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ICMR: हृदय रोगों के बढ़ते जोखिमों के कारणों का खुलासा, पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में लिपिड स्तर ज्यादा गड़बड़
Fri, 06 Oct 2023 05:47 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Fri, 06 Oct 2023 05:47 AM IST
सार
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के शोधकर्ताओं ने इसी जांच का सहारा लेकर यह खुलासा किया है। मध्य प्रदेश, त्रिपुरा और झारखंड के अस्पतालों के साथ मिलकर आईसीएमआर ने यह अध्ययन किया है, जिसे इंडियन जर्नल मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित किया है।
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विस्तार
हृदय रोगों के लिए जिम्मेदार रक्त लिपिड प्रोफाइल पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में अधिक गड़बड़ मिली है। शोध में 10 में से आठ महिलाओं में रक्त लिपिड का स्तर असामान्य पाया गया। यह भविष्य में हृदय रोगों के जोखिम को कई गुना बढ़ा सकता है। लिपिड प्रोफाइल यानी एक तरह की रक्त जांच है, जो रक्त में मौजूद कॉलेस्ट्रोल व प्रोटीन के स्तर को बताता है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के शोधकर्ताओं ने इसी जांच का सहारा लेकर यह खुलासा किया है। मध्य प्रदेश, त्रिपुरा और झारखंड के अस्पतालों के साथ मिलकर आईसीएमआर ने यह अध्ययन किया है, जिसे इंडियन जर्नल मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित किया है। शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए 20 से 60 साल की आयु वाले 445 लोगों का चयन किया, जिसमें पुरुष और महिला दोनों शामिल थीं।
86% महिलाओं में एक जैसी स्थिति
अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि 86 फीसदी महिलाएं और 71 फीसदी पुरुषों में लिपिड प्रोफाइल असामान्य मिली है, लेकिन जब अगले 10 साल में हृदवाहिनी रोग विकसित होने की बात करें तो तीन फीसदी से ज्यादा लोगों में यह आशंका देखने को मिली, जो पुरुष आबादी है।
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और भी कई परेशानी पता चलीं
अगरतला मेडिकल कॉलेज के डॉ. रितुपर्णा दास और आईसीएमआर के पोषण विभाग विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक सुरंजना डे ने बताया कि जांच के दौरान 83.4 फीसदी लोगों में लिपिड प्रोफाइल असामान्य मिली है। इनमें से 22.2, 42 और 70.3 फीसदी लोगों में क्रमश: हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया, हाइपरट्रिग्लिसराइडिमिया और लिपो प्रोटीन स्तर कम मिला है जो रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होने का संकेत देता है। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की वजह से रक्त कोशिकाओं में ब्लॉकेज होने लगते हैं।
जोखिम से बचने के लिए समय पर जांच जरूरी
शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर पुरुष और महिलाओं के आधार पर देखें तो पुरुषों में कार्डियोवास्कुलर रोग का जोखिम ज्यादा है, लेकिन महिलाओं में भी लिपिड प्रोफाइल असामान्य होने से कई तरह की स्वास्थ्य चुनौतियां विकसित हो सकती हैं। इन बीमारियों से निपटने के लिए समय पर जांच बहुत फायदेमंद है, जिसे फिजुलखर्च न समझते हुए समय पर सतर्क रहा जा सकता है।
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भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के शोधकर्ताओं ने इसी जांच का सहारा लेकर यह खुलासा किया है। मध्य प्रदेश, त्रिपुरा और झारखंड के अस्पतालों के साथ मिलकर आईसीएमआर ने यह अध्ययन किया है, जिसे इंडियन जर्नल मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित किया है। शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए 20 से 60 साल की आयु वाले 445 लोगों का चयन किया, जिसमें पुरुष और महिला दोनों शामिल थीं।
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86% महिलाओं में एक जैसी स्थिति
अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि 86 फीसदी महिलाएं और 71 फीसदी पुरुषों में लिपिड प्रोफाइल असामान्य मिली है, लेकिन जब अगले 10 साल में हृदवाहिनी रोग विकसित होने की बात करें तो तीन फीसदी से ज्यादा लोगों में यह आशंका देखने को मिली, जो पुरुष आबादी है।
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और भी कई परेशानी पता चलीं
अगरतला मेडिकल कॉलेज के डॉ. रितुपर्णा दास और आईसीएमआर के पोषण विभाग विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक सुरंजना डे ने बताया कि जांच के दौरान 83.4 फीसदी लोगों में लिपिड प्रोफाइल असामान्य मिली है। इनमें से 22.2, 42 और 70.3 फीसदी लोगों में क्रमश: हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया, हाइपरट्रिग्लिसराइडिमिया और लिपो प्रोटीन स्तर कम मिला है जो रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होने का संकेत देता है। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की वजह से रक्त कोशिकाओं में ब्लॉकेज होने लगते हैं।
जोखिम से बचने के लिए समय पर जांच जरूरी
शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर पुरुष और महिलाओं के आधार पर देखें तो पुरुषों में कार्डियोवास्कुलर रोग का जोखिम ज्यादा है, लेकिन महिलाओं में भी लिपिड प्रोफाइल असामान्य होने से कई तरह की स्वास्थ्य चुनौतियां विकसित हो सकती हैं। इन बीमारियों से निपटने के लिए समय पर जांच बहुत फायदेमंद है, जिसे फिजुलखर्च न समझते हुए समय पर सतर्क रहा जा सकता है।