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G-20: भारतीय कामगारों के लिए विदेश से पैसे भेजने की लागत घटने की संभावना, जी-20 देशों से होगी चर्चा
Mon, 09 Jan 2023 12:02 AM IST
Jeet Kumar
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 09 Jan 2023 12:02 AM IST
सार
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कामगारों और भारत के बाहर कार्यरत कामगारों को मुद्रा स्थानांतरण की उच्च लागत वहन करनी पड़ती है, और जी-20 नेताओं ने इस दर को कम करने को बहुत महत्व दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Twitter@ Narendra Modi
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विस्तार
इस साल जी20 की अध्यक्षता भारत कर रहा है और केंद्र सरकार इसको लेकर कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती। भारत ने बाली में वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रभावशाली समूह जी20 की अध्यक्षता ग्रहण की थी। ये अध्यक्षता एक दिसंबर 2022 से 30 नवंबर 2023 तक भारत के पास है। इससे पहले एक शीर्ष अधिकारी ने रविवार को कहा कि जी20 नेताओं ने भारत के बाहर काम करने वाले श्रमिकों के लिए उच्च प्रेषण लागत को बहुत अधिक महत्व दिया है और 2027 तक इस दर को औसतन 3 प्रतिशत पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान में, एक देश से दूसरे देश में मुद्रा भेजने की लागत औसतन प्रत्येक लेनदेन का लगभग छह प्रतिशत है। वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक सलाहकार चंचल सरकार ने कहा कि कामगारों और भारत के बाहर कार्यरत कामगारों को मुद्रा स्थानांतरण की उच्च लागत वहन करनी पड़ती है, और जी-20 नेताओं ने इस दर को कम करने को बहुत महत्व दिया है।
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उन्होंने कहा कि 2027 तक इसे घटाकर औसतन दर 3 फीसदी लाने का लक्ष्य है। सरकार 9-11 जनवरी को कोलकाता में आयोजित जी-20 के वित्तीय समावेशन के लिए पहली वैश्विक भागीदारी बैठक से पहले संवाददातासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि डिजिटल वित्तीय समावेशन सिद्धांतों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम (एसएमई) उद्यम के लिए वित्त उपलब्धता के साथ मुद्रा स्थानांतरण लागत तीन दिवसीय कार्यक्रम में चर्चा के प्रमुख विषयों में से एक होगी।
भारत ने नवंबर में जी-20 की अध्यक्षता ग्रहण की। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश ने 2021 में दूसरे देशों से मुद्रा स्थानांतरण में 87 अरब डॉलर प्राप्त किए, और चीन तथा मैक्सिको जैसे देशों से आगे रहा।