रामवृक्ष के ठिकाने से मिला अमेरिका में बना हुआ रॉकेट लॉन्चर
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जवाहर बाग में सफाई के दौरान एक राकेट लांचर मिला है। एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि इस पर राकेट लांचर मेड इन यूएसए लिखा हुआ है, लेकिन यह राकेट लांचर नहीं है। इसका इस्तेमाल बारूद और छर्रे मिलाकर छोड़ने के लिए किया गया होगा।
क्राइम ब्रांच इकट्ठा करेगी जवाहर बाग हिंसा के साक्ष्य
नवागंतुक पुलिस कप्तान ने क्राइम ब्रांच को भी जवाहर बाग हिंसा की जांच में लगाया है। नए एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि जांच टीम में डिप्टी एसपी, इंस्पेक्टर और दरोगा को शामिल किया गया है।
सभी वह अधिकारी लगाए गए हैं जो विवेचना के एक्सपर्ट माने जाते हैं। एसएसपी ने बताया कि एसपी सिटी को छोड़कर भागने की बात जो सामने आ रही है उसकी भी जांच कराई जा रही है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों से पूछता था, तुम्हें किसने दिया अधिकार
स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह के नाम पर जवाहर बाग कब्जा जमाने वाला रामवृक्ष यादव देश को लोकतांत्रिक नहीं मानता था। वह लोगों को बरगलाता कि ये आजादी नहीं है। ब्रिटिश हूकूमत ने भारत को छोड़ने का फैसला नेता सुभाष चंद्र बोस के दबाव में लिया था। नेताजी ने 1947 से पहले ही भारत को स्वतंत्र घोषित कर दिया था।
उनकी इस घोषणा का दुनिया के अनेक देशों ने समर्थन दिया था। इसमें जर्मनी, इटली और जापान सहित अनेक देश शामिल थे। नेता जी सुभाष चंद्र बोस द्वारा बनाया गया कानून ही इस देश का संविधान है।
उसी की मुद्रा होनी चाहिए। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सुप्रीमकोर्ट को कोई कुछ नहीं है। नेता जी ही देश के प्रथम नागरिक हैं। उन्हें गायब कर दिया गया है, अब उन्हें सामने लाना होगा। अधिकारी कार्रवाई को पहुंचते तो उनसे उनकी नागरिकता पूछता था। ये अधिकार तुम्हें किसने दिए हैं।
मथुरा में रामवृक्ष के छह से अधिक मददगार
जवाहर बाग के कब्जाधारियों के नेतृत्वकर्ता रामवृक्ष यादव के मददगार जनपद से बाहर के ही नहीं अंदर भी थे। उसके लिए कानूनी मदद, रसद तक का इंतजाम करते थे। आपरेशन जवाहर बाग से पहले जिला प्रशासन की घेराबंदी के बावजूद 400 लीटर से ज्यादा डीजल बाग के अंदर भेजा गया था। ऐसे छह से अधिक लोगों की जांच कराई जा रही है।
रामवृक्ष की आर्थिक ताकत के स्रोत की जानकारी जिला प्रशासन ने करीब डेढ़ वर्ष पहले ही कर ली थी। इसमें कन्नौज, बदायूं, झांसी सहित प्रदेश से बाहर के कई लोगों के नामों के साथ मथुरा के लोग भी थे। मथुरा शहर और अड़ीग सहित कुछ गांवों के लोगों का जवाहर बाग आना जाना शुरू हो गया था। यहां बैठकें होती थीं।
बताया जा रहा है कि रामवृक्ष को कानूनी सलाह मथुरा के लोगों से ही मिलने लगी। इस सलाह पर ही उसने न्याय पालिका का रुख किया। उसे स्थानीय स्तर पर रसद की भी आपूर्ति भी होती थी। इस पर डीएम ने हैरानी और नाराजगी जताई थी। इन स्थितियों में प्रशासन ने रामवृक्ष के स्थानीय मददगारों को चिह्नित कराया था। अब पुलिस जांच के दौरान इन लोगों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।