जरूरी है जानना: दुष्कृत्य पर क्या कहता है कानून और कितनी है सजा
- दुष्कृत्य को लेकर देश में क्या कानून हैं
- दुष्कृत्य पर क्या है सजा?
- आसान भाषा में जानिए इस कानून को
- धारा 376 व 375 के अलावा कौन सी धाराएं आपको जानना चाहिए
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हैदराबाद में एक डॉक्टर से सामूहिक दुष्कर्म और फिर हत्या के मामले ने पूरे देश में गुस्सा भर दिया। लोगों को 2012 में हुआ दिल्ली का निर्भया कांड याद आ गया। सरकारों और प्रशासन पर नाकामी की उंगली उठने लगी। निर्भया कांड के बाद रेप से जुड़े कानून को और सख्त बनाने की उम्मीद थी। माना जा रहा था कि जो सख्त कानून बनेगा उससे देश में बलात्कार जैसी वीभत्स घटनाएं रुकेंगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सभ्य समाज के चेहरे पर चिंता की लकीरें और साफ देखी जा रही हैं। चिंता इस बात को लेकर अधिक है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो क्या कोई मां-बाप कैसे अपनी बेटियों को घर की चहारदीवारी से बाहर भेजेंगे? मुल्क की आधी आबादी अगर विकास प्रक्रिया से दूर हो जाती है तो देश और समाज की तरक्की का क्या होगा? और फिर लाख कोशिश के बावजूद क्या हम सभ्य समाज कहलाने लायक रह जाएंगे?
भारतीय दंड संहिता में धारा 376 व 375 के तहत दुष्कृत्य के लिए सजा का प्रावधान है
तो आइए जानते हैं कि आखिर हमारे देश में दुष्कृत्य से जुड़े कानून क्या हैं और इस कृत्य पर कैसी और कितनी सजा का प्रावधान है। जब भी इस तरह का कोई मामला सामने आता है तो कानून व्यवस्था के ऊपर सवाल खड़े होते हैं और हमारे मन में भी बहुत सारे प्रश्न उत्पन्न होते हैं जैसे:
- देश में दुष्कृत्य को लेकर क्या कानून है?
- इसके अंतर्गत दोषियों को क्या सजा होती है?
- आज जो कानून उपलब्ध हैं, क्या वो कड़ी सजा देने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं?
- भारतीय दंड संहिता में धारा 376 व 375 के तहत दुष्कृत्य के लिए सजा का प्रावधान है?
- धारा 376 व 375 के अलावा भी कौन सी धाराएं हैं जिनके बारे में जानकारी होना अतिआवश्यक है?
जानिए: दुनियाभर में बच्चियों के साथ दुष्कृत्य की सजा क्या है?
भारतीय कानून में दुष्कृत्य को बहुत गंभीर रूप से देखा जाता है। इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। अगर यह अपराध साबित होता है तो कठोर सजा दी जाती है। मगर इस मामले की कानूनी प्रक्रिया इतनी लंबी हो जाती है कि हिम्मत टूटने लगती है। इसलिए बहुत सारे मामले बीच में ही दम तोड़ देते हैं। बलात्कार के लिए भारतीय दंड संहिता में धारा 376 व 375 के तहत सजा का प्रावधान किया गया है।
भारतीय दंड संहिता में धारा 376
- किसी भी महिला के साथ दुष्कृत्य करने पर इसी धारा 376 के तहत मुकदमा चलाया जाता है।
- अगर आरोपी पर दोष साबित हो जाता है तो सजा दी जाती है।
- दोषी को कम से कम पांच साल की सजा।
- अधिकतम 10 साल तक कठोर सजा दिए जाने का प्रावधान है।
- जघन्य अपराध के लिए फांसी की सजा भी सुनाई जाती है।
- बहुत सारे मामलों में कुछ विशेष कारणों से सजा की अवधि को काम भी किया जा सकता है।
आईपीसी की धारा 376 (ई): निर्भया कांड के बाद संविधान संशोधन हुआ
2012 में दिल्ली हुआ निर्भया कांड एक ऐसी घटना थी, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया थां उसके बाद दुष्कृत्य को लेकर जोरशोर से आवाजें उठने लगीं। उसी दौरान संविधान संशोधन के माध्यम से आईपीसी की धारा 376 (ई) के तहत बार-बार बलात्कार के दोषियों को उम्रकैद या मौत की सजा का प्रावधान किया गया था और उसके बाद मौत की सजा को जोड़ दिया गया।
