फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Rohini court accepts WhatsApp blue double-tick as receipt proof

पारिवारिक झगड़े में कोर्ट ने व्हाट्सएप के 'नीले डबल टिक' को माना सबूत

Thu, 18 May 2017 12:35 PM IST
amarujala.com-Presented by- अकरम
amarujala.com-Presented by- अकरम Updated Thu, 18 May 2017 12:35 PM IST
विज्ञापन
Rohini court accepts WhatsApp blue double-tick as receipt proof

पारिवारिक झगड़ों में अक्सर बचाव पक्ष नोटिस न सौंपे जाने को लेकर कई बहाने बनाता है। लेकिन पारिवारिक विवाद का एक अनोखा मामला सामने आया है जिसमें बचाव पक्ष को व्हाट्सएप पर नोटिस सौंपे गए और कोर्ट ने इसे मंजूर भी कर लिया। 

विज्ञापन


यह भी पढ़ें- जाधव को फांसी होगी या वतन आएगा सही सलामत, 3.30 बजे तक कोर्ट सुनाएगी फैसला
विज्ञापन

दरअसल, एक ससुर ने पारिवारिक विवाद में अपनी बहू, उसके मां-बाप और उसके दोस्तों को व्हाट्सएप पर नोटिस भेजा। जब मैसेज उनके फोन में पहुंचा तो उन्होंने इसपर क्लिक किया जिसकी वजह से ससुर के व्हाट्सएप में 'नीले डबल टिक' आ गए। ससुर ने इसका प्रिंटआउट निकलवाया और कोर्ट में बतौर सबूत जमा करवा दिया कि बचाव पक्ष को नोटिस सौंप दिए गए हैं। प्रिंटआउट को रोहिणी कोर्ट के सीनियर सिविल जज कम रेंट कंट्रोलर (नॉर्थ) सिद्धार्थ माथुर ने सबूत के तौर पर मंजूर कर लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें- दूल्हे को किडनैप करने वाली 'रिवॉल्वर रानी' को पुलिस ने धरा
6 मई को दिल्ली के मॉडल टाउन के एक निवासी ने सिविल कोर्ट में अपील दायर की थी कि उनके बेटे, बहू और बहू के मां-बाप और उसके दोस्तों को उनकी संपत्ति में अतिक्रमण करने से रोका जाए। इस पर कोर्ट ने उनसे कहा कि पांचों को नोटिस भेजें। लेकिन अभियोगी ने जवाब दिया कि इसमें समय लगेगा और इस बात की बहुत संभावना है कि नोटिस देने से पहले वे उनके घर में घुस जाएं।

हालांकि, इस पर कोर्ट ने उन्हें दूसरा तरीका बताया और कहा कि आप व्हाट्सएप के जरिए भी इन लोगों को नोटिस भेज सकते हैं। अभियोगी ने ऐसा ही किया और जब बचाव पक्ष के लोगों ने व्हाट्सएप में नोटिस देखा तो 'नीला डबल टिक' आ गया। जिसके बाद 'नीले डबल टिकट' का अभियोगी ने प्रिंटआउट कर लिया।

'कोर्ट ने कहा पिता ने अपने बेटे को नोटिस सौंप दिया है'

Rohini court accepts WhatsApp blue double-tick as receipt proof

कोर्ट ने अपने ऑर्डर में इस बात को शामिल किया कि पिता ने जनकपुरी में रहने वाले अपने बेटे को नोटिस सौंप दिया है। इसके बाद 8 मई को उन्होंने सारे नोटिस सौंपने की प्रिंटआउट कॉपी कोर्ट में जमा करा दी।

अपने आदेश में जस्टिस माथुर ने कहा कि मैंने रिकॉर्ड देखे मुकदमे वाली संप्ति अभियोगी पिता के नाम है और वह ही इसके एकमात्र मालिक हैं। उन्होंने कहा कि कानून की उचित प्रक्रिया के बिना बचाव पक्ष को अगली सुनवाई तक संपत्ति में जाने की इजाजत नहीं है। साथ ही जस्टिस माथुर ने कहा कि हालांकि, 1 से 4 नंबर तक के बचाव पक्ष को व्हाट्सएप के जरिए नोटिस सौंपे गए, लेकिन फिर भी मैं इसे उपयुक्त समझता हूँ कि उन्हें एक बार फिर से नोटिस सौंपा जाना चाहिए।

गौरतलब है कि 4 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही में व्हाट्सएप और ईमेल का उपयोग करने की अनुमति दी थी। जस्टिस राजीव सहाय इंडलॉ ने अभियोगी को व्हाट्सएप, टेक्सट या ईमेल के जरिए बचाव पक्ष को समन सौंपने की इजाजत दी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed