगातार माहौल बनाया। इस समय सीएए के पक्ष में संघ लगातार प्रबुद्घ लोगों से संपर्क करने के अलावा कई तरह के कार्यक्रम कर रहा है। संघ सूत्रों का कहना है कि इस साल संघ उपरोक्त तीन एजेंडे के पक्ष में लगातार और खुल कर अभियान चलाएगा।
राज्यों से शुरू होगा अभियान
जनसंख्या नियंत्रण पर बहस और नई राष्ट्रीय जनसंख्या नीति तैयार करने के पक्ष में माहौल बनाने के लिए भाजपाशासित राज्य की ओर से पहल भी हुई है। असम ने दो से अधिक बच्चे पैदा करने वाले परिवारों को सरकारी नौकरी और योजनाओं का लाभ लेने के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया है।
संघ चाहता है कि भाजपाशासित अन्य राज्य भी चरणबद्घ तरीके से इस एजेंडे को आगे बढ़ाएं। इसके बाद केंद्र सरकार मजबूती से इसके पक्ष में कदम उठाए।