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Report: भारत में 20 फीसदी अपराधों में हमलावरों ने डार्क वेब का इस्तेमाल किया, रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा
Wed, 04 Dec 2024 11:11 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 04 Dec 2024 11:11 AM IST
सार
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में डार्क वेब का इस्तेमाल दोगुना हो गया है। इसका शिकार होने से बचने के लिए उपयोगकर्ताओं को अपने फोन और अन्य उपकरणों पर ऐप तक पहुंच मांगने वाली किसी भी ऑनलाइन अधिसूचना को अनुमति नहीं देनी चाहिए।
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साइबर अपराध (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
भारत में कम से कम 20 प्रतिशत साइबर अपराधों को डार्क वेब का इस्तेमाल कर अंजाम दिया जा रहा है। एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। 'डार्क वेब' इंटरनेट पर एक ऐसा मंच है जहां तक विशेष उपकरणों का उपयोग कर पहुंचा जा सकता है। डार्क वेब का इस्तेमाल करने वालों की पहचान और उनकी जगह का पता लगाना आमतौर पर बेहद मुश्किल होता है।
डार्क वेब का इस्तेमाल करते हैं साइबर अपराधी
साइबर सुरक्षा कंपनी लिसिएंथस टेक ने यह रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 'भारत में कम से कम 20 प्रतिशत साइबर अपराधों में ऑनलाइन हमलावरों ने डार्क वेब का इस्तेमाल किया।' साइबर अपराधी आमतौर पर डेटा सेंधमारी, हैकिंग, फिशिंग, रैनसमवेयर, पहचान की चोरी, मादक पदार्थों तथा हथियारों जैसे प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री व खरीद जैसे साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए 'डार्क वेब' का इस्तेमाल करते हैं। लिसिएंथस टेक के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) खुशहाल कौशिक ने कहा कि देश भर में दर्ज साइबर अपराध के कई मामलों का विस्तृत विश्लेषण के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है।
एक दशक में दोगुना हुआ डार्क वेब का इस्तेमाल
कौशिक ने बताया कि हाल ही में एक व्यक्ति को किराए के फ्लैट में गांजा उगाने और उसे डार्क वेब के जरिये बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वहीं पिछले साल दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पर रैनसमवेयर हमलों के लिए भी हमलावरों ने डार्क वेब का इस्तेमाल किया था। गुरुग्राम स्थित लिसिएंथस टेक साइबर सुरक्षा ऑडिट तथा सुरक्षा आकलन का काम करती है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में डार्क वेब का इस्तेमाल दोगुना हो गया है। इसका शिकार होने से बचने के लिए उपयोगकर्ताओं को अपने फोन और अन्य उपकरणों पर ऐप तक पहुंच मांगने वाली किसी भी ऑनलाइन अधिसूचना को अनुमति नहीं देनी चाहिए।
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डार्क वेब का इस्तेमाल करते हैं साइबर अपराधी
साइबर सुरक्षा कंपनी लिसिएंथस टेक ने यह रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 'भारत में कम से कम 20 प्रतिशत साइबर अपराधों में ऑनलाइन हमलावरों ने डार्क वेब का इस्तेमाल किया।' साइबर अपराधी आमतौर पर डेटा सेंधमारी, हैकिंग, फिशिंग, रैनसमवेयर, पहचान की चोरी, मादक पदार्थों तथा हथियारों जैसे प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री व खरीद जैसे साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए 'डार्क वेब' का इस्तेमाल करते हैं। लिसिएंथस टेक के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) खुशहाल कौशिक ने कहा कि देश भर में दर्ज साइबर अपराध के कई मामलों का विस्तृत विश्लेषण के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है।
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एक दशक में दोगुना हुआ डार्क वेब का इस्तेमाल
कौशिक ने बताया कि हाल ही में एक व्यक्ति को किराए के फ्लैट में गांजा उगाने और उसे डार्क वेब के जरिये बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वहीं पिछले साल दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पर रैनसमवेयर हमलों के लिए भी हमलावरों ने डार्क वेब का इस्तेमाल किया था। गुरुग्राम स्थित लिसिएंथस टेक साइबर सुरक्षा ऑडिट तथा सुरक्षा आकलन का काम करती है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में डार्क वेब का इस्तेमाल दोगुना हो गया है। इसका शिकार होने से बचने के लिए उपयोगकर्ताओं को अपने फोन और अन्य उपकरणों पर ऐप तक पहुंच मांगने वाली किसी भी ऑनलाइन अधिसूचना को अनुमति नहीं देनी चाहिए।
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