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संघ संगठनों ने केंद्र की आर्थिक नीति को दिखाया आइना
एम संजय, नई दिल्ली
Updated Thu, 28 Jul 2016 02:50 AM IST
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तेज आर्थिक विकास की मिशाल देकर सरकार बेशक देश-दुनिया में अपनी पीठ थपथपा रही है। लेकिन संघ के अपने संगठनों ने सरकार की आर्थिक नीति को आईना दिखाया है। आर्थिक क्षेत्र से जुड़े संघ संगठनों ने देश में बढ़ रही बेरोजगारी और अपराध के मामले को लेकर सरकार को घेरा है। साथ ही इन संगठनों ने सरकार को उपाय भी सुझाए हैं।
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जिससे की चुनौतियों पर काबू पाई जा सकती हैं। सूत्र बताते हैं कि भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के प्रतिनिधि ने बैठक में श्रम सुधारों के विरोध के साथ बेरोजगारी की समस्या से सरकार को अवगत कराया है। बीएमएस के प्रतिनिधि ने कहा कि सरकार के प्रयास से देश में कंपनियां तो आ रही हैं। मगर ये पूंजी गहन (केपिटल इनटेंसिव) वाली कंपनियां हैं। जिसमें रूपया तो ढ़ेरों खर्च होता है।
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लेकिन रोजगार के अवसर पैदा नहीं होते हैं। बीएमएस ने सरकार से श्रम गहन (रोजगारपरक) कंपनियों को देश में बढ़ावा देने की अपील की। उसने मजदूरों के शोषण करने वाली नीतियों को बंद करने की मांग के साथ लंबे अरसे से लंबित अपनी 10 सूत्रीय मांग को जल्द लागू करने की मांग की है। तो संघ के दूसरे संगठन भरतीय किसान संघ ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर नहीं बढ़ रहे हैं।
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जिसके वजह से देश के ग्रामीण इलाकों में अपराध की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। किसान संघ ने कहा है कि किसानों की हालत तभी सुधर सकती है जब गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसलिए गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान केंद्रीत करने की जरूरत है। लघु उद्योग भारती ने छोटे और मझौले उद्योगों की हो रही अनदेखी का मुद्दा उठाया। उसका कहना है कि लघु उद्योग में रोजगार सृजन की सबसे ज्यादा संभावना है।
लघु उद्योग और कृषि क्षेत्र की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। मैनुफैक्चरींग और सेवा दोनों ही क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने को कहा है। तो स्वदेशी जागरण मंच ने सरकार की आयात-निर्यात नीति के साथ विदेशी सीमा निवेश की बढ़ोत्तरी का मामला रखा। संघ संगठनों ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, टेक्सटाईल और फूटवियर उद्योग पर ध्यान दें।
इसमें रोजगार की संभावनाएं ज्यादा हैं। सरकार के साथ हुई संघ के अर्थिक क्षेत्र के संगठनों की समन्वय बैठक में मंगलवार को संघ संगठनों ने रोजगार बढ़ाने और कौशल विकास के लिए अपनी राय देते हुए कहा कि गांव की जवानी और गांव का पानी गांव में ही रहना चाहिये। गांव गांव में छोटे छोटे उत्पाद यूनिट (आटे की चक्की, गुड़ बनाने की यूनिट) शुरू की जायें। इनको प्रोत्साहन देने के लिये अगर बड़ी यूनिट बंद करनी पड़े तो सरकार कदम उठाये।
पहले से काम कर रहे मिस्त्री, कारपेंटर, मोची, प्लबंर, नाई जैसे छोटे छोटे रोजगार करने वाले लोगों के लिये भी सरकार 2 से 4 दिन का प्रशिक्षण शिविर लगाकर उनको सर्टिफाइड करे। बताया जा रहा है कि सरकार के मंत्रियों ने इन बिन्दुओं पर जल्द ही अमल करने का आश्वासन संघ संगठनों को दिया है।
संघ और सरकार के इस समन्वय बैठक में संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह,अरूण जेटली, निर्मला सितारमन, राधा मोहन सिंह और कलराज मिश्र के अलावा स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ और लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधि बैठक में शामिल थे।