जोशी ने कभी राष्ट्रगान, राष्ट्र ध्वज बदलने की बात नहीं कही : संघ
- संघ प्रवक्ता ने दी सफाई, जोशी ने कभी राष्ट्रगान या ध्वज बदलने की बात नहीं की
- कहा, वह सिर्फ राज्य और राष्ट्र की शक्ति के बीच अंतर की बात कर रहे थे
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (संघ) ने कहा कि भैयाजी जोशी ने राष्ट्रगान और ध्वज में बदलाव करने की कोई बात नहीं कही। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (संघ) ने कहा कि भैयाजी जोशी जब वंदे मातरम को भारत की सांस्कृतिक पहचान और केसरिया ध्वज को प्राचीन संस्कृति का प्रतीक बताने के दौरान राष्ट्रगान और ध्वज में बदलाव करने की कोई बात नहीं कही।
वह सिर्फ राज्य और राष्ट्र की शक्ति के बीच अंतर की बात कर रहे थे। संघ के प्रवक्ता मनमोहन वैद्य ने कहा, ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी राज्य और राष्ट्र के बीच अंतर को समझा रहे थे।
कहीं भी उन्होंने राष्ट्रगान या राष्ट्रीय ध्वज को बदलने की बात नहीं कही।’ वैद्य के अनुसार जोशी ने कहा था, ‘1947 में संविधान सभा ने ‘तिरंगे’ को राज्य के ध्वज के तौर पर स्वीकार किया और बाद में यह भारत के गणतंत्र में बरकरार रखा गया। यह अनिवार्य है कि भारत का प्रत्येक व्यक्ति इस ‘प्रतीक’ का सम्मान करे।
अति प्राचीनकाल से भारत के लोग केसरिया ध्वज का आदर प्राचीन संस्कृति के प्रतीक के तौर पर करते आ रहे हैं। हम दोनों ध्वजों का सम्मान करते हैं। हम तिरंगे को राज्य के ध्वज के रूप में और केसरिया झंडे का हमारी प्राचीन संस्कृति के प्रतीक के तौर पर सम्मान करते हैं।’
'सब को राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का बराबर सम्मान करना चाहिए'
इसी प्रकार, एक तरफ जहां ‘जन-गण-मन’ राज्य के विचारों का वर्णन करता है वहीं ‘वंदे मातरम’ हमारी सांस्कृतिक पहचान और उसके प्रति हमारे लगाव को दर्शाता है।
सभी को राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का बराबर आदर और सम्मान करना चाहिए। शुक्रवार को जोशी ने दीनदयाल उपाध्याय रिसर्च इंस्टीट्यूट में कहा था, ‘जन गण मन' संविधान द्वारा निर्णीत राष्ट्रगान है।
अगर कोई वास्तविक अर्थ पर विचार करे तो वंदे मातरम राष्ट्रगान है।’ उन्होंने कहा था, ‘जन गण मन’ में राष्ट्र को ध्यान में रखते हुए भावना व्यक्त की गई है। हालांकि, ‘वंदे मातरम’ में देश के चरित्र और शैली को ध्यान में रखते हुए भावनाएं व्यक्त की गई हैं। वंदे मातरम और जन गण मन में यही अंतर है। दोनों का आदर किया जाना चाहिए।’