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संघ प्रमुख मोहन भागवत एक परंपरा और तोड़ेंगे, धर्म संसद की बैठक में पहली बार होंगे शामिल

Thu, 03 Jan 2019 02:07 PM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: शशिधर पाठक Updated Thu, 03 Jan 2019 02:07 PM IST
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rss chief Mohan Bhagwat break tradition going participate first time in Dharma Parishad kumbh
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत एक परंपरा और तोड़ेंगे। वह 31 जनवरी 2019 को प्रयागराज कुंभ में आयोजित धर्म संसद की बैठक में हिस्सा लेंगे। यह पहला अवसर होगा, जब संघ की स्थापना के बाद उसके इतिहास में पहली बार सर संघचालक धर्म संसद की बैठक में मौजूद रहेंगे।

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संघ के एक अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार मोहन भागवत ने धर्म संसद में हिस्सा लेने के लिए अपनी अनुमति दे दी है। धर्म संसद की यह बैठक 31 जनवरी और एक फरवरी तक चलेगी। इस बैठक में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर अहम चर्चा होगी। 
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विश्व हिन्दू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को धर्म संसद की बैठक पर छोड़ दिया है। इस बैठक में रामजन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास समेत अनेक साधु संत के उपस्थित रहने की संभावना है। माना जा रहा है कि इस बैठक में संघ प्रमुख केन्द्र सरकार की संवैधानिक बाध्यताओं का उल्लेख करते हुए साधु संत समाज से हिन्दुओं के हित और राम मंदिर आंदोलन को आगे बढ़ाने पर अपनी राय दे सकते हैं।

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विज्ञान भवन में पहला प्रयास


सर संघ चालक ने संघ की परंपरा से हटकर पहला प्रयास 2018 में विज्ञान भवन में किया था। संघ प्रमुख ने तीन दिन तक लगातार कार्यक्रम में हिस्सा लेकर संघ, संघ की विचारधारा, वर्तमान परिप्रेक्ष में प्रासंगिता समेत अन्य मुद्दों पर अपनी राय रखी थी। तीसरे दिन उन्होंने लोगों के सवालों का जवाब भी दिया था।



इस राष्ट्रीय स्तर की व्याख्यान माला और कार्यशाला में संघ प्रमुख ने गुरू गोलवरकर की पुस्तक बंच ऑफ थॉट्स के कुछ अंश में संशोधन पेश किए। उन्होंने अल्पसंख्यकों के बिना हिन्दुत्व की अवधारणा को अधूरा बताया था। यह भी संघ के इतिहास में पहली बार हुआ, जब संघ प्रमुख ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक का धर्म निरपेक्ष चेहरा दिखाने की कोशिश की। उनके इस विचार को लेकर संघ के अनुयाइयों में एक नई बहस छिड़ गई थी।

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