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एलएसी विवाद: भारत-चीन के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघला सकता है ब्रिक्स सम्मेलन

Tue, 11 May 2021 02:58 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Tue, 11 May 2021 02:58 AM IST
सार

  • बाइडन सरकार से भारत की मजबूत नजदीकी नहीं चाहते चीन-रूस

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Relations between China and India may soften before BRICS summit
भारत चीन गतिरोध - फोटो : iStock

विस्तार

भारत को उम्मीद है कि कुछ महीने बाद यहां होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन से पहले चीन के रुख में नरमी आ सकती है और दोनों देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघल सकती है। दरअसल 2017 में दोकलम में भी भारत और चीन के बीच महीनों लंबी खींचतान चली थी। उसी साल ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी करनेवाले चीन के रुख में सम्मेलन से ठीक पहले नरमी आई थी।

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सरकारी सूत्रों के मुताबिक पूर्वी लद्दाख से जुड़े एलएसी पर जारी विवाद का कुछ ऐसा ही अंत हो सकता है। जिनपिंग नहीं चाहेंगे कि ब्रिक्स की बैठक तनावपूर्ण माहौल में हो। अब तक सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर डेढ़ दर्जन कोशिशों के बावजूद इस विवाद का पूरा समाधान नहीं हुआ है।
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कोरोना की खतरनाक दूसरी लहर के बावजूद भारत ने चीन से ऑक्सिनेटर सहित अन्य उपकरणों की मदद लेने के बदले इसे खरीदने पर जोर दिया है। इसके अलावा भारत क्वाड, दक्षिण चीन सागर और चीन को घेरने के लिए अमेरिका के नेतृत्व में बने कुछ देशों के समूह के साथ सक्रिय भागीदारी कर रहा है। इसके जरिये भारत चीन को किसी सूरत में पीछे नहीं हटने का स्पष्ट संकेत दे रहा है।
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इसलिए है चीन से नरमी की उम्मीद
दरअसल चीन और रूस दोनों नहीं चाहते कि अमेरिका की चीन विरोधी गतिविधियों में भारत उसके साथ सक्रियता से मुहिम चलाए। फिर भारत की मेजबानी में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन से पहले चीन अपने पड़ोसी देश के साथ सब कुछ ठीक होने का संदेश देना चाहेगा। ऐसा इसलिए कि इस सम्मेलन में खुद शी जिनपिंग शिरकत करेंगे।

इसके अलावा सामरिक दृष्टि से भारत का अमेरिका को मिलने वाला साथ दक्षिण चीन सागर सहित अन्य समुद्री सीमाओं पर चीन की परेशानी बढ़ाने वाला है। रूस भी नहीं चाहता कि ऐसे समय में जब कोरोना के मोर्चे पर दुनिया के सभी देश चीन को घेरने में जुटे हैं, भारत इसमें चीन विरोधी भूमिका निभाए। यही कारण है कि एलएसी विवाद के समय से ही रूस परोक्ष तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।


दोकलम की तर्ज पर कूटनीतिक जंग
भारत दोकलम विवाद की तरह चीन से कूटनीतिक जंग लड़ रहा है। चीन की रणनीति विवाद को लंबा खींच कर अपने प्रतिद्वंद्वी को हतोत्साहित करने की रही है। हालांकि इसे भांपते हुए भारत ने दोकलम की तर्ज पर लंबी कूटनीतिक जंग की रणनीति तैयार की। इसी रणनीति के तहत भारत वार्ता में पीछे नहीं हटने और जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई करने का संदेश दे रहा है।

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