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'नहीं होगा कोई बदलाव, कृष्ण गोपाल ही देखेंगे भाजपा का कामकाज'

Fri, 08 Jul 2016 09:15 AM IST
एम संजय/अमर उजाला, नई दिल्ली
एम संजय/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 08 Jul 2016 09:15 AM IST
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RSS joint general secretary Krishna Gopal

संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल भाजपा का कामकाज देखते रहेंगे। मोदी मंत्रिमंडल में हुए बड़े फेरबदल के बाद संघ में भी बदलाव के कयास लगाए जाने लगे हैं। सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल से भाजपा का कामकाज वापस लेकर दूसरे सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी को सौंपने की चर्चाएं सियासी गलियारे में तेज हैं।

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मगर संघ ने इन चर्चाओं को खारिज किया है। नागपुर में चल रही योजक बैठक में शामिल संघ के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि कृष्ण गोपाल के कामकाज में कोई बदलाव नहीं होगा। दरअसल गोपाल से पहले सोनी ही संघ की ओर से भाजपा का कामकाज देखते थे। लेकिन अस्वस्थता की वजह से वे एक साल के अध्ययन अवकाश पर चले गए थे।
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बीते वर्ष जुलाई में नैनीताल में हुई प्रांत प्रचारकों की बैठक में सोनी ने एक साल का शैक्षणिक अवकाश लिया था। तब संघ ने सह सरकार्यवाह का उनका दायित्व बरकरार रखते हुए उन्हें एक साल का अवकाश प्रदान किया था। अब अवकाश पूरा होने के बाद सोनी ने संघ नेतृत्व को कामकाज पर लौटने के संकेत दिए हैं।
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सियासी गलियारों में उनकी वापसी को कृष्ण गोपाल से कामकाज छिनने के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। लेकिन संघ के कई शीर्ष पदाधिकारियों ने इस प्रचार को गलत करार दिया है। 

बताया जा रहा है कि कानपुर में 14 से 15 जुलाई के बीच होने वाली प्रांत प्रचारकों की बैठक में सोनी को वही कामकाज सौंपा जाएगा जोकि अवकाश पर जाने से पहले उनके जिम्मे था। अवकाश पर जाने से पहले सोनी के पास शैक्षिक जगत में कार्य कर रहे संघ के संगठनों की देखरेख का जिम्मा था। उन्हें शैक्षिक जगत के कार्यों से ही जोड़ा जाएगा। वैसे उनकी रुचि भी अध्ययन और लेखन में ज्यादा रही है। 

श्रुति और पुराणों को सोनी ने दिया नया कलेवर 
अपने शैक्षिक अवकाश के दौरान सोनी ने अधिकांश समय श्रुति, पुराण और उपनिषदों को नया कलेवर देने में लगाया है। हिंदू धर्म के इन ग्रंथों को उन्होंने वर्तमान समय के साथ जोड़ा है। उनके इस कार्य को लेकर संघ में उन्हें मिसाल के रूप में गिनाया जा रहा है।

वैसे सोनी ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने मोदी को पीएम उम्मीदवार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। भाजपा में उनका दबदबा काफी है। मोदी के अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, अरुण जेटली सरीखे नेताओं से उनके संबंध बडे़ सुगम हैं।

मगर लाल कृष्ण आडवाणी की तरफ से उनकी कार्यशैली के विरोध और तमाम विवादों में नाम घसीटे जाने की वजह से संघ ने उनसे भाजपा का दायित्व लेकर कृष्ण गोपाल को थमाया था। इस बीच वह अस्वस्थ होने के बाद अध्ययन अवकाश पर चले गए। 

भाजपा के कामकाज से गोपाल को हटाने की हवा क्यों 

RSS joint general secretary Krishna Gopal

डेढ़ वर्ष के भीतर ही कृष्ण गोपाल को भाजपा के कामकाज से हटाने की चर्चाओं ने अचानक जोर पकड़ा है। इसकी खास वजह यह मानी जा रही है कि गोपाल अब तक पार्टी नेताओं पर अपनी व्यक्तिगत पकड़ नहीं बना पाए हैं, जैसा कि सोनी के मामले में था।

बल्कि दायित्व मिलने के बाद फैसलों में उन्होंने सामूहिकता को तरजीह दी है। सरकार के कामकाज में संघ ने सरकार्यवाह भैय्या जी जोशी और सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले को भी उनके साथ जोड़ रखा है। अनौपचारिक रूप से सरकार के मंत्रालयों को 10 के समूह में दोनों के बीच बांटा गया है।

नागपुर में जमा संघ का शीर्ष नेतृत्व
अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों के कामकाज में गुणवत्ता बरकरार रखने की कवायद में संघ का जोर भी प्रशिक्षण पर है। बीस वर्ष से ज्यादा समय तक प्रचारक रह चुके शीर्ष प्रचारकों का 3 जुलाई से नागपुर में चल रहा विशेष प्रशिक्षण वर्ग बृहस्पतिवार को संपन्न हुआ। इसका नाम योजक वर्ग रखा गया है।

इस वर्ग की वजह से संघ के सभी शीर्ष पदाधिकारी 3 जुलाई से नागपुर में ही जमे हुए हैं। कृष्ण गोपाल शुक्रवार 8 जुलाई को दिल्ली लौट रहे हैं। दो दिन यहां रहने के बाद वे प्रांत प्रचारकों की बैठक के लिए कानपुर रवाना होंगे। कानपुर में 11 जुलाई से 13 जुलाई तक प्रांत प्रचारकों का प्रशिक्षण वर्ग होगा। उसके बाद 14 -15 जुलाई को प्रांत प्रचारकों की बैठक होगी। 

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