डिजिटल पेमेंट को सस्ता बनाने में जुटा RBI
रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) को बताया है कि नकदी के इस्तेमाल को कम करने के लिए आरबीआई डिजिटल ट्रांजेक्शन में होने वाले खर्च को कम करने के लिए कई उपायों पर काम कर रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि आरबीआई एक ऐसा तंत्र विकसित करने में जुटा है, जिससे ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पर होने वाला खर्च कम हो जाएगा। तंत्र विकसित करने के लिए आरबीआई इससे जुड़े सभी पक्षों से बात कर रहा है। पटेल ने इस दौरान निकट भविष्य में एटीएम और बैंकों में नकदी की समस्या पूरी तरह से खत्म हो जाने का आश्वासन भी दिया।
पटेल ने लोक लेखा समिति के सामने माना कि नोटबंदी के फैसले के कारण देश की जीडीपी में कुछ समय के लिए गिरावट आएगी। हालांकि नकदी के कम इस्तेमाल के कारण देश की अर्थव्यवस्था को इस फैसले के कारण आगे चल कर अनेक लाभ होंगे।
आरबीआई को नहीं पता कि चलन में कितने थे पुराने नोट
समिति के एक सदस्य के मुताबिक पटेल ने समिति को बताया कि इस कड़ी में 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक नई करेंसी को चलन में लाया जा चुका है। उन्होंने नोटबंदी के बाद बैंकों में बड़ी संख्या में जमा हुए पुराने 500 और 1000 के नोट पर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि आरबीआई की निगाह इस दौरान बैंक खातों में जमा हुई बड़ी और संदेहास्पद रकम पर है। वित्तीय आसूचना इकाई (एफआईयू) और आयकर विभाग इस मामले में जरूरी कार्रवाई करेगा।
गौरतलब है कि इस समिति के अध्यक्ष केवी थॉमस हैं। इनके सदस्यों में एस एस आहलुवालिया, भर्तृहरि मेहताब, राजीव प्रताप रूडी, निशिकांत ठाकुर, रमेश पोखरियाल निशंक, जयंत सिन्हा, अनुराग सिंह ठाकुर, सुदीप बंदोपाध्याय शामिल हैं। गौरतलब है कि पटेल को दो दिन पूर्व संसद की वित्त मामलों की संसदीय समिति ने तलब किया था। पीएसी पटेल को इससे पहले भी एक बार तलब कर चुकी है।
आरबीआई गवर्नर ने लोक लेखा कमेटी से कहा कि केंद्रीय बैंक को यह पता नहीं है कि सिस्टम में कितने प्रतिबंधित (पुराने 500 और 1000 के नोट) नोट मौजूद थे। रिजर्व बैंक जमा किए गए नोटों से सर्कु लेशन में मौजूद ऐसे नोटों से मिलान कर रहा है।