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Hindi News ›   India News ›   Rekha Gupta is the role model of BJP's new politics, why is BJP running by keeping women at center

Rekha Gupta: रेखा गुप्ता भाजपा की नई राजनीति की रोल मॉडल, महिलाओं को केंद्र में क्यों रखकर चल रही भाजपा?

Wed, 19 Feb 2025 09:52 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 19 Feb 2025 09:52 PM IST
सार

Rekha Gupta: रेखा गुप्ता के रूप में भाजपा ने महिला, वैश्य और युवा समीकरण को साधने का काम किया है। उनका संघ का करीबी होना भी उनके पक्ष में गया है। उनका बनिया होना दिल्ली के लगभग आठ फीसदी मतदाताओं को साधने की कोशिश भी माना जा रहा है।

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Rekha Gupta is the role model of BJP's new politics, why is BJP running by keeping women at center
रेखा गुप्ता, दिल्ली की मुख्यमंत्री - फोटो : पीटीआई

विस्तार

आठ फरवरी को जब दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम आए थे, तभी से भाजपा के अनेक विधायकों-सांसदों के नाम मुख्यमंत्री के दावेदार के रूप में चलाए जा रहे थे। लेकिन प्रवेश वर्मा जैसे बड़े नाम, बांसुरी स्वराज जैसी हाई प्रोफाइल नेता और मनोज तिवारी जैसे स्टार नेताओं को पीछे छोड़ते हुए भाजपा ने रेखा गुप्ता को दिल्ली की मुख्यमंत्री के रुप में आगे बढ़ाया। भाजपा नेताओं का मानना है कि रेखा गुप्ता का नाम भाजपा-संघ की भविष्य की राजनीति को देखकर लिया गया है और यह भविष्य की दूरगामी राजनीति को देखकर लिया गया एक सोचा समझा निर्णय है।  
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दरअसल, अब पूरे देश के चुनाव में एक ट्रेंड देखा जा रहा है कि महिलाएं आगे बढ़चढ़कर वोट कर रही हैं। वे जिस भी पार्टी को ज्यादा वोट करती हैं, उसके बहुमत पाने की संभावना बढ़ जाती है। केंद्र सरकार ने जिस तरह संसद-विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण का कानून पास किया है, उसे भी इस बात का संकेत माना जा रहा है कि देश की आगे आने वाली राजनीति महिला केंद्रित होने जा रही है। भाजपा के लिए अभी तक यह एक कमी के रूप में देखी जा रही थी कि 18 से अधिक राज्यों में सत्ता में होने के बाद भी उसके पास कोई बड़ी महिला नेता का चेहरा नहीं है। रेखा गुप्ता के रूप में भाजपा पूरे देश की महिलाओं को एक संदेश देना चाहती है। यही कारण है कि उनका ना्म सबसे आगे निकल गया।  
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रेखा गुप्ता के रूप में भाजपा ने महिला, वैश्य और युवा समीकरण को साधने का काम किया है। उनका संघ का करीबी होना भी उनके पक्ष में गया है। उनका बनिया होना दिल्ली के लगभग आठ फीसदी मतदाताओं को साधने की कोशिश भी माना जा रहा है। गुप्ता टाइटल उन्हें यूपी-बिहार के लोगों को भी करीब लाने का संदेश देगा, हालांकि वे मूलरूप से हरियाणा की हैं। यानी एक रेखा गुप्ता के सहारे भाजपा ने कई समीकरणों को साधने का काम किया है।
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प्रवेश वर्मा और बांसुरी स्वराज जैसे नेताओं का नाम भी दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की रेस में था, लेकिन उनका एक राजनीतिक परिवार से संबंध होना उनके लिए इस समय के समीकरणों में ठीक नहीं बैठ पाया। विजेंद्र गुप्ता दिल्ली के एक मंजे नेता थे, उनके सहारे भी भाजपा वैश्य समुदाय को साध सकती थी,  लेकिन वे केवल आठ फीसदी लोगों के लिए ही बड़ा संदेश दे सकते थे, जबकि रेखा गुप्ता के माध्यम से भाजपा ने दिल्ली और देश की लगभग आधी आबादी को संदेश देने का काम किया है।


लेकिन भाजपा लगातार हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान में यही संदेश देती आ रही है कि वह अपने किसी साधारण से कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री बना रही है। इस बार भी उसने साधारण कार्यकर्ता को ही मुख्यमंत्री बनाया जबकि भाजपा में कई हाई प्रोफाइल नेता इस पद पर अपनी टकटकी लगाए बैठे थे। 
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