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कृषि कानून: आरएसएस से संबद्ध भारतीय किसान संघ ने जताई सुधार की जरूरत, कहा- किसानों को मिले हितकारी मूल्य
Thu, 19 Aug 2021 07:20 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Thu, 19 Aug 2021 07:20 PM IST
सार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने गुरुवार को केंद्र सरकार की ओर से लाए गए नए कृषि कानूनों पर आपत्ति जताई। इसके अलावा, आठ सितंबर को बीकेएस किसानों को उनकी उपज के 'हितकारी मूल्य' दिए जाने के लिए आठ सितंबर को राष्ट्रव्यापी आंदोलन भी करेगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पिक्साबे
विस्तार
केंद्र सरकार की ओर से लाए गए नए कृषि कानूनों का देश के किसानों का एक बड़ा वर्ग विरोध कर रहा है। लंबे समय से किसान इन कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। वहीं, केंद्र में सत्ताधारी भाजपा के वैचारिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध भारतीय किसान संघ ने भी इन कानूनों में सुधार की गुंजाइश जताई है। इसके अनुसार तीन नए कृषि कानूनों में एमएसपी या कृषि उत्पादों के लिए हितकारी मूल्य सुनिश्चित करने के बारे में कोई प्रावधान नहीं है।
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भारतीय किसान संघ ने कहा कि केंद्र सरकार या तो नया विधेयक लेकर आए या पिछले साल लाए गए कृषि-विपणन कानूनों में बदलाव करे और मुख्य कृषि उपजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के भुगतान के लिए नया प्रावधान जोड़े। बीकेएस के शीर्ष पदाधिकारी दिनेश कुलकर्णी ने एक प्रेसवार्ता में कहा कि किसानों को उनकी उपज का हितकारी मूल्य मिलना चाहिए जिससे वह कृषि संबंधी अपने खर्च पूरे कर सकें, जैसा वे वर्तमान व्यवस्था में नहीं कर पा रहे हैं।
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बीकेएस के अखिल भारतीय संगठन मंत्री कुलकर्णी ने कहा, 'हितकारी मूल्य वह है जो लाभ और उत्पादन की लागत मिलाकर होता है, जिसकी हम मांग कर रहे हैं। हितकारी मूल्य पाना किसानों का अधिकार है, जो सरकारों को उन्हें देना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'सरकार ने जिस एमएसपी का एलान किया है वह हितकारी मूल्य नहीं है। हालांकि, अगर वह ऐसा नहीं कर पा रही है तो भी उसे कम से कम घोषित एमएसपी देनी चाहिए और कानून में बदलाव का एलान करना चाहिए।'
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समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार इस सवाल कि वह केंद्र के कृषि विपणन नियमों के बारे में क्या सोचते हैं जिनके विरोध में किसान लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं, कुलकर्णी ने कहा कि इनमें सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'उदाहरण के तौर पर एक कृषि अदालत होनी चाहिए। इसी तरह कृषि क्षेत्र में आने वाली निजी कंपनियों का पंजीकरण होना चाहिए। जहां तक उपभोक्ताओं का संबंध है तो आवश्यक वस्तु अधिनियम में एक बहुत बड़ी खामी है।'