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RSS: मोहन भागवत बोले- एक व्यक्ति के कारण नहीं सामूहिक प्रयासों से मिली आजादी, 1857 में शुरू हुए प्रयास

Sat, 07 Jun 2025 10:38 PM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 07 Jun 2025 10:38 PM IST
सार

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस धारणा को खारिज कर दिया कि कोई एक संस्था भारत की आजादी का श्रेय ले सकती है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों से आजादी की लड़ाई 1857 में शुरू हुई थी, जिसके बाद पूरे देश में स्वतंत्रता संग्राम की लपटें भड़क उठीं और यह आग फिर कभी शांत नहीं हुई। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के नहीं, बल्कि सभी के सामूहिक प्रयासों से हमें आजादी मिली। 

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RSS chief Mohan Bhagwat says independence achieved not due to one person but collective efforts
संघ प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश को आजादी किसके प्रयासों से मिली, इस पर हमेशा बहस होती है। लेकिन वास्तविकता यह है कि आजादी किसी एक व्यक्ति के कारण नहीं, बल्कि सभी के सामूहिक प्रयासों से मिली। यह बात उन्होंने नागपुर में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान कही। 

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मोहन भागवत ने आगे कहा कि देश की आजादी के लिए प्रयास 1857 में शुरू हुए थे, जिसके बाद पूरे देश में स्वतंत्रता संग्राम की लपटें भड़क उठीं और यह आग फिर कभी शांत नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आजादी के लिए प्रयास जारी रहे और सभी के सामूहिक प्रयासों से हमें आजादी मिली।
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बिना नाम लिए विपक्ष पर साधा निशाना
मोहन भागवत ने कहा कि अंग्रेजों से भारत की आजादी की महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए कोई भी सिंगल इकाई श्रेय लेने का दावा नहीं कर सकती है, क्योंकि ये असंख्य व्यक्तियों और समूहों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए इस धारणा को खारिज कर दिया कि कोई एक संस्था भारत की आजादी का श्रेय ले सकती है। 

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आरएसएस की भूमिका और सिद्धांत को विस्तार से बताया
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कार्यक्रम के दौरान आरएसएस की भूमिका और सिद्धांत को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग इसकी अच्छाइयों और खामियों के बारे में बात करते हैं, वे शायद इसके बारे में ठीक से नहीं जानते हैं। उन्होंने कहा, 'जो लोग हमारे संगठन को समझने के लिए समय निकालते हैं, वे अक्सर कहते हैं कि वे बहुत प्रभावित हुए हैं और उन्होंने बहुत कुछ सीखा है।' उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस को ताकत अपने समर्पित स्वयंसेवकों के बलिदान से मिलती है, जो सामूहिक रूप से फैसले लेते हैं। 


आरएससए के बारे में फैली गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास किया
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरएसएस के बारे में फैली गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि संघ में किसी एक व्यक्ति की वाहवाही नहीं होती, बल्कि सदस्यों के सामूहिक प्रयास महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस में सबसे बड़ा पद एख साधारण स्वयंसेवक का होता है। 

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स्वयंसेवकों को निस्वार्थ सेवा के लिए प्रोत्साहित किया
मोहन भागवत ने कहा कि निस्वार्थ सेवा ही प्रत्येक स्वयंसेवक का सबसे बड़ा लक्ष्य है। वह अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करते हैं और यही आरएसएस का असली काम है। उन्होंने कहा कि दूसरों की मदद करने में ही सच्ची खुशी मिलती है। इस दौरान संघ प्रमुख ने स्वयंसेवकों को अपने संपर्क बढ़ाने और निस्वार्थ सेवा में शामिल होने लिए प्रोत्साहित किया। 

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