आखिर आरएसएस की छवि पर किसने बट्टा लगाया?
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को इसकी गहरी पीड़ा है। नागपुर संघ मुख्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की सोशल मीडिया पर फर्जी फोटो ने शांत और गंभीर प्रकृति के भागवत को विचलित कर दिया और उन्होंने तत्काल इस पर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा। बताते हैं भागवत के कड़े रुख के बाद सर सह कार्यवाह मनमोहन वैद्य ने इसे विघटनकारी तत्वों की साजिश करार दिया और कड़ी निंदा की।
क्या है फोटो में
पूर्व उप राष्ट्रपति नागपुर संघ मुख्यालय गए। वहां की परंपरा के अनुसार उन्होंने अपनी भूमिका को अपने मानदंडों के आधार पर निभाया। संघ की परंपरागत प्रार्थना में प्रणब दा ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने न तो संघ की टोपी पहनी थी और न ही संघ की मुद्रा में खड़े होकर प्रार्थना में शरीक हुए।
राजनीति में अपनी शानदार छवि बनाने वाले प्रणब दा पोशाक में धोती, कुर्ता और काले रंग की जैकेट पहने थे। अपनी पूरी ठसक के साथ सावधान मुद्रा में खड़े रहे। लेकिन जो तस्वीर वायरल हुई है, उसमें प्रणब दा के सिर पर संघ की टोपी है। वह संघ की प्रर्थना में खड़े होने की मुद्रा में हैं और संघ की विचारधारा से जुड़े लोगों ने इस तस्वीर को हाथों हाथ लिया है।
आखिर किसने लगाया संघ की छवि पर बट्टा
संघ की छवि पर किसने बट्टा लगाया? सूत्र बताते हैं आरएसएस इस फर्जी तस्वीर को पचा नहीं पा रहा है। वह इस तरह की फैब्रिकेटेड तस्वीर तैयार और पोस्ट करने वाले का पूरा ब्यौरा चाहता है। समझा जा रहा है कि आरएसएस ने इस संदर्भ में जांच किए जाने की मंशा जाहिर की है।
दरअसल, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मेहमान थे। संघ एक रचनात्मक संगठन है। प्रणब मुखर्जी के वहां जाने से कांग्रेस पार्टी भी काफी असहज महसूस कर रही थी। कांग्रेस की असहजता के कारण प्रणब के नागपुर जाने की खबर देश और दुनिया के स्तर पर काफी प्रचारित हुई। ऐसे उनकी छवि से खिलवाड़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छवि के लिए धक्का है।
प्रणब दा बने महान
पूर्व राष्ट्रपति के संघ मुख्यालय जाने के निर्णय की राजनीति से जुड़े लोगों ने चाहे जितनी आलोचना की हो, लेकिन प्रणब दा ने सबको आईना दिखा दिया। संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में अपनी बात रखी और प्रणब दा ने भारतीय लोकतंत्र को समझाया। हिंसा, घृणा, धर्म और जाति की विभाजनकारी राजनीति और समाज घातक बताया।
प्रणब मुखर्जी के वहां जाने, उन्हें आमंत्रण देने और आमंत्रण स्वीकार कराने के प्रयास तथा प्रणब मुखर्जी को इस कार्यक्रम का मुख्य अतिथि और वक्ता बनाने के लिए संघ प्रमुख के निर्णय की काफी तारीफ हो रही है। हालांकि राजनीतिक दृष्टि से इसे दूसरे नजरिए से देखा जा रहा है।
कांग्रेस का एक धड़ा अब भी मान रहा है कि प्रणब मुखर्जी के नागपुर जाने से आरएसएस की स्वीकार्यता बढ़ेगी। हिन्दुत्व और इसके प्रति कट्टरता से भरे उसके विचारों को देश में जगह बनाने में आसानी होगी। इसके लिए कांग्रेस के नेता तर्क भी देते हैं।
पार्टी के पूर्व महासचिव कहते हैं कि जय प्रकाश नारायण द्वारा 70 के दशक में जनसंघ को अपने आंदोलन में जगह देने के कारण बाद के वर्षो में जनसंघ से लोगों का राजनीतिक छुआछूत खत्म हो गया था। वह मानते हैं प्रणब दा के वहां जाने का कुछ ऐसा ही लाभ आने वाले दिनों में संघ को होने वाला है।