आईपीसी की धारा 375
अश्विनी उपाध्याय, वकील, सर्वोच्च न्यायलय, भारतआईपीसी की धारा 375 के अनुसार दुष्कृत्य की परिभाषा को 6 प्रकार से परिभाषित किया गया है:
पहली परिभाषा- महिला की इच्छा के खिलाफ उसके साथ रिश्ता बनाना, उसके साथ जबरदस्ती करना
दूसरी परिभाषा- बिना उसकी सहमति लिए हुए उससे रिश्ता कायम करना
तीसरी परिभाषा- उसको डराकर, धमकाकर, ब्लैकमेल करके उससे के साथ रिश्ता बनाना, भले ही उसकी सहमति ली गई हो
चौथी परिभाषा-शादी का प्रलोभन देकर या उसको यह उम्मीद जगाकर कि वो उसका पति है, उसके साथ रिश्ता बनाना
पांचवीं परिभाषा- महिला के होश और हबास में न रहने पर उसकी सहमति ले लेना और उसके साथ रिश्ता बनाना या नशे की हालत में उसके साथ रिश्ता कायम करना
छठी परिभाषा- अगर सहमति हो भी मगर लड़की की आयु 16 साल से कम होना और उसके साथ संबंध बनाना
क्या है दुष्कृत्य
- महिला की इच्छा के विरुद्ध
- महिला की मर्जी से, लेकिन यह सहमति उसकी हत्या करने या नुकसान पहुंचाने या उसके किसी करीबी व्यक्ति के साथ ऐसा करने का डर दिखाकर हासिल की गई हो।
- महिला की रजामंदी से, लेकिन महिला ने यह सहमति उस व्यक्ति की ब्याहता होने के भ्रम में दी हो।
- महिला की सहमति से, लेकिन यह सहमति देते वक्त महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं हो या फिर उस पर किसी नशीले पदार्थ का प्रभाव हो और लड़की रजामंदी देने के परिणाम समझने की हालत में न हो।
- महिला की उम्र अगर 16 साल से कम हो तो उसकी इच्छा या उसकी सहमति के बिना किया गया सेक्स।
विनोद मल्ल, भारतीय पुलिस सेवाअगर हम इस घटना का कानूनी पहलू देखें तो भारतीय दंड संहिता की धारा 375 में बलात्कार परिभाषित किया गया है । 375 आईपीसी के अनुसार अगर किसी की इच्छा के विरुद्ध संभोग किया जाए या उसकी सहमति के बिना संभोग किया जाए तो इसे बलात्कार कहते हैं।
इसके अलावा अगर सहमति प्राप्त भी की गई हो लेकिन वह सहमति किसी मृत्यु या हिंसा के डर से दी गई हो तो वह भी बलात्कार माना जाएगा। अगर सहमति देते समय महिला मानसिक रूप से स्वस्थ न हो या कोई नशीला पदार्थ देने के कारण उसका मानसिक स्वास्थ्य ठीक ना हो और इस मानसिक स्थिति में वह चीजों को समझने की स्थिति में न हो तो उसे भी बलात्कार की श्रेणी में रखा जाएगा।
अगर लड़की 16 साल से कम उम्र की हो तो सहमति हो या ना हो उसे बलात्कार माना जाएगा। इस अपराध के लिए सजा भारतीय दंड संहिता की धारा 376 में दिया गया है जिसके अनुसार इस अपराध के लिए दंड कम से कम 7 वर्ष है और जो आजीवन कारावास जितना लंबा भी हो सकता है।
जीतेंद्र राणा, आईपीएसहमारा कानून मजबूत है मगर जरूरत है घर से ही लड़कों को ये शिक्षा देने की महिलाओं की इज्जत करनी चाहिए, उनका सम्मान करना चाहिए , उनकों महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनाने की , ऐसे मामलों में पुलिस का तुरंत एक्शन और फास्ट ट्रैक कोर्ट की मजबूत व्यवस्था होनी ही चाहिए, और जैसे ही ऐसा मामला संज्ञान में आए तो प्रो- एक्टिव मानसिकता की जरूरत है "
सहमति से बना संबंध दुष्कृत्य नहीं है
अगर आपसी सहमति हो और लड़की बालिग हो तो ऐसे में बनाया गया संबंध दुष्कृत्य नहीं माना जाता है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में यह व्यवस्था दी थी कि अगर लड़की शिक्षित है और 18 साल से अधिक उम्र की है तो वो अपना रिश्ता बना सकती है और वो रिश्ता खराब हो जाने पर वो उसको बलात्कार नहीं कह सकती है और न ही दुष्कृत्य का आरोप लगा सकती है।
