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आरएसएस के शीर्ष पदाधिकारियों की बैठक में उठ सकता है राम मंदिर का मुद्दा
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 29 Oct 2018 08:01 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले की सुनवाई जनवरी के पहले हफ्ते तक के लिए टाल दी है। इसी बीच आरएसएस के शीर्ष पदाधिकारियों की बैठक बुधवार को ठाणे में हो रही है। इस बैठक में आरएसएस के शीर्ष लगभग 350 पदाधिकारियों के शामिल होने की संभावना है। इसमें संघ के 11 क्षेत्रों, 43 प्रांतों के संघ चालक, कार्यवाह और अन्य पदाधिकारी भाग लेंगे। स्वयं सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह भैयाजी जोशी भी इस बैठक में भाग लेंगे। माना जा रहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में इस बैठक में विचार हो सकता है।
हालांकि आरएसएस ने इसे प्रतिवर्ष दशहरे और दीपावली के बीच होने वाली एक सामान्य बैठक बताया है। अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने ठाणे में इसके बारे में जानकारी देते हुए कहा है कि यह एक सामान्य बैठक है जिसमें पूर्व में लिए गए निर्णयों की समीक्षा की जाती है। इसमें कोई नया प्रस्ताव पास नहीं लिया जाता है।
लेकिन इस बैठक को इस अर्थ में महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है कि मोहन भागवत हाल ही के कई कार्यक्रमों में सरकार से राममंदिर के निर्माण के लिए बिल लाने की मांग कर चुके हैं। अब कोर्ट के द्वारा इस मामले को जनवरी तक के लिए टाल दिये जाने के बाद चुनाव से पहले कोई फैसला आने की उम्मीद धूमिल हो गई है। मंदिर निर्माण के लिए सरकार द्वारा कोई कदम उठाने के लिए अध्यादेश लाने या अगले शीतकालीन सत्र में बिल लाने के लिए समय भी बहुत कम रह गया है। ऐसे में संघ की बैठक को बहुत महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
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हालांकि आरएसएस ने इसे प्रतिवर्ष दशहरे और दीपावली के बीच होने वाली एक सामान्य बैठक बताया है। अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने ठाणे में इसके बारे में जानकारी देते हुए कहा है कि यह एक सामान्य बैठक है जिसमें पूर्व में लिए गए निर्णयों की समीक्षा की जाती है। इसमें कोई नया प्रस्ताव पास नहीं लिया जाता है।
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लेकिन इस बैठक को इस अर्थ में महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है कि मोहन भागवत हाल ही के कई कार्यक्रमों में सरकार से राममंदिर के निर्माण के लिए बिल लाने की मांग कर चुके हैं। अब कोर्ट के द्वारा इस मामले को जनवरी तक के लिए टाल दिये जाने के बाद चुनाव से पहले कोई फैसला आने की उम्मीद धूमिल हो गई है। मंदिर निर्माण के लिए सरकार द्वारा कोई कदम उठाने के लिए अध्यादेश लाने या अगले शीतकालीन सत्र में बिल लाने के लिए समय भी बहुत कम रह गया है। ऐसे में संघ की बैठक को बहुत महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
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