NCP के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनेंगे RSS प्रमुख मोहन भागवत, शुरू हुआ बवाल
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शरद पवार की पार्टी एनसीपी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा का पुरजोर विरोध करती है। खुद एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार संघ और बीजेपी के खिलाफ बोलते हैं। लेकिन, उन्हीं की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे की पुत्री अदिति तटकरे ने एक कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। इस पर पार्टी में ही बवाल शुरू हो गया है।
अदिति ने 31 मार्च को रायगढ़ किले पर शिवपुण्यतिथि कार्यक्रम का आयोजन किया है जिसमें भागवत के साथ बीजेपी के राज्य मंत्री रविंद्र चव्हाण को भी निमंत्रित किया गया है।
शिवपुण्यतिथि कार्यक्रम के लिए छपी निमंत्रण पत्रिका में मुख्य अतिथि मोहन भागवत के साथ पूजनीय शब्द का उल्लेख किया गया है। पवार से लेकर एनसीपी के नेता संघ की विचारधारा को लेकर लगातार निशाना साधते रहते हैं। इसलिए एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष की पुत्री का कार्यक्रम चर्चा का विषय बन गया।
बता दें कि इससे पहले पिछले वर्ष सुनील तटकरे ने अपने एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को निमंत्रण दिया था। तब भी विवाद हुआ था। उसके बाद शरद पवार ने नेताओं से बीजेपी मंत्रियों और नेताओं के साथ मंच साझा करने से बचने की सलाह दी थी। उसके बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा था कि एनसीपी नेताओं को मुख्यमंत्री और बीजेपी के मंत्रियों को किसी कार्यक्रम में नहीं बुलाना चाहिए।
भागवत के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश
जोधपुर की अनुसूचित जाति जनजाति मामलात अदालत के पीठासीन अधिकारी मधुसूदन शर्मा की अदालत में मोहन भागवत के खिलाफ परिवाद पेश किया गया है।
परिवादी नरेंद्र कुमार ने अधिवक्ता डीआर मेघवाल के जरिए परिवाद पेश किया है। अधिवक्ता मेघवाल ने बताया है कि कोर्ट ने परिवाद में मुकदमा दर्ज करने के लिए उदय मंदिर थाने को भेज दिया है।
परिवाद में एससी एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के अलावा सपठित 124-क, 121क, 153क, 295क, 505 आईपीसी के तहत परिवाद पेश किया था। जिसमें आरोप था कि कुछ दिनों पूर्व सोशल मीडिया पर ट्विटर अकाउंट पर एक लिखित में डाली पोस्ट में अब सभी हिंदू विरोधी और देश द्रोहियों की मूर्ति ध्वस्त की जाएगी चाहे गांधी की हो या नेहरू की, अंबेडकर की हो या पेरियार की।
परिवादी ने आरोप लगाया है कि इससे हमारी भावनाएं आहत हुई हैं इस प्रकार से देश के महानतम महापुरुषों एवं भारतीय संविधान के निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर का अनादर एवं अपमान किया गया है।