भारत में क्या है कानून
धारा 376(क)
अपनी पत्नी से अलग रहने के बाद भी उसके साथ संबंध बनाना भी दुष्कृत्य की श्रेणी में आता है। दो वर्ष तक की सजा और जुर्माना देना होगा।
आईपीसी की धारा 376 (ख)
धारा 376 (ख)
लोक सेवा के द्वारा अगर कोई महिला उनकी अभिरक्षा में है, और ऐसी स्थिति में उसके साथ संबंध बनाना भी दुष्कृत्य की श्रेणी में आता है। पांच साल की सजा और जेल के साथ जुर्माना भी देना पड़ सकता है।क्या है धारा 376(ग)
धारा 376 (ग)
किसी कैदी महिला के साथ जेल के अधिकारी का संबंध बनाना भी दुष्कृत्य की श्रेणी में आता है। जिसके लिए पांच साल तक की सजा का प्रावधान है।
धारा 376( घ )
धारा 376(घ)
किसी अस्पताल के कर्मचारी के द्वारा किसी महिला के साथ अस्पताल के अंदर जबरन रिश्ते बनाना भी दुष्कृत्य की श्रेणी में आता है। इसके लिए पांच साल तक की सजा हो सकती है।सिर्फ यौन हिंसा ही नहीं, कई देशों में महिलाओं के पास नहीं है अधिकार
2016 में जारी विश्व बैंक की की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में 155 देश ऐसे हैं, जहां ऐसे कानून हैं जो महिलाओं को आर्थिक विकास यानि आर्थिक मौके मिलने से रोकते हैं।
- दुनिया में 100 देश ऐसे भी हैं, जहां औरतों को क्या काम करना है और क्या नहीं, इस पर पाबंदी है।
- 18 देश ऐसे भी हैं, जहां पर पति यह तय करता है कि पत्नी को काम करना भी है या नहीं मतलब पत्नी के काम करने को लेकर सभी निर्णय पति लेता है।
- दुनिया में 82 में से 15 देश ऐसे हैं, जिनमें शामिल हैं बेल्जियम, नीदरलैंड्स, लग्ज़मबर्ग और जॉर्डन के साथ साथ नाइजीरिया, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, यमन जहां पर बलात्कार का मामला हिंसा से भी ज्यादा नैतिकता का हो जाता है।
हरी नारायण मिश्र चारि, आईपीएसतकनीकी सुलभता, परिवार और बच्चों के बीच में बढ़ती हुई संवादहीनता, सजा के अंतिम रूप के क्रियान्व्यन में अनावश्यक विलम्ब इस तरह की बढ़ती घटनाओं की सबसे प्रमुख वजह है, परिवार बच्चों की प्रथम पाठशाला होती है इसलिए प्रारंभिक तौर पर माता पिता को बच्चों के विकास के समय ध्यान देना चाहिए "
संजय सिंह, आईपीएसकिसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा ना करें, पुलिस का नंबर अपने फोन में रखे और पुलिस सुरक्षा ऐप का इस्तेमाल करें, 100 और 112 नंबर अपने फ़ोन में स्पीड डायल में रखे "
दीपक वर्णवाल, आईपीएसयह बहुत ही दर्दनाक घटना है और ऐसे मामलों में जल्द से जल्द सजा होनी चाहिए और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किसी एक की नहीं बल्कि सबकी जिम्मेदारी बनती हैं, इसका निवारण घर से ही शुरू होना चाहिए "
विनोद मल्ल, आईपीएसपिछले दिनों हैदराबाद में हुई बलात्कार की घटना ने हमारी सामाजिक चेतना को झकझोर दिया है। हमें ऐसे समाज में रहने पर शर्म का अनुभव होता है जहां इतनी क्रूरता के साथ अमानवीय कृत्य हुआ ।"
*Bibliography and References
(रिपोर्ट्स)
2016 में जारी विश्व बैंक की की एक रिपोर्ट
2017 की एक रिपोर्ट में इक्वलिटी नाउ (Equality Now)
एमनेस्टी इंटरनेशनल की 2013 की एक रिपोर्ट
2016 में हक-सेंटर फॉर चाइल्ड राइट रिपोर्ट
अन्य सन्दर्भ सामग्री
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी)
एक्सपर्ट्स की राय ( कानूनविद और भारतीय पुलिस अधिकारियों से बातचीत )